Skip to main content

हिन्दुस्तान का ऐतिहासिक विरोध एक बलात्कार के विरोध में

देश के माननीय राष्ट्रपति महोदय अपने दडबे और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था से बाहर आओ और कहो कि

"मै सरकार को हुक्म देता हूँ कि बलात्कार के लिए कडा क़ानून बनाए और सजा और क़ानून में राजनैतिक हस्तक्षेप बंद होगा."
"सभी प्रदेशों में यह एक साथ लागू होगा और जिस प्रदेश में सरकार की अयोग्यता साबित होगी उस प्रदेश की सरकार तुरंत बर्खास्त कर दिया जाएगा."

और यह शुरुआत मप्र से हो क्योकि यहाँ महिलाओं के खिलाफ अपराध दर सबसे ज्यादा है पिछले बरस सबसे ज्यादा बलात्कार इसी प्रदेश में हुए है.
 
देश के माननीय राष्ट्रपति महोदय अपने दडबे और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था से बाहर आओ और कहो कि

"कि अगर सरकार यह चौबीस घंटे में नहीं करती है तो मै जन भावनाओं का आदर करते हुए देश की सभी विधानसभाओं, संसद और न्यायपालिकाओं को भंग करता हूँ"

देश को अब सरकार नहीं दबंग राष्ट्रपति की दरकार है अब समय आ गया है कि यह रबर स्टाम्प अपने होने को चरितार्थ करे और जो करोडो रूपया इस पद के चुनाव में बर्बाद होता है उसका चुकारा हो और देश की जनता को मालूम पड़े कि देश में सर्वोच्च पद क्या होता है.
 
दुनिया के सबसे बड़े प्रदर्शन में भारतीय युवाओं को सलाम
यह मेरे हिसाब से चीन के थ्येय्मान प्रदर्शन से बड़ा प्रदर्शन है
अब देश की युवा शक्ति को ये निकम्मे नेता और नपुंसक सरकारें बरगला नहीं सकती.
अब नहीं चलेगी दबंगई और टुच्ची नेतागिरी
सम्हलो भाजपा, कांग्रेस, सपा, और बासी बसपा...........
 

क्या राष्ट्रपति भवन हमारा नहीं है अंदर जाने में क्या दिक्कत है,
देश का गृह मंत्री कह रहा है कि युवा शांत रहे
हद है लाठी मारने वाली सरकार और पानी छींटने वाली सरकार नाकारा है.

मूक प्रधानमंत्रीजी  बाहर आओ अब नहीं बोले तो कभी नहीं बोल पाओगे
यही समय है जब अपनी सरकार के पिछले सभी पाप धूल जायेंगे अब तो बोलो नहीं तो कभी सरकार में नहीं आ पाओगे ............

Comments

Popular posts from this blog

हमें सत्य के शिवालो की और ले चलो

आभा निवसरकर "एक गीत ढूंढ रही हूं... किसी के पास हो तो बताएं.. अज्ञान के अंधेरों से हमें ज्ञान के उजालों की ओर ले चलो... असत्य की दीवारों से हमें सत्य के शिवालों की ओर ले चलो.....हम की मर्यादा न तोड़े एक सीमा में रहें ना करें अन्याय औरों पर न औरों का सहें नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." मैंने भी ये गीत चित्रकूट विवि से बी एड करते समय मेरी सहपाठिन जो छिंदवाडा से थी के मुह से सुना था मुझे सिर्फ यही पंक्तिया याद है " नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." बस बहुत सालो से खोज जारी है वो सहपाठिन शिशु मंदिर में पढाती थी शायद किसी दीदी या अचार जी को याद हो........? अगर मिले तो यहाँ जरूर पोस्ट करना अदभुत स्वर थे और शब्द तो बहुत ही सुन्दर थे..... "सब दुखो के जहर का एक ही इलाज है या तो ये अज्ञानता अपनी या तो ये अभिमान है....नफरतो के जहर से प्रेम के प्यालो की और ले चलो........"ये भी याद आया कमाल है मेरी हार्ड डिस्क बही भी काम कर रही है ........आज सन १९९१-९२ की बातें याद आ गयी बरबस और सतना की यादें और मेरी एक कहानी "सत...

Rest in Peace Dr BK Pasi, You will be Remembered Always

नमन डा बी के पासी सन 1991-92 का साल था , एम ए अंग्रेज़ी में करने के बाद कुछ और पढ़ा जाए इस बात की इच्छा थी लिहाजा सोचा कि पीएच डी करने में तो समय लगेगा क्यों ना एम फिल कर लिया जाए, इंदौर के देवी अहिल्या विवि में थोड़ा परिचय था, स्याग भाई ( डा रामनारायण स्याग ) ने ताजा ताजा शोध पूरा किया था और शिक्षा विभाग में अक्सर आना जाना होता था, देवास की मीना बुद्धिसागर उन दिनों वहा शोध के लिए पंजीकृत हुई ही थी, डा उमेश वशिष्ठ, डा सुशील त्यागी, डा छाया गोयल और डा देवराज गोयल से परिचय था ही, सो सोचा कि क्यों ना यहाँ कुछ पढाई की संभावनाएं टटोली जाएँ. सीधा जाकर डा बी के पासी से मिला तो उन्होंने अपने चिर परिचित अंदाज में कहा क्या करेगा अब पढ़कर और इतना अच्छा काम कर रहा है तो अब क्या करना है फिर मैंने जिद की तो उन्होंने कहा कि थोड़ा ठहर जा मै एक नया पाठ्यक्रम शुरू कर रहा हूँ भविष्य अध्ययन मान्यता के लिए प्रकरण यु जी सी गया है आते ही सूचना करूंगा. बात आई गयी हो गयी, एक दिन बैतूल में गया हुआ था एक शिक्षक प्रशिक्षण में था तो डा पासी का फोन घर पहुंचा और कहा कि तुरंत मिलने को बुलाया है. मै आते ही ...

आशिक की है बारात - जरा झूमके निकले. 27 April 2017

भौंडी आवाज में गरीब बैंड वालों को गवाने वालों, ढोल और ताशों से दूसरों का चैन छिनने वालों, सड़कों पर घटिया नाच कर ट्रैफिक जाम करने वालों - जाओ तुम्हे श्राप देता हूँ कि तुम्हारे वैवाहिक जीवन मे इससे ज्यादा कलह और शोर हो, तुम्हारी जीवन गाड़ी हमेंशा किसी ट्रैफिक में दबकर सिसकती रहें और तुम अपनी घरवाली के ढोल ताशों पर ताउम्र नाचते रहो और कोई एक चवन्नी भी ना लुटाएं, तुम्हारे जीवन मे बिजली ना आये और ऐसा अंधेरा छा जाएं कि तुम एक जुगनू के लिए तरस जाओ। शादी कर रहे हो तो क्या किसी के बाप  पर एहसान कर रहे हो - साला रात रात भर पुट्ठे हिलाकर नाचते हो और दूसरों की नींद हराम करते हो, बारात में घण्टों सड़कों पर मटकते रहते हो, तुम्हारी शादी क्या इतिहास में पहली बार हो रही ? साला अपना जीवन तो नर्क बनाओगे ही शादी के बाद - उसके मातम में हम सबको क्यों लपेटे में लेते हो ? और प्रशासन , पुलिस खींसे निपोरकर नाचते लौंडों और पसीने में नहाती औरतों को घूरकर मजे से देखती रहती है कि कही कुछ दिख जाए, सड़क पर और छतों पर खड़े लोग काल भैरव को मन्नत करते है कि कुछ सामान दिख जाए तो दिन बन जाएं - इन सब बारातियों...