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Post of 8 June 15



इंतज़ार है अब रजत शर्मा, शंकराचार्यों, राम मंदिर अयोध्या के पुजारी और तमाम ऐसे लोगों को Z+ सुरक्षा देने का ताकि हम भारत के लोग ज्यादा मेहनत करें , रुपया कमाएं, टैक्स भरें, और हमारे जवान कड़ी मेहनत करें और रामदेव और मोहन भागवतों टाइप लोगों की सुरक्षा करें. सुरक्षा यानी देश की सुरक्षा की चिंता किसी को नही देश के भीतर जवान मरते रहें , सीमा पर मरते रहें।

क्या हो गया है मोदी जी को, ये सुषमा, मुरली जोशी, आडवाणी, गडकरी, जेटली, गोविदाचार्य, उमा, और जावड़ेकर या खुद राम माधव और मोहन भागवत जी चुप क्यों है ? क्या मोदी जी यानी हिंदुत्व और भाजपा के अकेले पर्याय हो गए है ? कांग्रेस के साठ साल तो बहुत गिनाये भक्तों ने अब सारे बुद्धिजीवी चुप क्यों है?

एक लोकतांत्रिक देश में एक तानाशाह का इस तरह से फैसले लेना उसी की पार्टी के लोगों का चूं भी ना बोलना बेहद घातक ही नही खतरनाक भी है।

और सबसे ज्यादा दुःख न्यायपालिका को लेकर हो रहा है जो राज दरबार में मुजरा कर अपने आकाओं को खुश करने में व्यस्त है. क्या है मोहन भागवत या रामदेव की सांविधानिक हैसियत जो ये जनता के रूपये से अपनी सुरक्षा ले रहे है। इसी को नाजीवाद या फांसीवाद कहते है ? शर्म आती है कि सुप्रीम कोर्ट स्वतः संज्ञान ना लेकर ऐसे फैसलों का साक्षी बन रहा है। बन्द कर दो सारे ढकोसले और व्यवस्थाएं । धिक्कार है ऐसे देश पर जहां बच्चे भूख से मर रहे हो, एक भृष्टतम् मुख्यमंत्री जैन साधू के वश में है और देश की मुद्रा का उपयोग मानसून ना होने के अंदेशा होने के बावजूद यहां खर्च की जा रही है।

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