Sunday, May 12, 2013

सैयद सिब्ते अली सबा

                                                         सैयद सिब्ते अली सबा

सिब्ते-अली ’सबा’ रावलपिण्डी के क़रीब एक फ़ैक्टरी में मामूली मुलाज़िम थे और वहीं 41 साल की उम्र में उनकी वफ़ात (मृत्यु) हुई। सिब्ते अली सबा की किताब ’तश्ते-मुराद’ (1986) उनके मृत्यु के बाद छपी ।

ये कह के उसने शज़र को तने से काट दिया
कि इस दरख़्त में कुछ टहनियाँ पुरानी है

हम इसलिए भी नए हमसफ़र तलाश करें
हमारे हाथ में बैसाखियाँ पुरानी है

अजीब सोच है इस शहर के मकीनों का
मकाँ नए है मगर खिड़कियाँ पुरानी है

पलट के गावँ में, मैं इसलिए नहीं आया
मिरे बदन पे अभी धज्जियाँ पुरानी है
 

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