Skip to main content

जंगल प्रांत मे बिल्लियाँ

I
जंगल के सोलह प्रांतरों मे नयी व्यवस्था बनाई गई थी सिर्फ दो बिल्लियाँ थी जो यह तय कर रही थी कि किन चूहों और लोमड़ियों को सूबेदार बनाया जाये और इसमे एक बड़ा जो शेर जैसा दिखता होगा उस सियार को सरदार बनाया जाये ...........बस काम शुरू हो गया बाहरी माल था और शिकार भी वही थे पुराने पापी और पुराने गठिया के रोगी........जंगल प्रांत मे बिल्लियाँ आपस मे लड़ मरी एक जवाँ बिल्ली ने बूढ़ी बिल्ली से तंग आकर जंगल छोड़ दिया आजकल वो बूढ़ी बरलाई की बिल्ली गरियाती फिरती है और पूरी मलाई खा रही है. जंगल के सोलह प्रांतरों मे हालात कोई सुधरे तो नहीं है पर नए लोगों के आने से स्थानीय कुत्ते, सुअर, खरगोश और मधुमख्खियाँ सतर्क हो गई है कि मलाई साफ़ करने वालों मे बँटवारा लेने वाले बढ़ गये है.........

II

यह एक ऐसी बिल्ली की कहानी है जो एक सीधे सादे तोते को और उसके सलाहकार बगुले को सिर्फ अपने महिला जेंडर होने के नाते घटिया राजनीती करके सत्ता हडपने की है. यह मोटी काली घाघ बिल्ली बहुत शराबी थी और जंगल मे हर जगह से हकाल दी गई थी, बिल्ली ने एक जगह ऐसी देखी जहाँ तीन जानवर बैठकर कुछ ठोस सार्थक काम कर रहे थे, घर परिवार का रोना धोना करके यह घुस बैठी, फ़िर रोज बहाने मारती कि इस बिल्ली का बाप गुम गया या बिल्ली की माँ बीमार या भाई भाग गया किसी छिपकली के साथ. रोज बिल्लों की तलाश मे निकलती शिकार करके लौटती तो आँखों मे शराब के डोरे डले रहते और ये तीनों मूक जानवर टुकुर टुकुर देखा करते. एक दिन बिल्ली की हरकतों से तंग आकर दो जानवर भाग गये क्योकि जंगल मे इस बिल्ली की बड़ी विचित्र खबरें थी. बाद मे बिल्ली ने सिंहासन पर कब्जा कर लिया एक और दूर देश की बिल्ली जो खुद आत्महत्या करने के घाट से लौट आई थी जिंदगी मे, से दोस्ती गाँठ ली. अब ये दोनों बिल्लियाँ उत्पात मचा रही थी जंगल मे, हफ्ता वसूल करके नित नए वाहनों मे घूमना, होटलबाजी करना, दारु पीना और मौज उड़ाना. दूर की बिल्ली तो फ़िर भी ठीक थी पर इस बिल्ली ने एक अघोरी जानवर के साथ एक दिन घर बसा लिया एक दिन और पुरे जंगल मे बात फ़ैल गई तो मुँह छुपाकर बैठ गई घर मे कि अब पंजे का दर्द सहा नहीं जाता......उम्र मे आधा वह चूहा इस बिल्ली को ढो रहा है अब.......जय हो इन ऐयाश बिल्ली प्रजाति की. 

Comments

Popular posts from this blog

हमें सत्य के शिवालो की और ले चलो

आभा निवसरकर "एक गीत ढूंढ रही हूं... किसी के पास हो तो बताएं.. अज्ञान के अंधेरों से हमें ज्ञान के उजालों की ओर ले चलो... असत्य की दीवारों से हमें सत्य के शिवालों की ओर ले चलो.....हम की मर्यादा न तोड़े एक सीमा में रहें ना करें अन्याय औरों पर न औरों का सहें नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." मैंने भी ये गीत चित्रकूट विवि से बी एड करते समय मेरी सहपाठिन जो छिंदवाडा से थी के मुह से सुना था मुझे सिर्फ यही पंक्तिया याद है " नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." बस बहुत सालो से खोज जारी है वो सहपाठिन शिशु मंदिर में पढाती थी शायद किसी दीदी या अचार जी को याद हो........? अगर मिले तो यहाँ जरूर पोस्ट करना अदभुत स्वर थे और शब्द तो बहुत ही सुन्दर थे..... "सब दुखो के जहर का एक ही इलाज है या तो ये अज्ञानता अपनी या तो ये अभिमान है....नफरतो के जहर से प्रेम के प्यालो की और ले चलो........"ये भी याद आया कमाल है मेरी हार्ड डिस्क बही भी काम कर रही है ........आज सन १९९१-९२ की बातें याद आ गयी बरबस और सतना की यादें और मेरी एक कहानी "सत...

