Tuesday, July 7, 2015

ये पेड़ नहीं, आने वाली पीढी को सौंपे जाने वाली विरासत है 7 July 15




ये पेड़ नहीं है - बल्कि एक पीढी को सौंपे जाने वाली धरोहर है. बहुत दिनों से लग रहा था कि मेरे कमरे में कुछ अधूरापन है फिर लगा कि शायद हरियाली सूख रही है, तो एक दिन जाकर कुछ पेड़ ले आया, और एक बरगद मिल गया इसे इस उम्मीद से लगाया है कि इसके नीचे जरुर बहुत कुछ उगाउंगा और फिर शायद कोई कहावत नई रच पाऊं. Alok Jha ये देख लो, शायद हम एक ही नाव में भटके ही सही, सवार तो है......चेत रहे है पेड़, फ़ैल रही है बैलें, और निकल रही है नई शाखें और उग रही है कोंपलें ताकि कुछ और नया सृजित हो सकें. कम से कम कुछ हरी पत्तियाँ, कुछ नई शाखें और कुछ अन्दर ही अन्दर फैलती सी जड़ें 




1 comment:

Kavita Rawat said...


हमारे जीने का सहारा है पेड़ ...
बहुत सुन्दर..