Wednesday, April 13, 2011

एनजीओ पुराण ३८

राष्ट्रीय स्वास्थय मिशन में काम करके काम इतना हावी हो गया था उस पर की वो सबको एक ही सांचे में देखता था घर हो या बाहर, सब तरफ उसे लोग टारगेट ही नजर आते थे, उसे हर जगह कमीशन दीखता था, और देश के स्वास्थ्य पर बात करते समय उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक आ जाती थी, आखिर यह स्वाभाविक भी था क्योकि इसी से तो उसने कार, घर, धन दौलत और सब इकट्ठा किया था. आजकल वो एक नई नौकरी में है पर उस चोले से निकल नहीं पा रहा है बेचारा, उसकी प्रतिबद्धता जबरदस्त है कोइ जवाब नहीं (३८ समाप्त)

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