Thursday, April 14, 2011

एनजीओ पुराण भाग ४२

जे एन यू से आनी वाली सारी खूबसूरत लड़किया इसी दूकान पर आती थी और समाज सेवा के बुनियादी उसूल समझती थी, हाथो में सिगरेट, होठो पर अंगरेजी, दिमाग में फितूर और कुछ कर दिखाने का जज्बा, दूकान के लोग बड़े सेवाभावी थे और यहाँ अक्सर मेले लगते रहते थे ना ना प्रकार के मेले- प्रजनन तंत्र के मेलो से लेकर शिक्षा के मेले नई नई किताबे भी छापती थी. पिछले कई सालो से दूकान बंद हो गयी है क्योकि साले लोकल लौंडे बदमाश हो गए थे अपना हिस्सा मांगने लगे थे हर तरह के "काम" में(एनजीओ पुराण भाग ४२ समाप्त)

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