Wednesday, December 5, 2012

तुम्हारे लिए.............सुन रहे हो..............कहाँ हो तुम............

सच तो यह है कुसूर अपना है
चाँद को छूने की तमन्ना की
आसमा को जमीन पर माँगा
फूल चाहा कि पत्थरों पे खिले
काँटों में की तलाश खुशबू की
आग से माँगते रहे ठंडक
ख्वाब जो देखा
चाहा सच हो जाये

इसकी सजा तो मिलनी ही थी.

- जावेद अख्तर


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