Skip to main content

Khari Khari, Board Results and other Posts from 19 to 23 July 2022

प बंगाल, छग, दिल्ली, राजस्थान और केरल जैसे भ्रष्ट राज्यों में सीबीआई, ईडी और पुलिस की कार्यवाहियों का स्वागत है
बस मप्र जैसे राज्य ही बेहद ईमानदार है जहाँ व्यापमं, अवैध खनिज और कुपोषण के मामलों में सबसे ज्यादा प्रक्रियाओं का पालन किया गया और मज़ाल कि एक चवन्नी का घोटाला हुआ हो या किसी की मृत्यु तो क्या सांस लेने में दिक्कत हुई हो, हमारा मीडिया भी लगातार यही कहता रहा है और हम सबने पोजिटिव्ह रिपोर्ट्स ही पढ़ी अभी तक - स्वच्छ और पारदर्शी प्रशासन देकर मामाजी ने हमें यह तय करने पर मजबूर कर दिया कि अगली सभी योनियों में जन्म इसी उर्वर 7 बार कृषि कर्मण अवार्ड प्राप्त ज़मीन पर हो, धन्य हो गए हम - जो कमलनाथ से भरीपूरी सरकार खरीदने की क्षमता रखते हो उन पर कैसा शक
बस कारण एक ही है इस विश्व विख्यात रिकॉर्ड का कि आदरणीय मामाजी पिछले 18 वर्षों से प्रदेश और भाजपा में एक छत्र राज कर रहें है मानो मुख्यमंत्री का पद ना हुआ कोई सरकारी पक्की वाली नौकरी हो और इसको बनाये रखने के लिए कुछ भी करेगा - जो भी भ्रष्ट या बेईमान बीच में आएगा उसे तगड़ा सबक सीखाया जाएगा
आखिर प्रदेश का सवाल है, कोई इज्जत है कि नई , और ख़बरदार जो केंद्र ने मुंह उठाकर इधर देखा भी तो
शाबाश, मामाजी , 2050 तक का सीएम नियुक्त करती है मप्र की शानदार जनता ,
We all Love You

#PositiveNews

***

|| छात्र 100% - शिक्षक फेल ||


शिक्षको की योग्यता अब संदेहास्पद है जो - निश्चित ही या तो मक्कार है या लापरवाह या अज्ञानी या घोर षडयंत्रकारी
शत प्रतिशत अंक देकर इन सबने यह सिद्ध कर दिया कि ना कोई पढ़ रहा है और ना समझ रहा है, सवाल यह है कि जब विषय की समझ नही, दिन भर मोबाइल हाथ मे लेकर कक्षा में टाइम पास करना है तो कहाँ से क्या पढ़ेंगे, यही देख लीजिये कालेज से लेकर नवोदय के कई मित्र अध्यापक है जो हर पल उपस्थित है, आत्म मुग्ध है, आपने उनकी पोस्ट पर कमेंट किया नही कि वे स्पष्टीकरण लेकर हाजिर - मतलब यार पढ़ाते लिखाते हो या बैठे रहते हो हर जगह मोबाइल लेकर ही
सही भी है जब फेसबुक पर चार लाईन नही पढ़ पाता कोई तो हजारों कॉपी कैसे पढ़ेंगे जिसमे चालीस पचास पन्ने होते है और बच्चे खूब पेलकर लिखते है, लॉ कर रहा हूँ तो देख रहा हूँ कि कंटेंट के बजाय पन्ने भरने पर जोर है, प्राध्यापक भी पन्ने गिन रहें है, किसी माई के लाल में दम नही कि विवि के दस हजार बच्चों के लिखे को पढ़ ले
दसवी बारहवीं में तो लाखों छात्र है, मानदेय है, समय पर जांचने के दबाव और बाकी सब है ही
पर यह सब करके माड़साब लोग न्याय नही कर रहे बल्कि एक निकम्मा निर(सा)क्षर भारत तैयार कर रहें है, लॉ के स्नातक में और अभी मास्टर डिग्री में मेरी क्लास में ऐसे नगीने है जो एक वाक्य हिंदी अंग्रेज़ी में सही नही लिख सकते, अंग्रेज़ी माध्यम के तीन चार नमूने ऐसे है जिन्हें एक सरल वाक्य भी लिखना बोलना नही आता वे हिंदी को रोमन में लिखते है तो स्पेलिंग सही नही लिख पा रहें पर 70 -74% लेकर बैठे है
यह देशद्रोह ही नही पीढ़ियों के साथ विश्वासघात है कम्बख्तों - कहाँ भुगतोगे

