Wednesday, July 22, 2015

धार के गरीब आदिवासी आपकी राह तक रहे है डा आनंद राय



खबर है कि डा आनंद राय जो डाक्टर कम विह्सिल ब्लोअर के नाम पर ज्यादा जाने जाते है, का राज्य शासन ने पिछले हफ्ते अटैचमेंट ख़त्म कर इंदौर के क्षेत्रीय स्वास्थ्य प्रशिक्षण संस्थान से उनके मूल विभाग जिला अस्पताल, धार कर दिया है, और उन्हें प्राचार्य, क्षेत्रीय स्वास्थ्य प्रशिक्षण संस्थान ने कार्य मुक्त भी कर दिया है. अब डा आननद राय अखबारों की दो सौ से ज्यादा कटिंग काटकर हाई कोर्ट में जाने की तैयारी कर रहे है कि उन्हें इंदौर में रहने दिया जाए क्योकि इंदौर के ही किसी और अस्पताल में दस-बारह स्वास्थ्यकर्मी अटैचमेंट पर काम कर रहे है. ये डा राय अच्छे से जानते है कि अटैचमेंट ही था, उनका पोस्टिंग स्थाई नहीं हुआ था, और वैसे भी एक अच्छे डाक्टर को इंदौर के मरियल और बाबू राज से ग्रस्त क्षेत्रीय प्रशिक्षण संस्थान, जहां काम के नाम पर कुछ नहीं होता है, और घटिया राजनीति, बाबूओं में आपस में मारा पीटी और गाली गलौज अक्सर होता रहता है, के बजाय अस्पताल में होना चाहिए. नैतिकता और समय का तकाजा तो यह है कि वे जिला अस्पताल, धार में जाए और अपना काम पुनः आरम्भ करें ना कि अब व्ह्सिल बजाये क्योकि अब तो नगाड़े बज चुके है, सरकार खतरे में है, देश की चुनी हुई सरकार लोकसभा में सदन नहीं चला पा रही जबकि उसके पास बहुमत है. गगन को चूमती और दुनिया को बताती रणभेदी तोपें चल रही है और सारे कंस, शकुनी, अभिमन्यु, कौरव, पांडव द्रोणाचार्य और श्रीकृष्ण भी मैदान में है, सूर्यास्त होने को है, और शीघ्र ही परिणाम सामने आयेंगे, सीबीआई ने कई एफआईआर करके कम से कम व्यवस्था में भरोसा तो दिलवाया है. मुझे लगता है कि डा आननद राय को अब राजनीति छोड़कर अपनी कर्म स्थली पर जाना चाहिए और एक चिकित्सक का काम करना चाहिए, डा आनंद राय, आपकी प्रतिष्ठा और उपलब्धि अब इसी में है कि आप इंदौर और मीडिया का मोह छोड़कर काम करें.
मै यहाँ बताना उल्लेखनीय समझता हूँ कि श्रीश पांडे, जो सतना में रहते है, अपेक्षाकृत छोटे अखबार में काम करते है, और जिन्होंने इस पुरे घोटाले का पर्दाफ़ाश किया था पहली बार, आज इस मामले से बिलकुल दूर है. श्रीश जी कहते है कि सन 2013 में पहली बार उनके पास यह मामला आया था और उन्होंने इसे उठाया था मीडिया में, “आज यह एक विश्वव्यापी मुद्दा बन चुका है तो मेरा काम ख़त्म हो गया, अब मैदान में लड़ने को कई लोग है - तंत्र, व्यवस्था, पुलिस, न्यायपालिका, मीडिया और व्यक्तिगत रूप से कई लोग, बस मेरा काम हो गया अब मुझे अगले किसी मुद्दे पर जनता की लड़ाई लड़ना है सारी उम्र मै इसी पर काम नहीं करना चाहता”. श्रीश पांडे चाहते तो वे खुद सारा श्रेय लेकर भोपाल के किसी बड़े मीडिया हाउस में जम सकते थे, दिल्ली के बड़े चैनल में रोज लाईव कार्यक्रमों में ज्ञान बाँट सकते थे, परन्तु वे अब व्यापम मामले से दूर है और बेहद सादगी से सतना में दीगर और जन मुद्दों पर मीडिया में रहकर ही लगातार काम कर रहे है.
तो डा आनंद राय साहब आपके मरीजों को आपकी जरुरत है, जाईये, अस्पताल जाईये, धार जाईये जो आदिवासी बहुल जिला है और वहाँ वैसे ही डाक्टर नहीं है, बजाय हाई कोर्ट में लड़ने और अखबारों की कटिंग को काटकर सजाकर अपना केस पुख्ता बनाने की लड़ाई में अपनी ऊर्जा ख़त्म करने के लोगों के लिए गरीब आदिवासी लोगों के लिए काम करिए, वहाँ आपकी ज्यादा जरुरत है और फिर इंदौर धार है ही कितना दूर मात्र साठ किलोमीटर ! बंद कीजिये, अब व्हिसिल बजाना सब जाग गए है आपको तो अमर होना था, हो गए और अब कोई विधायकी लड़ना हो तो बात अलग है, क्योकि आपके घुटने भी तो पेट की तरफ ही मुड़े हुए है.........


संदीप नाईक. 

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