Rest in Peace Dr BK Pasi, You will be Remembered Always

नमन डा बी के पासी सन 1991-92 का साल था , एम ए अंग्रेज़ी में करने के बाद कुछ और पढ़ा जाए इस बात की इच्छा थी लिहाजा सोचा कि पीएच डी करने में तो समय लगेगा क्यों ना एम फिल कर लिया जाए, इंदौर के देवी अहिल्या विवि में थोड़ा परिचय था, स्याग भाई ( डा रामनारायण स्याग ) ने ताजा ताजा शोध पूरा किया था और शिक्षा विभाग में अक्सर आना जाना होता था, देवास की मीना बुद्धिसागर उन दिनों वहा शोध के लिए पंजीकृत हुई ही थी, डा उमेश वशिष्ठ, डा सुशील त्यागी, डा छाया गोयल और डा देवराज गोयल से परिचय था ही, सो सोचा कि क्यों ना यहाँ कुछ पढाई की संभावनाएं टटोली जाएँ. सीधा जाकर डा बी के पासी से मिला तो उन्होंने अपने चिर परिचित अंदाज में कहा क्या करेगा अब पढ़कर और इतना अच्छा काम कर रहा है तो अब क्या करना है फिर मैंने जिद की तो उन्होंने कहा कि थोड़ा ठहर जा मै एक नया पाठ्यक्रम शुरू कर रहा हूँ भविष्य अध्ययन मान्यता के लिए प्रकरण यु जी सी गया है आते ही सूचना करूंगा. बात आई गयी हो गयी, एक दिन बैतूल में गया हुआ था एक शिक्षक प्रशिक्षण में था तो डा पासी का फोन घर पहुंचा और कहा कि तुरंत मिलने को बुलाया है. मै आते ही ...

आशिक की है बारात - जरा झूमके निकले. 27 April 2017

भौंडी आवाज में गरीब बैंड वालों को गवाने वालों, ढोल और ताशों से दूसरों का चैन छिनने वालों, सड़कों पर घटिया नाच कर ट्रैफिक जाम करने वालों - जाओ तुम्हे श्राप देता हूँ कि तुम्हारे वैवाहिक जीवन मे इससे ज्यादा कलह और शोर हो, तुम्हारी जीवन गाड़ी हमेंशा किसी ट्रैफिक में दबकर सिसकती रहें और तुम अपनी घरवाली के ढोल ताशों पर ताउम्र नाचते रहो और कोई एक चवन्नी भी ना लुटाएं, तुम्हारे जीवन मे बिजली ना आये और ऐसा अंधेरा छा जाएं कि तुम एक जुगनू के लिए तरस जाओ। शादी कर रहे हो तो क्या किसी के बाप  पर एहसान कर रहे हो - साला रात रात भर पुट्ठे हिलाकर नाचते हो और दूसरों की नींद हराम करते हो, बारात में घण्टों सड़कों पर मटकते रहते हो, तुम्हारी शादी क्या इतिहास में पहली बार हो रही ? साला अपना जीवन तो नर्क बनाओगे ही शादी के बाद - उसके मातम में हम सबको क्यों लपेटे में लेते हो ? और प्रशासन , पुलिस खींसे निपोरकर नाचते लौंडों और पसीने में नहाती औरतों को घूरकर मजे से देखती रहती है कि कही कुछ दिख जाए, सड़क पर और छतों पर खड़े लोग काल भैरव को मन्नत करते है कि कुछ सामान दिख जाए तो दिन बन जाएं - इन सब बारातियों...