Friday, December 14, 2012

मेरे नदीम मेरे हमसफ़र - साहिर लुधियानवी

मेरे नदीम मेरे हमसफ़र उदास न हो

मेरे नदीम मेरे हमसफ़र उदास न हो
कठिन सही तेरी मंजिल मगर उदास न हो

कदम कदम पे चट्टानें खडी रहें लेकिन
जो चल निकले हैं दरिया तो फिर नहीं रुकते
हवाएँ कितना भी टकराएँ आँधियाँ बनकर
मगर घटाओं के परचम कभी नहीं झुकते

मेरे नदीम मेरे हमसफ़र

हर इक तलाश के रास्ते में मुश्किलें हैं मगर
हर इक तलाश मुरादों के रंग लाती है
हजारों चांद सितारों का ख़ून होता है
तब एक सुबह फ़िजाओं पे मुस्कुराती है

मेरे नदीम मेरे हमसफ़र

जो अपने खून को पानी बना नहीं सकते
वो जिंदगी में नया रंग ला नहीं सकते
जो रास्ते के अँधेरों से हार जाते हैं
वो मंजिलों के उजाले को पा नहीं सकते

मेरे नदीम मेरे हमसफ़र

-साहिर लुधियानवी

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