Friday, December 14, 2012

एक बार फ़िर फराज़...............

 
 
फ़क़त अहसास के अंदाज़ बदल जाते हैं "फ़राज़"
वरना आँचल भी उसी धागे से बनता है और कफ़न भी.
 
दिल कि दुनिया कुछ इस तरह से उजड़ी "फ़राज़"
उसने दर्द का आदी बना के दर्द देना छोड़ दिया...
 
 

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