#खरी_खरी

***

बिल्कुल अच्छा नई लग रियाँ इत्ते नम्बर देख के पता नई जी मितला रियाँ हेगा, 95 - 98 % में तो हमारे टैम पे पूरा मुहल्ला ही निपट जाता था, गिरेस वाले भी पेड़ा बांटते थे जो कुरेशी माड़साब के यहां टूसन जाते थे, लियाकत और शंकर सिंह माड़साब वाले छोरे - छोरी हूण को सप्ली आती थी, सज्जन सिंह और शोभा मैडम बाले तो सिध्धे फेल इज हो जाते थे, कित्ता मजा आता जब विजय और शकील के पिताजी इस्कूल में ई सबके सामने उनको धोना शुरू कर देते थे, माँ - बहन की याद करते हुए और माड़साब लोग्स को भी सुदेश और अख़लाक़ के पिताजी गले का कॉलर पकड़ के सुबू सुबू झुनझुना जैसा बजा देते थे, सब भैंजी लोग इस्टाफ़ रूम में कुचुर फुसुर करती रेती थी

ऐसा लग रियाँ कि फिर से एसबीएसी क्या केते है सीबीएसई की परीक्षा दे दूँ - दसवी और बारहवीं की और 600/600 ले आऊँ और फेर अपना भोत सुन्नर सा फोटू लगाऊँ
सब दिख गया, बस हिंदी - अंग्रेज्जि के माड़साब लोग्स ने अपनी 56 इंची छाती के फोटू नही लगायें कि उनके विषय की वजह से इस्कूल कित्ता आगे बढ़ गया, देख रे बाबा, पकड़ - पकड़ कही मंगल या सुक्कर ग्रह के अग्गे नी हिट जाये
जय कोरोना देब, मेरी कसम आपकूँ बस, अपनी किरपा बनाये रखना , सभी टीजीटी और पीजीटी की जय, पिरिनसिपल साहब हूण की भी जय - जो बस चेम्बर में घूमने वाली कुर्सी पर बैठे रहते है तो बोलो जयकारा माता का सिक्षा की देवी और भगवान की जय , हमदर्दी है तो कोचिंग वालों से जिनके माथे अभी नीट और आईटीआई सॉरी आईआईटी का ठीकरा फूटना बाकी हेगा - भगवान भला करें इनका
***
ऐ अमित भाई
जे नीरज चोपड़ा को फोन कर बोलिये - बहुत ज़्यादा दूर तक ना फेंके, हम है ना, ससुरा 76 मीटर से ज़्यादा फेंक दिया, अरे सब यही फेंकेगा तो फिर हम क्या करेंगे, आंय
***

Comments

Popular posts from this blog

हमें सत्य के शिवालो की और ले चलो

आभा निवसरकर "एक गीत ढूंढ रही हूं... किसी के पास हो तो बताएं.. अज्ञान के अंधेरों से हमें ज्ञान के उजालों की ओर ले चलो... असत्य की दीवारों से हमें सत्य के शिवालों की ओर ले चलो.....हम की मर्यादा न तोड़े एक सीमा में रहें ना करें अन्याय औरों पर न औरों का सहें नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." मैंने भी ये गीत चित्रकूट विवि से बी एड करते समय मेरी सहपाठिन जो छिंदवाडा से थी के मुह से सुना था मुझे सिर्फ यही पंक्तिया याद है " नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." बस बहुत सालो से खोज जारी है वो सहपाठिन शिशु मंदिर में पढाती थी शायद किसी दीदी या अचार जी को याद हो........? अगर मिले तो यहाँ जरूर पोस्ट करना अदभुत स्वर थे और शब्द तो बहुत ही सुन्दर थे..... "सब दुखो के जहर का एक ही इलाज है या तो ये अज्ञानता अपनी या तो ये अभिमान है....नफरतो के जहर से प्रेम के प्यालो की और ले चलो........"ये भी याद आया कमाल है मेरी हार्ड डिस्क बही भी काम कर रही है ........आज सन १९९१-९२ की बातें याद आ गयी बरबस और सतना की यादें और मेरी एक कहानी "सत...

