Tuesday, April 16, 2013


कहाँ हो विहंग..............लौट आओ विहंग के बिना ताल, आसमान, धरती और सब सुना है........ लौट आओ जल्दी, हम इंतज़ार कर् रहे है............प्रवासी पक्षी इतने दिनों के लिए थोड़े ही जाते है अंदर बाहर....बेचैन है हम सब...........यहाँ और वह असख्यंक सुबहों का सूरज भी इंतज़ार कर रहा है ..तुम्हारा विहंग, प्रवास खत्म करो और लौट आओ...........लौट आओ, लौट आओ.........

(विहंग-पक्षी)

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