Tuesday, February 28, 2012

लों फागुन आ गया है................................

हवा में चुभन है, धूल से आसमान सरोबार है, पानी का ठंडापन अब ठंडा नहीं लगता, एक मदहोशी पुरे समां में छाई सी है, टेसू के फूल महक रहे है, चटख लाल रंग की लालिमा चहुंओर दिख रही है, जंगल में पक्षी बौराये से उड़ते है और दोपहरी में सडके वीरान होना शुरू हो गयी है, रात भी लंबी हो चली है और शफक एकदम सूर्ख बस आम के पेड़ भी बोरो से लदे हुए है और झुक झुक कर हवा के हिलोरों से झुलने लगे है सखीयाँ बेचैन है अपने पीया से मिलने को.................मन झूमने को बेताब है और लगता है कि लों फागुन आ गया है................................

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