Rest in Peace Dr BK Pasi, You will be Remembered Always

नमन डा बी के पासी सन 1991-92 का साल था , एम ए अंग्रेज़ी में करने के बाद कुछ और पढ़ा जाए इस बात की इच्छा थी लिहाजा सोचा कि पीएच डी करने में तो समय लगेगा क्यों ना एम फिल कर लिया जाए, इंदौर के देवी अहिल्या विवि में थोड़ा परिचय था, स्याग भाई ( डा रामनारायण स्याग ) ने ताजा ताजा शोध पूरा किया था और शिक्षा विभाग में अक्सर आना जाना होता था, देवास की मीना बुद्धिसागर उन दिनों वहा शोध के लिए पंजीकृत हुई ही थी, डा उमेश वशिष्ठ, डा सुशील त्यागी, डा छाया गोयल और डा देवराज गोयल से परिचय था ही, सो सोचा कि क्यों ना यहाँ कुछ पढाई की संभावनाएं टटोली जाएँ. सीधा जाकर डा बी के पासी से मिला तो उन्होंने अपने चिर परिचित अंदाज में कहा क्या करेगा अब पढ़कर और इतना अच्छा काम कर रहा है तो अब क्या करना है फिर मैंने जिद की तो उन्होंने कहा कि थोड़ा ठहर जा मै एक नया पाठ्यक्रम शुरू कर रहा हूँ भविष्य अध्ययन मान्यता के लिए प्रकरण यु जी सी गया है आते ही सूचना करूंगा. बात आई गयी हो गयी, एक दिन बैतूल में गया हुआ था एक शिक्षक प्रशिक्षण में था तो डा पासी का फोन घर पहुंचा और कहा कि तुरंत मिलने को बुलाया है. मै आते ही ...

आशिक की है बारात - जरा झूमके निकले. 27 April 2017

भौंडी आवाज में गरीब बैंड वालों को गवाने वालों, ढोल और ताशों से दूसरों का चैन छिनने वालों, सड़कों पर घटिया नाच कर ट्रैफिक जाम करने वालों - जाओ तुम्हे श्राप देता हूँ कि तुम्हारे वैवाहिक जीवन मे इससे ज्यादा कलह और शोर हो, तुम्हारी जीवन गाड़ी हमेंशा किसी ट्रैफिक में दबकर सिसकती रहें और तुम अपनी घरवाली के ढोल ताशों पर ताउम्र नाचते रहो और कोई एक चवन्नी भी ना लुटाएं, तुम्हारे जीवन मे बिजली ना आये और ऐसा अंधेरा छा जाएं कि तुम एक जुगनू के लिए तरस जाओ। शादी कर रहे हो तो क्या किसी के बाप  पर एहसान कर रहे हो - साला रात रात भर पुट्ठे हिलाकर नाचते हो और दूसरों की नींद हराम करते हो, बारात में घण्टों सड़कों पर मटकते रहते हो, तुम्हारी शादी क्या इतिहास में पहली बार हो रही ? साला अपना जीवन तो नर्क बनाओगे ही शादी के बाद - उसके मातम में हम सबको क्यों लपेटे में लेते हो ? और प्रशासन , पुलिस खींसे निपोरकर नाचते लौंडों और पसीने में नहाती औरतों को घूरकर मजे से देखती रहती है कि कही कुछ दिख जाए, सड़क पर और छतों पर खड़े लोग काल भैरव को मन्नत करते है कि कुछ सामान दिख जाए तो दिन बन जाएं - इन सब बारातियों...