Wednesday, December 5, 2012

और लो एक बार फ़िर एफडीआई

मेरे घर के पास किराने वाला पूछ रहा है इसका मतलब क्या ?
अभी एक सब्जी वाला भी पूछकर गया कि भैया ये दस किलो मैथी बिकी नहीं सारे मोहल्लों में घूम लिया हूँ क्या कोई सरकार या एफडीआई वाला इसे ले लेगा क्या, ताकि मै घर जाते समय दूध और बाकी सामान ले जाऊं घर पर बीबी-बच्चे राह तक रहे होंगे!!!!!

अब मै क्या कहू मेरे पास कोई जवाब नहीं है.!!!!

कल सुषमा जी ने आगाज़ कर दिया था कि हम आपको मनाकर जीतना चाहते है हराकर नहीं..........तो अगर प्रस्ताव गिरता है तो किसकी गलती और बसपा और सपा ने अपनी औकात दिखा दी है.

सोनिया जी ने हमेशा की तरह तरकश में रखा सीबीआई का तीर सम्हाल कर रखा ही है ना वक्त - बेवक्त के लिए...........बस अब भुगतो.

कुल मिलाकर एक ही बात समझ आई कि बस सब चोर है और सब शातिर है और इस देश की जनता का भला तो कोई नहीं चाहता बस सबको अभी तक "एक्सपोर्ट वाले माल"का चस्का है और स्विस बेंक दिखता है बाकी तो अब राम ही राखे.

खूब भन्ना रहे थे ना मौन मोहन सिंह पर लो देख लो कि कितनी राजनीति सीख गये है और कितना प्यारा "गेम" खेलते है.......दो बड़े दलों को प्यार से बाहर करवा दिया कोई संविधान विशेषज्ञ बताएगा क्या ऐसे में सांसदों पर वैधानिक कार्यवाही नहीं हो सकती ?

सरकार की इस बात पर तो तारीफ़ करना होगी कि जोर के झटके जोर से दे रही है और सबको अखाड़े में बुरी तरह से पटखनी दे रही है परिणाम चाहे जो भी हो.

बहरहाल इस किराने वाले भाई को और सब्जी वाले को क्या कहूँ मै.?

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