Wednesday, July 22, 2015

Posts of 20 -22 July 15

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सन 1965 में अमेरिका ने भारत को सड़े हुए लाल गेहूं देना शुरू किये तो लाल बहादुर शास्त्री ने ललकार कहा था कि नहीं चाहिए हमें सड़े हुए लाल गेहूं , मेरे देश के लोग एक समय खाना नहीं खायेंगे तो मै इतना अन्न बचा लूंगा कि देश के सभी लोगों को पर्याप्त भोजन दे सकूं. और उन्होंने अपील की तो लोगों से शास्त्री सोमवार चालू किया मेरे घर में मेरे पिता, दादा, दादी, चाचा और तमाम लोग ये शास्त्री सोमवार किया करते थे, बहुत लोगों को याद होगा कि कई गरीब लोगों ने भी ये शास्त्री सोमवार करना आरम्भ किये थे और इस तरह से हमने देश को अकाल और भूख से बचाया और सबको समान और भ्रातृत्व भाव से खाना उपलब्ध करवाया- क्योकि अपील करने वाले लाल बहादुर शास्त्री जैसे आदर्श राजनेता थे और टाटा बिड़ला और तमाम बड़े लोग उनके मातहत थे, उन्हें सम्मान देते थे, प्रधानमंत्री की पीठ पर हाथ रखने की हिम्मत इन उद्योगपतियों की कभी नहीं हुई.

सबसीडी का मामला बहुत विवादास्पद रहा है, सरकारों के लिए यह एक मुश्किल रही है क्योकि देश का एक बड़ा हिस्सा गरीबी में जीता भी है और संघर्ष भी करता है परन्तु ठीक इसके विपरीत एक बड़ा हिस्सा गरीबी से परे जाकर एयाशियों में रहता है और फिर भी सबसीडी  का फ़ायदा लेना चाहता है. बीपीएल के कार्ड एक सशक्त उदाहरण है जहां असली गरीब इन कार्डों से दूर है और जिनके घरों में ट्रेक्टर है वे बीपीएल कार्ड का जुगाड़ करके फ़ायदा उठा रहे है. निसंदेह अमीर या माध्यम वर्गीय लोगों को सबसीडी का फ़ायदा नहीं लेना चाहिए या कम से कम वे लोग जिनके घरों में कोई सदस्य सरकारी सेवा में हो या दो से ज्यादा सदस्य सेवा में हो उन्हें स्वतः आगे आकर सबसीडी त्याग देना चाहिए परन्तु इस समय हमारे देश में दुर्भाग्य से ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं है कि हमें इसके बारे में ठीक ठीक जानकारी हो, आधार कार्ड नामक व्यवस्था से कुछ जानकारी के नियमतिकरण की प्रक्रिया शुरू की थी, अस्सी करोड़ लोगों के बारे एकत्रित की गयी जानकारी का सरकार क्या कर रही है इसके बारे में अभी कोई ठोस जानकारी उपलब्ध नहीं है, बल्कि इन्ही आधार कार्डों को हथियार बनाकर सबसीडी का खेल जारी है.


सबसीडी के माध्यम से देश इस समय उन तमाम आर्थिक प्रयासों पर सवाल कर रहा है जो आर्थिक उदारीकरण और भूमंडलीकरण के नाम पर पूर्व प्रधानमंत्री या कांग्रेस सरकार ने आरम्भ किये थे. सबसीडी इस समय विश्व का भी एक बड़ा मामला है हाल ही में हमने दुनिया के कई देशों में आई एम एफ या विश्व व्यापार संगठन के दबावों को झेलते और संघर्ष करते देखा है, व्यापक स्तर पर जन समुदायों से राय माँगी गयी और सरकारें फेल हुई है. आखिर एक समय के बाद तो हमें यह तय करना ही पडेगा कि इस सबसीडी नामक भूत से कैसे निपटे, बहरहाल भारत जैसे बड़े देश में आज एक प्रधानमंत्री गैस की सबसीडी छोड़ने की बात करता है तो देश भर से विरोध की आवाजें आती है, शर्मनाक है कि जिस प्रधानमंत्री को जनता ने लाड़ प्यार से चुना और बहुमत दिया आज उसकी हर बात का मजाक उड़ाया जाता है और सबसीडी की बात का मखौल उड़ाया जा रहा है हर ओर से पुरजोर विरोध हो रहा है. भावुक विज्ञापनों के जाल में सरकार जनता का विश्वास अर्जित करने की कोशिश कर रही है परन्तु परिपक्व होते जन तंत्र में अब इतना आसान भी नहीं है सब कुछ !!! बताईये कमी किसमे है हममे या प्रधानमंत्री में या सरकार में या दो सौ करोड़ के विज्ञापनों में ?


