देवास में अग्रज कवि एकांत श्रीवास्तव का एकल कविता पाठ
आत्महत्या को ह्त्या की तरह देखा जाना चाहिए
एकांत श्रीवास्तव का देवास में एकल कविता पाठ
संदीप नाईक की एक रपट
http://bimleshtripathi.blogspot.in/2012/02/blog-post.html
जिंदगी की दौड़ में इतने लोग मिलते है कि सबके बारे में हम कभी याद नहीं रख पाते,बस यही सोचकर क्यों ना सिलसिलेवार सब बातों को लिखता रहूँ ताकि सब इसमे दर्ज हो जाए उनके बारे में जो कभी जीवन में आये टकराए और बगैर आवाज किये चुपचाप लौट गए-कब कहा नहीं पता पर उनकी बेचैनी साँसों का स्पंदन अभी तक गूंजता है मेरे भीतर लगता है कि सब कह रहे हो रास्ता किधर है शब्द उतर आते है कागज़ पर, एकाकार हो जाता हूँ उन भावनाओं और उन कोमल तंतुओं के साथ जो इंसान होने को परिभाषित करता है
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