Saturday, April 9, 2011

एनजीओ पुराण भाग ३४

गांव में जब वो ग्यारहवी की परीक्षा में पूरक पा गया तो भाग आया एक संस्था में फिर वहा चाय पानी बनाने लगा और धीरे धीरे सब "काम" सीख गया, एक लडकी पटाई, पर मामला जमा नहीं फिर अपनी जाति की नौकरी वाली लडकी से शादी कर ली, कई जगह काम किया और खूब नक़ल करके लेख लिखे, छात्रवृति कबाड़ी और पुरस्कार भी जुगाड़े, बीबी की नौकरी थी ही, बस तीन चार मकान बना लिए, आजकल प्रदेश के व्यापारिक नगर में ज्ञान की दूकान चलाता है जय हो(एनजीओ पुराण भाग ३४ समाप्त)

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