Monday, April 15, 2013

रांगोली का विश्व रिकॉर्ड और राजकुमार चन्दन...... हमारा देवास एक बार फ़िर विश्व के नक़्शे पर

अपने शहर में अपने लोग कितने परिचित होते है. आज शहर में रंगोली बनाने के विश्व रिकॉर्ड कार्यक्रम में गया था, मित्रों का आग्रह था सो चला गया. लोकप्रिय सांसद सज्जन सिंह वर्मा जी के साथ साथ विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष शरद पाचुनकर जी, पूर्व महापौर जय सिंह ठाकुर, भाई मनोज राजानी, प्रेस क्लब के अध्यक्ष अनिल सिकरवार जी, सचिव मोदी जी और ढेरों दोस्त जिन्हें मिले हुए अरसा बीत गया था. दिलीप सिरवाल, ड़ा सुरेश शर्मा, भाई अजय सोलंकी, आदिल पठान, विजय श्रीवास्तव जी, अभिषेक, नवीन नाहर, चेतन उपाध्याय, मिर्जा बेग, सुदेश सांगते, और सबसे महत्वपूर्ण राजकुमार चन्दन जिन्होंने तमाम मेहनत करके देवास के तालाब जिसे हम अब मंडूक पुष्पक के नाम से जानते है पर विश्व की सबसे बड़ी रंगोली बनाई है और आज अपने खाते में पांचवा विश्व रिकॉर्ड जोड़ा है. 
राजकुमार चन्दन की टीम के युवा साथी जिन्होने भरी गर्मी में तेरह घंटे का समय होने के बाद भी मात्र पांच घंटे तीस मिनिट में यह विश्व रिकॉर्ड बना दिया. मान गये उस्ताद..........देवास में अफजल साहब से शुरू हुई रंगोली की परम्परा मनोज पवार और राजकुमार चन्दन जैसे साथियों के होते हुए दुनिया में नाम कर रही है इस बात की सराहना की जाना चाहिए. जय भाई साहब, मनोज भाई, शरद जी ने और अंत में सज्जन भैया (देवास के तो वे भैया ही है) ने कहा कि कुछ करो आओ बात करते है, बैठते है, और कुछ मिलकर ठोस करते है.... सिर्फ इस तालाब के लिए नहीं, बल्कि पुरे शहर के लिए जो भी ठीक हो बताओ. दलगत राजनीती छोड़कर इस तरह की सार्थक पहल करने वाला यह छोटा सा कस्बा जो अब बड़ा हो गया है, देश में अपनी तरह का पहला जिला होगा. बहरहाल, काम बहुत है करने को बस लगन और प्रतिबद्धता चाहिए..........आज अपने लोगों में, अपने दोस्तों के बीच एक सार्थक काम के लिए जुडना अच्छा लगा.


2 comments:

Akhi said...

बहोत अच्छा लगा संदीप भैया देवास की इस प्रतिभा को देखकर .............. इसका और भी प्रचार प्रसार होना चाहिए ..... बहोत बड़े रूप में मार आप सभी को अभिनन्दन और वंदन है की देवास की पवन नगरी को आपने इस ऊंचाई पर पहुँचाने की कोशिश की ......

Akhi said...

आज देवास की इस प्रतिभा को देखकर मन प्रफुल्लित हो गया ....अविश्वश्नीय कार्य था , इसके लिए संदीप भैया आप सभी लोगो का अभिनन्दन एवं वंदन .... इस कला को आगे ले जाने की बहोत जरूरत है ....देवास का ये बदला हुआ स्वरुप देखकर बहोत अच्छा लगा ...