Skip to main content

Posts of 2 Sept 15




‪#‎shivrajchouhanCM‬ lost his hold on administration in MP. My late brother's wife nt getting mercy job for last one year. Shame shame.


मप्र शासन के मुख्यमंत्री ‪#‎शिवराजसिंहजी‬ ‪#‎ShivrajSinghChouhanCMMP‬ सुन रहे है , मेरे भाई की मृत्यु को इस 27 सितम्बर को एक साल हो जाएगा, और उसकी बेवा को आपके भ्रष्ट राज्य में अभी तक अनुकम्पा नियुक्ति नहीं मिली है. लगता है हमें भूख हड़ताल करना पड़ेगी या बड़ा आन्दोलन क्योकि आपके अधिकारी सिर्फ और सिर्फ कागज़ चलाना जानते है. आपके नाम पर चल रही हेल्प लाइन में दुनिया का सबसे बड़ा झूठ और मक्कारी है जिसका कोई ना असर होता है ना फ़ायदा, काहे के मुख्यमंत्री है आप ???
जितनी ऊर्जा मैंने लगाई है उसके देयक लेने में और अनुकम्पा नियुक्ति लेने के लिए उससे एक नए संसार की रचना की जा सकती थी.
बहुत गर्व और शर्म से बता रहा हूँ कि जितने आवेदन मैंने लिखे है और प्रदेश के मुख्य सचिव से लेकर आपको, संभागायुक्त, विभाग के सचिवों को और जिला कलेक्टर - देवास को उससे तो कम लकड़ी में मेरे भाई की चिता जल गयी थी शिवराज जी.
आपको और आपके अधिकारियों को ना हिन्दी आते है ना अंगरेजी इतने बेहूदा, निकम्मे और गैर जिम्मेदार अधिकारी मैंने कही नहीं देखे तभी तो आपके जैसे लोग व्यापमं करने में सफल हो जाते है और टीनू जोशी और अरविन्द जोशी लोग संपोले बन जाते है. शर्म आती है मुझे यह कहते हुए कि सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश सिर्फ और सिर्फ दिखावे के अलावा कुछ नहीं है और आपकी ना प्रशासन पर पकड है ना शासन पर.
पर अफसोस ना शर्म किसी में बाकी है ना किसी में इतनी तमीज कि जवाब भी दे दें और आपको तो फुरसत नहीं कि कुछ ध्यान दें...........
सवाल ये है कि इन सारे अधिकारियों के या राजनेताओं के मर जाने पर इनकी बेवायें कहाँ से कागज़ लायेगी?


"संदीप जी अगर बच्चे ना होते तो मै ये नौकरी छोड़ देता और सड़क पर खड़े होकर अंडे बेच देता, आये दिन पार्टी के विधायकों का, सांसदों का फोन आता है कि इतने बड़े पद पर बैठे हो, तो क्या दो चार लाख चन्दा नहीं दे सकते, और तो और क्या अधिकारी हो, गालियाँ धमकी और बदतमीजी ...........बहुत दुःख है मुझे कि इस शासन व्यवस्था में इमानदारी की सजा यह है कि दो साल में सात बार स्थानांतर किये गए मेरे और अब फिर कहाँ जाना है, कब यहाँ से भी भगा दें - पता नहीं इसलिए मै अपने साथ एक ब्रीफकेस में दो जोड़ी कपडे और साबुन ब्रश तैयार रखता हूँ."
मप्र के एक ब्लाक में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी का रोते हुए बयान जिसने आज बातचीत में मुझसे कहा इस शर्त पर कि उनका नाम जग जाहिर नहीं होने दूंगा वरना उनकी नौकरी चली जायेगी.
और मेरे साथ इस बातचीत के चार गवाह भी है. बताईये कि हम कहाँ जा रहे है और क्या पाना चाहते है. कितना शर्मनाक है इस शासन व्यवस्था में यह सब सुनना. बहुत दुखद और सारा ध्यान सिर्फ व्यापमं पर केन्द्रित हो जाता है जबकि "और भी गम है जमाने में मोहब्बत के सिवाय"
आओ बनाए मध्य प्रदेश ...

