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देशप्रेम आखिर किस चिड़िया का नाम है..???

आज सोच रहा था ये देशप्रेम क्या होता है ? अपने पिछले अट्ठाईस बरसों का लेखा जोखा देखा और पाया कि मैंने कही देश प्रेम किया है या नहीं जब से वेतनभोगी हुआ हूँ और फ़िर उन सब लोगों के बारे में बहुत गहराई से सोचा और दो सालों से फेसबुक पर मेरे लिखे और उस लिखे पर आप सबके कमेंट्स के बारे में मंथन किया तों पाया कि मेरे साथ ढेर लोग इस लंबी यात्रा में जुड़े, भावनाओं में बहे, चाहे वो कोई आंदोलन हो, मुद्दा हो, भावुक प्रसंग हो, साहित्य का आयोजन हो या गाँव देहात में काम करने के चरण हो, या एक लंबी चरणबद्ध योजना हो...........तों पाया कि लोग सिर्फ और सिर्फ एक निश्चित समय के लिए जुडते है जों कि स्वाभाविक भी था और होना भी चाहिए पर देश प्रेम जैसा कुछ था नहीं यह सिर्फ एक शख्स से जुड़े होने के कारण और अपने खुद के नाम और कीर्ति की पताकाएं फहराने से ज्यादा कुछ नहीं था. आज बहुत गहराई से मैंने इस बात को सोचा, कई प्रकार की कसौटियों पर परखा- पूर्वाग्रह रखकर और बगैर पूर्वाग्रहों के भी, एक बार इमोशनल भी हुआ और एक बार बेहद तल्ख़ भी पर बहुत निर्दयी होकर  यह लिख रहा हूँ कि सिवाय अपने व्यक्तिगत लाभ,स्वार्थ और कुछ बड़ा पाने के लिए हम सबने एक दूसरे को बेदर्दी से इस्तेमाल किया, इस दौरान कुछ यहाँ से निकल गये, कुछ यही पर मठाधीश हो गये, कुछ ने देशप्रेम के अड्डे बना लिए कुछ भेड़ों की तरह उपयोग में आये और शेष बचे बलि के बकरे/मुर्गे बनकर भारत माँ की वेदी पर चढ गये. यह बहुत ही घातक था और यह उहापोह तब शुरू हुई जब किसी ने मुझसे पूछ लिया कि मै क्या कर रहा हूँ इस सारे संक्रमण काल में और सिवाय दिग्भ्रमित करने के किया क्या है........प्रश्न जायज था और गंभीर भी बस सारा दिन बाकी सब काम छोडकर यही सोचता रहा. कितने साथियों ने अर्थ देकर मदद करने का सोचा, किया भी एक लिजलिजी भावुकता में कि गाँव सुधर जाये, शिक्षा, स्वास्थय की बेहतर व्यवस्थाएं हो सके, कुछ नौजवान पढ़-लिख ले, महिलाए सशक्त हो जाये, दूरदराज के इलाकों के लोग जागरूक हो जाये. मै बहुत आभारी हूँ ऐसे साथियों का जिन्होंने अपने जेब से या दोस्तों, संस्थाओं की जेब उघाड़कर यह सब किया पर मुझे नहीं पता था कि यह सब छोटा कर्म करके उन्होंने बड़ा  "पुण्य" कमा लिया चाहे वो उच्च कोटि की सुविधाएँ हो, पूंजी जुगाडी, वीसा जुगाडा और स्थायी बसने का नेक इराया किया कही अंतरिक्ष में, सामाजिक छबि बनाई, प्रशासन में दखल किया, मीडिया में लंबी छलांग लगाई या किन्ही तथाकथित लोगों से सम्बन्ध/सम्पर्क बनाए.
 

मजेदार यह है कि यह सब देशप्रेम था और इसे सार्वजनिक रूप से बेचना इन सब "भोले" लोगों  को नागवार भी नहीं गुजरा, गरीब गुर्गों के साथ किये इसी देशप्रेम पर कचरा लिखकर, कार्टून बनाकर लाखों के पुरस्कार कबाड़े, देशी-विदेशी फेलोशिप बटोरी और पूछा यह जा रहा है कि देशप्रेम क्या है.........???
 

बहुत अफसोस है कि मुझे आज तक देशप्रेम का फंडा समझ नहीं आया , आज जब कोई पूछ रहा है कि यदि मै फलां बन जाऊ या फलां कर लू तों क्या करूँगा........हाँ, हाँ, हाँ, मुझे कोई समझा दे कि देशप्रेम क्या होता है पानी में खड़े रहना, गरीब बच्चों के लिए किताबे जुगाडना, किसी महिला को अस्पताल पहुंचा देना, एक गाँव में जागरूकता की नौटंकी कर देना, या क्रांतिकारी नारों से दीवारें पाट देना, या खूब कलम घिस- घिसकर कूड़ा परोसना, कार्टून बनाना, विदेश में भ्रमण करना और गरीबी- भूख बेचना, किसी सरकारी क़ानून के सहारे अपने नाम का प्रचार प्रसार करना और अवार्ड जीतना........पता नहीं आप लोग शायद बेहतर मदद कर सकते है मुझे समझाने में कि देशप्रेम आखिर किस चिड़िया का नाम है......यह कोई तनाव या फ्रस्ट्रेशन की बात नहीं, ना जलन या कोई कुंठा, पर मेरी कमजोर समझ को बढाने के लिए लिख रहा हूँ कि देशप्रेम क्या है........

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