Skip to main content

Posts of 17 Aug 15



अम्बानी  और अडानी के लिए तेल लेने के लिए क्या क्या करना पड़ रहा है, इधर सारा देश राम राम, काश्मीर, 370 धारा हटाओ, आतंकवाद, पाकिस्तान मुर्दाबाद , हजार सर लेकर आओ, ललित गेट, संघ और भाजपा कर रहा है और उधर वे शेख, मुल्लों और मस्जिदों में अल्लाह खोज रहे है.

34 साल  बाद किसी मुखिया को अपने आकाओं के लिए तेल - तेल करते हुए मस्जिदों में मत्था टिकाते हुए मजबूरी वश देखा, ऐसी भक्ति को प्रणाम और ऐसे वफादारों को भी दिल से सलाम, दोस्ती हो तो ऐसी. बढ़िया है लगे रहो..........बस अब नागपुर में जाकर सफाई देनी होगी एक बार आने के बाद. 

वैसे  मजाक के अलावा यह कदम मोदी जी की अपने आसपास के देशों में प्रतिष्ठा बढ़ाएगा, मै उनके इस कदम की सराहना करता हूँ. यह समय की मांग है और अब समय आ गया है कि जाति समुदाय के दंश से निकलकर नेता देश और भले की सोचे. मोदी जी सच में यह जाति धर्म समुदाय का चश्मा उतार फेंके और अपने तई निर्णय लें, छोड़े संघ को और कूप मंडूक रैली निकालने वाले भगवा धारियों को, फिर देखें कि कैसे हम सब लोग उन्हें दिल से समर्थन देते है और मदद करते है. अच्छे दिन सच में ऐसे ही आयेंगे यह समझना जरुरी है मीडिया, मोदी और मीडियाकरों को भी. आज देश के सामने क्रुड आयल की ज्यादा जरुरत है बनिस्बत राम मंदिर के, देश के कुपोषण और दीगर मुद्दों को संबोधित करने के लिए हमें विदेशी मुद्रा चाहिए ना कि जेब की गाँठ का रुपया मंदिर मस्जिदों में खर्च किया जाए.

एकदम  सही किया जो शेख की जमीन में घुसे और अब इंतज़ार है किसी बड़े निर्णय का बॉस........तभी तो आजादी के दूसरे दिन जाने का फैसला एक इतिहास बनेगा.

Comments

Popular posts from this blog

हमें सत्य के शिवालो की और ले चलो

आभा निवसरकर "एक गीत ढूंढ रही हूं... किसी के पास हो तो बताएं.. अज्ञान के अंधेरों से हमें ज्ञान के उजालों की ओर ले चलो... असत्य की दीवारों से हमें सत्य के शिवालों की ओर ले चलो.....हम की मर्यादा न तोड़े एक सीमा में रहें ना करें अन्याय औरों पर न औरों का सहें नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." मैंने भी ये गीत चित्रकूट विवि से बी एड करते समय मेरी सहपाठिन जो छिंदवाडा से थी के मुह से सुना था मुझे सिर्फ यही पंक्तिया याद है " नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." बस बहुत सालो से खोज जारी है वो सहपाठिन शिशु मंदिर में पढाती थी शायद किसी दीदी या अचार जी को याद हो........? अगर मिले तो यहाँ जरूर पोस्ट करना अदभुत स्वर थे और शब्द तो बहुत ही सुन्दर थे..... "सब दुखो के जहर का एक ही इलाज है या तो ये अज्ञानता अपनी या तो ये अभिमान है....नफरतो के जहर से प्रेम के प्यालो की और ले चलो........"ये भी याद आया कमाल है मेरी हार्ड डिस्क बही भी काम कर रही है ........आज सन १९९१-९२ की बातें याद आ गयी बरबस और सतना की यादें और मेरी एक कहानी "सत...

Rest in Peace Dr BK Pasi, You will be Remembered Always

नमन डा बी के पासी सन 1991-92 का साल था , एम ए अंग्रेज़ी में करने के बाद कुछ और पढ़ा जाए इस बात की इच्छा थी लिहाजा सोचा कि पीएच डी करने में तो समय लगेगा क्यों ना एम फिल कर लिया जाए, इंदौर के देवी अहिल्या विवि में थोड़ा परिचय था, स्याग भाई ( डा रामनारायण स्याग ) ने ताजा ताजा शोध पूरा किया था और शिक्षा विभाग में अक्सर आना जाना होता था, देवास की मीना बुद्धिसागर उन दिनों वहा शोध के लिए पंजीकृत हुई ही थी, डा उमेश वशिष्ठ, डा सुशील त्यागी, डा छाया गोयल और डा देवराज गोयल से परिचय था ही, सो सोचा कि क्यों ना यहाँ कुछ पढाई की संभावनाएं टटोली जाएँ. सीधा जाकर डा बी के पासी से मिला तो उन्होंने अपने चिर परिचित अंदाज में कहा क्या करेगा अब पढ़कर और इतना अच्छा काम कर रहा है तो अब क्या करना है फिर मैंने जिद की तो उन्होंने कहा कि थोड़ा ठहर जा मै एक नया पाठ्यक्रम शुरू कर रहा हूँ भविष्य अध्ययन मान्यता के लिए प्रकरण यु जी सी गया है आते ही सूचना करूंगा. बात आई गयी हो गयी, एक दिन बैतूल में गया हुआ था एक शिक्षक प्रशिक्षण में था तो डा पासी का फोन घर पहुंचा और कहा कि तुरंत मिलने को बुलाया है. मै आते ही ...

आशिक की है बारात - जरा झूमके निकले. 27 April 2017

भौंडी आवाज में गरीब बैंड वालों को गवाने वालों, ढोल और ताशों से दूसरों का चैन छिनने वालों, सड़कों पर घटिया नाच कर ट्रैफिक जाम करने वालों - जाओ तुम्हे श्राप देता हूँ कि तुम्हारे वैवाहिक जीवन मे इससे ज्यादा कलह और शोर हो, तुम्हारी जीवन गाड़ी हमेंशा किसी ट्रैफिक में दबकर सिसकती रहें और तुम अपनी घरवाली के ढोल ताशों पर ताउम्र नाचते रहो और कोई एक चवन्नी भी ना लुटाएं, तुम्हारे जीवन मे बिजली ना आये और ऐसा अंधेरा छा जाएं कि तुम एक जुगनू के लिए तरस जाओ। शादी कर रहे हो तो क्या किसी के बाप  पर एहसान कर रहे हो - साला रात रात भर पुट्ठे हिलाकर नाचते हो और दूसरों की नींद हराम करते हो, बारात में घण्टों सड़कों पर मटकते रहते हो, तुम्हारी शादी क्या इतिहास में पहली बार हो रही ? साला अपना जीवन तो नर्क बनाओगे ही शादी के बाद - उसके मातम में हम सबको क्यों लपेटे में लेते हो ? और प्रशासन , पुलिस खींसे निपोरकर नाचते लौंडों और पसीने में नहाती औरतों को घूरकर मजे से देखती रहती है कि कही कुछ दिख जाए, सड़क पर और छतों पर खड़े लोग काल भैरव को मन्नत करते है कि कुछ सामान दिख जाए तो दिन बन जाएं - इन सब बारातियों...