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जो मोदी जी अपने फेंकू भाषण पेलने के लिए नौ करोड़ का टेंट लगा सकते है और उसमे भी मजदूर की जान जाती है। जो अरबों रूपये लगाकर विदेश घूम रहे है , जिनकी पार्टी के शिवराज ,रमन सिंह और वसुंधरा और सुषमा तमाम तरह के लेन देन में फंसे हो उन्हें देश के उन लोगों से सब्सिड़ी की भीख मांगते शर्म नही आती जो हफ्ते में बमुश्किल दो बार सब्जी, दो बार दाल और अपने बच्चों को एक बार भी दूध देने में एड़ी चोटी का जोर लगा रहे है। कितनी बेशर्म सरकार है अम्बानी अडानी को राहत और हमारे दो सौ रुपयों पर नियत खराब !!!

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स्मार्ट सीटी के नाम पर कितना झमेला हो रहा है, जो नरक निगम अपनी मुख्य जिम्मेदारियां नहीं निभा पा रहे है उनसे हम ना जाने क्या क्या उम्मीदें पाल रहे है, एक प्रयोग महिला सुरक्षा को लेकर चल ही रहा है पर मेरा निजी अनुभव बताता है कि जब तक प्रशासनिक लापरवाही, अयोग्य लोग, रुपयों का लेन देन, कार्यकुशलता और चुस्त प्रक्रियाएं नहीं होंगी तब तक ये स्मार्ट सीटी सिर्फ झुनझुना साबित होंगी. मप्र के हालात तो मै कह सकता हूँ यहाँ आधी लड़ाई तो विभाग के सचिव और आयुक्त में होती रहती है और बची खुची कसर नगर निगम के प्रमोटी या आय ए एस अफसर बनाम कमिश्नरों में ख़त्म हो जाती है. दूसरा स्मार्ट सीटी की मूर्खताओं के नाम पर कब तक आप प्रदेश के दीगर शहरों का दोहन करके उन्हें उपेक्षित करते रहेंगे........?
प्रदेश के सारे शाह्रों में भाजपा शासित निकाय है फिर यह बन्दर बाँट क्यों?
स्मार्ट सीटी कुछ नहीं बस नए रैपर में नया रिन और लक्स है विज्ञापन में हेमा मालिनी की जगह सिर्फ सन्नी लियोन आ गयी है ........बाकी जस का तस है......

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एक तीस्ता सीतलवाड़ और प्रिया पिल्लई ने नाक में दम कर दिया, सोच लो ठाकुर अगर देश भर के एनजीओ वाले अपनी वाली पर आ गए और काले कारनामे खोलने लगे आपकी राजनीती के तो तोते उड़ जायेंगे........

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डा मन मोहन इतने तो चुप ना थे, क्या करें उनकी तो एक माताराम थी और यहाँ कई माताराम, पिताराम, आयाराम और गयाराम और साधू सन्यासी और उद्योगपति है, बेचारे खुद पति का धर्म नहीं निभा पा रहे परन्तु ज़माने भर के पतित से सम्बन्ध बनाने को सब झेलना पड़ रहा है...

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कांग्रेस लोकसभा में सदन चलने नहीं दे रही है और भाजपा की फजीहत हो रही है सरे आम थू थू हो रही है रही सही कसर शांता कुमार ने शान्ति का बम फोड़कर पुरी कर दी है. अब बेचारे मोदी जी को भूमि अधिग्रहण बिल पास करवा कर अपने माई बाप को खुश करना है, जी एस टी भी उनकी प्राथमिकता है. मेरी नजर में तो अब एक ही तरीका है कांग्रेस को खुश करने का............शिवराज का इस्तीफा ले लें, दिग्विजय से लेकर सब खुश हो जायेंगे, सदन भी चलने लगेगा, और मप्र की जनता की नाराजी भी दूर हो जायेगी और देश भर में एक खुशी भी फ़ैल जायेगी कि बेचारे भाजपा वाले नैतिकता का आज के समय में भी ध्यान रखते है. मोदी जी अपने वजीरे आलम अमित शाह को बोलो कि मामाजी का बोरिया बिस्तरा बंधवाये, मामा-मामी की श्यामला हिल्स से अब विदाई करवाओ बहुत हो गया कुशासन और भ्रष्टाचार और नए पुजारी की नियुक्ति का बंदोबस्त करें......देखा एक तीर से कितनी चिड़ियाएँ मरेंगी..............शिवराज निपटे, वसुंधरा और रमण सिंह सतर्क, आतंरिक गुटबाजी और कलह पर नियंत्रण, अडानी अम्बानी खुश, देश भर में मोदी जी की गुड गवर्नेंस वाली छबि बरकरार, सुषमा और बाकी सब सुरक्षित, ललित गेट का खात्मा और फिर से विदेशों में घूमने को देश का प्रधानमंत्री छः माह तक के लिए छुट्टा हो जाएगा....

3 comments:

Kavita Rawat said...

पेट बहुत बड़े जो हो गए बस खाने चाहिए। खाने चाहिए। सब हज़म करने वाले बैठे हैं तो फिर छोड़ेंगे कैसे!!

कालीपद "प्रसाद" said...

राम राम जपते जाओ ,पराया माल को अपना समझते जाओ --अच्छी निति है
दो अजनबी !

Madan Mohan Saxena said...

बहुत खूब!