Thursday, August 15, 2013

लौटना रुधिर होना है. लौटना पृथ्वी होना है.


प्रतीक्षा की बंद मुट्ठी में ललक के आकाश को भींचे लौट रहा हूँ. स्मृतियों के मौन युद्द्ध में लौटना एक संधि-

प्रस्ताव है. एक शरणार्थी समय के अपदस्थ वर्तमान के बीच लौटना, माँ होना है. विवशताओं के नाखूनों से 

आशाओं के ज़ख्म कुरेदती इस जानवर रात में लौटना, अपनी मनुष्यता की भोर में सभ्यता का जागना है.

लौटना रुधिर होना है. लौटना पृथ्वी होना है.

देवास लौट रहा हूँ.

Subodh Shukla की दीवार से स्टेटस को चोरी करते हुए माफी सहित..........

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