Monday, February 18, 2013

आधी रात यह पदचाप सड़क पर- आशुतोष दुबे





इसमें किसी विजेता की धमक नहीं
किसी चोर की सतर्कता भी नहीं--

इसमें एक आकुलता है वापसी की
एक संकोच सा है और एक उत्साह भी

यह सोचना भी कितनी राहत देता है
कि कहीं कोई लौट रहा है
और कोई दरवाज़ा उसके लिए
खुलने का इंतज़ार कर रहा है
- आशुतोष दुबे 

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