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सदी के महानतम नायक - डा ए पी जे अबुल कलाम को श्रद्धांजलि


8 अगस्त सन 2008 के दरबार हाल, राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली, मे जब वे आये और मैं उठा तो उन्होंने कंधा दबाकर बिठा दिया और बोले "sit down my dear friend, tell how women sarpanches are performing in your state ?" और मैं उनसे लगभग तीन मिनिट बतियाता रहा। आज उनकी मौत की खबर अभी रेल में पढी तो झुरझुरी आ गयी, डा कलाम आप शायद सच में विकसित भारत के लिए नींव के पत्थर थे और आज सारा राष्ट्र और पूरी वैज्ञानिक सोच वाली बिरादरी अपने को अनाथ महसूस कर रही है. आज जबकि आपके जैसे लोगों की देश को जरूरत थी तो आप चले गए, सोचिये मरते दम तक बच्चों , युवाओं में आप अपने भाषणों और प्रेरक उदबोधनों से देश के लिए अपने सपनों को पूरा करने के लिए लगे रहे. मुझे गर्व है कि मैंने आपको देखा है और सदी के महानतम नायक से बात की है. आप हमेशा मेरे दिल में रहेंगे.
सलाम कलाम साहब !!
मेरे जीवन का अनमोल चित्र जो अब धरोहर है.......

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आभा निवसरकर "एक गीत ढूंढ रही हूं... किसी के पास हो तो बताएं.. अज्ञान के अंधेरों से हमें ज्ञान के उजालों की ओर ले चलो... असत्य की दीवारों से हमें सत्य के शिवालों की ओर ले चलो.....हम की मर्यादा न तोड़े एक सीमा में रहें ना करें अन्याय औरों पर न औरों का सहें नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." मैंने भी ये गीत चित्रकूट विवि से बी एड करते समय मेरी सहपाठिन जो छिंदवाडा से थी के मुह से सुना था मुझे सिर्फ यही पंक्तिया याद है " नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." बस बहुत सालो से खोज जारी है वो सहपाठिन शिशु मंदिर में पढाती थी शायद किसी दीदी या अचार जी को याद हो........? अगर मिले तो यहाँ जरूर पोस्ट करना अदभुत स्वर थे और शब्द तो बहुत ही सुन्दर थे..... "सब दुखो के जहर का एक ही इलाज है या तो ये अज्ञानता अपनी या तो ये अभिमान है....नफरतो के जहर से प्रेम के प्यालो की और ले चलो........"ये भी याद आया कमाल है मेरी हार्ड डिस्क बही भी काम कर रही है ........आज सन १९९१-९२ की बातें याद आ गयी बरबस और सतना की यादें और मेरी एक कहानी "सत...

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