Friday, May 17, 2013

बदलना ही होगा वह सब जो सिर्फ और सिर्फ बदलने से ही बदलेगा.........

उसने कहा तो था कि कि वो जंग जीत लेगा - पर धीरे धीरे शाम ढलने लगी, सूरज मद्धम होता गया........कही दूर सडकों पर परछाईयाँ लंबी होती गई और फ़िर वो थक हार कर एक जगह बैठ गया, बहुत सोचा बिचारा, अपने दोस्तों को याद किया, सारे पाप-पुण्यों को याद करता हुआ चुपचाप बैठा रहा और फ़िर उसने अपने चारों ओर एक बार घूम कर देखा, बहुत बारीकी से आने वाली हर आवाज को सुना- महसूसा और फ़िर पाया कि यही समय है एक निर्णय लेने का....अचानक उसे याद आया कि कई कागजात है उसके पास यहाँ-वहाँ और फ़िर त्वरित गति से भागता हुआ अपने दडबे मे गया और खोल दी उसने पोटली और बिखेर दिए वो सब कागज़ जो उसके होने को परिभाषित करते थे और उसकी अस्मिता को इतने सालों से सहेजकर रख रहे थे............बस अब मोह खत्म हो गया था.......हाथों मे एक खाली झोला रखा और चल दिया अपने लक्ष्य की ओर.... और आज उसे किसी की पर्वाह नहीं है, आज उसे किसी का डर नहीं है, आज उसे किसी की नहीं सुननी है, आज उसे किसी माकूल फैसलें पर पहुँचना ही है, ताकि आने वाले समय मे फ़िर कोई इस तरह से हैरान ना हो............ इस तरह से ज़िंदा रहने का कोई मतलब नहीं है कब तक ढोया जाये........बस अब यह खत्म करके एक नई उजास की भोर मे उठना ही होगा, और बदलना ही होगा वह सब जो सिर्फ और सिर्फ बदलने से ही बदलेगा.........

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