Comments

Popular posts from this blog

हमें सत्य के शिवालो की और ले चलो

आभा निवसरकर "एक गीत ढूंढ रही हूं... किसी के पास हो तो बताएं.. अज्ञान के अंधेरों से हमें ज्ञान के उजालों की ओर ले चलो... असत्य की दीवारों से हमें सत्य के शिवालों की ओर ले चलो.....हम की मर्यादा न तोड़े एक सीमा में रहें ना करें अन्याय औरों पर न औरों का सहें नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." मैंने भी ये गीत चित्रकूट विवि से बी एड करते समय मेरी सहपाठिन जो छिंदवाडा से थी के मुह से सुना था मुझे सिर्फ यही पंक्तिया याद है " नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." बस बहुत सालो से खोज जारी है वो सहपाठिन शिशु मंदिर में पढाती थी शायद किसी दीदी या अचार जी को याद हो........? अगर मिले तो यहाँ जरूर पोस्ट करना अदभुत स्वर थे और शब्द तो बहुत ही सुन्दर थे..... "सब दुखो के जहर का एक ही इलाज है या तो ये अज्ञानता अपनी या तो ये अभिमान है....नफरतो के जहर से प्रेम के प्यालो की और ले चलो........"ये भी याद आया कमाल है मेरी हार्ड डिस्क बही भी काम कर रही है ........आज सन १९९१-९२ की बातें याद आ गयी बरबस और सतना की यादें और मेरी एक कहानी "सत

संसद तेली का वह घानी है जिसमें आधा तेल है आधा पानी है

मुझसे कहा गया कि सँसद देश को प्रतिम्बित करने वाला दर्पण है जनता को जनता के विचारों का नैतिक समर्पण है लेकिन क्या यह सच है या यह सच है कि अपने यहाँ संसद तेली का वह घानी है जिसमें आधा तेल है आधा पानी है और यदि यह सच नहीं है तो यहाँ एक ईमानदार आदमी को अपने ईमानदारी का मलाल क्यों है जिसने सत्य कह दिया है उसका बूरा हाल क्यों है ॥ -धूमिल

चम्पा तुझमे तीन गुण - रूप रंग और बास

शिवानी (प्रसिद्द पत्रकार सुश्री मृणाल पांडेय जी की माताजी)  ने अपने उपन्यास "शमशान चम्पा" में एक जिक्र किया है चम्पा तुझमे तीन गुण - रूप रंग और बास अवगुण तुझमे एक है भ्रमर ना आवें पास.    बहुत सालों तक वो परेशान होती रही कि आखिर चम्पा के पेड़ पर भंवरा क्यों नहीं आता......( वानस्पतिक रूप से चम्पा के फूलों पर भंवरा नहीं आता और इनमे नैसर्गिक परागण होता है) मै अक्सर अपनी एक मित्र को छेड़ा करता था कमोबेश रोज.......एक दिन उज्जैन के जिला शिक्षा केन्द्र में सुबह की बात होगी मैंने अपनी मित्र को फ़िर यही कहा.चम्पा तुझमे तीन गुण.............. तो एक शिक्षक महाशय से रहा नहीं गया और बोले कि क्या आप जानते है कि ऐसा क्यों है ? मैंने और मेरी मित्र ने कहा कि नहीं तो वे बोले......... चम्पा वरणी राधिका, भ्रमर कृष्ण का दास  यही कारण अवगुण भया,  भ्रमर ना आवें पास.    यह अदभुत उत्तर था दिमाग एकदम से सन्न रह गया मैंने आकर शिवानी जी को एक पत्र लिखा और कहा कि हमारे मालवे में इसका यह उत्तर है. शिवानी जी का पोस्ट कार्ड आया कि "'संदीप, जिस सवाल का मै सालों से उत्तर खोज रही थी वह तुमने बहुत ही