Saturday, April 25, 2015

Posts of 25 April - मुफलिसी



बंगाली चौराहे से आज बस में सीट मिलने से मैंने तसल्ली से अपने कागज़ बेग से निकाले और तीन चार नत्थी किये दस्तावेजों में से मैंने तीन चार आलपिन निकालकर फेंक दी और सभी दस्तावेजों को एक कर दिया. तभी मैंने देखा कि एक बन्दे ने नीचे झुककर तत्काल तीनों आलपिनें उठा ली और उन तीन आलपिनों को अपने मुंह में दबा लिया. मै देखता रहा आश्चर्य से उसे कि यह क्या करेगा इन फेंकी हुई आलपिनों का ? 

वह चुपचाप बडबडा रहा था कि ये तीन आलपिन मेरे कितने काम आयेगी मेरे घर में छोटी की फ्रॉक के बटन टूट गए है कम से कम एक उसमे लग जायेगी, दूसरी फटे हुए बी पी एल कार्ड के पन्नों को जोड़ने में काम आयेगी - ताकि राशन, पेंशन और नगर निगम से मिलने वाले सारे लाभ ले सकूं और एक मै सम्हाल कर रखूंगा  - पता नहीं किस मुसीबत में काम आ जाए और वह बिलकुल हावरा बावरा होकर खुशी से झूमता हुआ गांधी हाल पर बस से उतर गया.


#मुफलिसी


बड़े सनेह लघुन्ह पर करहीं। गिरि निज सिरनि सदा तृन धरहीं॥
जलधि अगाध मौलि बह फेनू। संतत धरनि धरत सिर रेनू॥
[ बड़े छोटों पर स्नेह करते ही हैं. पहाड़ अपने सिरों पर सदैव घास को धारण किये रहते हैं, अगाध सागर मस्तक पर फेन धरे रहता है और धरती अपने शीर्ष पर सदैव धूल रखे रहती है]

मप्र से प्रमुख स्वास्थ्य सचिव प्रवीर कृष्ण की विदाई अब कमान योग्य प्रशासिका गौरी सिंह के हाथ में। स्वास्थ्य विभाग निश्चित ही सुधरेगा कोई शक नही लिखकर ले लो। 
बधाई और शुभकामनाये
सौ सौ सलाम कविता करकरे को और सच में ऐसे लोगों से ही भारत है और भारत महान है वरना मायावती, मुलायम, नितीश, लालू, अमित शाहों,  मोदी, अरविन्द, आशुतोषों और राहुलों की कमी नहीं है देश में........

श्रीमती कविता करकरे का पार्थिव शरीर आज सुबह पंचतत्व में विलीन हो गया। शहीद हेमंत करकरे की पत्नी नहीं रहीं, जाते-जाते एक बार फिर उन्होंने ज़माने को संदेश दे दिया कि वो एक वीर की पत्नी ही नहीं, खुद भी एक वीरांगना हैं।

उनके पति हुए थे देश के लिए कुर्बान, उन्होंने मरने के बाद कईयों को दिया जीवनदान! ये कहानी है कविता करकरे की, शहीद हेमंत करकरे की पत्नी। वही हेमंत करकरे जो 26/11 के आतंकी हमले में शहीद हो गए थे। 6 साल पहले हेमंत करकरे डिनर के लिए पत्नी के साथ आउटिंग पर गए थे। एक फोन कॉल के बाद आधे में डिनर छोड़कर निकले और फिर कभी नहीं लौटे।

उसी वीर की पत्नी ने साबित कर दिया कि वो भी किसी से कम नहीं। सोमवार सुबह मष्तिष्क घात के बाद कविता दुनिया छोड़ गईं। लेकिन जाते-जाते तीन लोगों को जिंदगी दे गईं। कविता की एक किडनी 48 साल के एक शख्स को दी गई, जो 10 साल से डायलिसिस पर बस इस इंतज़ार में था कि कोई उसे जिंदा रहने के लिए एक किडनी दे दे।

दूसरी किडनी जसलोक अस्पताल में 59 साल के एक शख्स को दी गई, जो सात साल से किडनी ट्रांसप्लांट का इंतज़ार कर रहा था और कविता के लीवर ने कोकिलाबेन अम्बानी अस्पताल में 49 साल के एक शख्स को नई ज़िंदगी दे दी।

परेल के हाजी बचूली में दान की गईं कविता ने आंखें भी कई लोगों की रोशनी बन रही हैं। कविता करकरे के इस महादान के पीछे उनके तीन बच्चों का भी हाथ है, जिन्होंने अपनी भावनाओं पर काबू रखते हुए अपनी मां के शरीरदान की इजाज़त दे दी।

कविता करकरे ने जाते-जाते ये बता दिया कि उनका परिवार जान देना भी जानता है और जिंदगी देना भी। इसे वीरों का परिवार कहें, तो गलत नहीं होगा। इस परिवार को शत शत नमन।


अनुज Rahul Jain​ का धन्यवाद कि यह खबर साझा की.

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