Tuesday, August 11, 2015

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मेरे भाई की मृत्यु को अगले माह 27 तारीख को एक साल पूरा हो जाएगा, मप्र के भ्रष्ट और घोर निकम्मे प्रशासन में पेंशन और आदि देयक लगभग आठ माह बाद मिलें और अब मामला अनुकम्पा नियुक्ति के लिए अटका पडा है. मैंने बड़े श्रम से और ढेर कार्यवाही करके शासन से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेकर सामान्य प्रशासन विभाग के नियमों के तहत पूरा प्रकरण जिला कलेक्टर देवास को जून माह में भिजवाया ताकि जिले में रिक्त किसी भी विभाग में सहायक ग्रेड के पद पर नियुक्ति हो सके प्रकरण कलेक्टर कार्यलय के बाबू राज में जिला कलेक्टर की भी बाबू सुनते नहीं है, और उन्हें भी घूमात्ते रहते है.

इस अनुकम्पा नियुक्ति के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र लेने के लिए माननीय राष्ट्रपति कार्यालय, राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने तीन तीन बार मप्र शासन के मुख्य सचिव को लिखा था, लगता है अब संयुक्त राष्ट्र मंडल में जाना पडेगा क्योकि इस देश के प्रशासन पर से विश्वास उठ गया है.

बार बार मेरे भाई की विधवा पत्नी कलेक्टर से मिलती है और वे बाबू को बुलाकर हडका देते है है परन्तु बाबू टस से मस नहीं होता. कारण यह है कि स्थानीय प्रशासन में बरसों से जमे इन बाबूओं की शक्ति इतनी बढ़ गयी है कि ये शासन के नियमों की लगातार अनदेखी करते है. आज जन सुनवाई में जब पुनः गए तो कलेक्टर महोदय कहने लगे "यह कलेक्टर का वर्ड है कि नियुक्ति हो जायेगी पर कब नहीं कह सकाता, और आप लोग बार बार चतुराई दिखाईये मत और परेशान मत करिए जब कार्यवाही करना होगी तब कर देंगे और अब आने की जरुरत नहीं है". असंवेदनशीलता की हद होती है अपने अधिकार और नियुक्ति के लिए मिलना अगर चतुराई है तो फिर सही तरीका क्या है कलेक्टर साहब? भड़कने से और अभद्र व्यवहार करने से कुछ नहीं होगा, महिलाओं के साथ बातचीत करने का तरीका नहीं मालूम.........आज बाबू ने आपको फिर घूमा दिया !!!!
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काश, जिला कलेक्टर मृत शासकीय कर्मचारी के परिवार का दर्द महसूस कर सकते तो शायद अपने अधिकार का उपयोग करके और इन बाबूओं पर कड़ा नियंत्रण करके मेरे जैसे कई प्रकरण निपटा सकते थे, ऊपर से हमसे कहा गया कि जन सुनवाई में आप यह शिकायत क्यों कर रहे है, आप सिर्फ मौखिक बातचीत करिए ....यानी कोई लिखित सबुत नहीं लेना चाहते, ना देना चाहते है जबकि सामान्य प्रशासन विभाग के नियमों के अनुसार पूरा प्रकरण मिलने पर कलेक्टर एक माह में नियुक्ति की प्रक्रिया सम्पूर्ण कर आवेदक को नियुक्ति देंगे परन्तु नियमों का इस देश में और प्रदेश में पालन होता कहाँ है? जब तक भ्रष्ट और निकम्मे बाबू मौजूद है तब तक कोई कुछ नहीं कर सकता. अपने अधिकारों के लिए दया दिखाने वाले ये प्रशासनिक ढांचा सिर्फ सफ़ेद हाथी साबित हुआ है हिन्दुस्तान में यह किसी से छुपा नहीं है. स्थापना के बाबू क्या होते है यह किसी से छुपा नहीं है खासकरके देवास में.


शर्मनाक है और प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रशासनिक मुस्तैदी की और कसावट की बात करते है.

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