Tuesday, May 1, 2012

एक शाम और कविता के नाम........










और ये रहा नितांत दोस्तों के बीच नित्यानंद का कविता पाठ मेरे घर सिहोर में.........................बहादुर पटेल, दिनेश पटेल, केदार, मै और नित्यानंद का कविता पाठ. बहुत आड़े टेढ़े सवाल पूछे उससे और ढेरो कवितायें पेट भरकर सुनी, फ़िर दवाई (:P) दाल-बाटी जमके खाई और देर रात तक बातचीत इस बीच सौरभ अरुणाभ से बाते हुई और ढेरो कवि मित्रों से भी फोन बातें की पर सुरूर तो था ही खूब जमके निंदा रस का भी आनद लिया और अज्ञेय से लेकर नागार्जुन और मुक्तिबोध तक के काव्य परम्परा के वाहक बने हम इन गिन पांच लोग........ कविता में डूबे रहे..................बहादुर पाखी का अप्रेल अंक लेकर भी आया था जिसमे प्रिंयवद का इंटरव्यू छपा है कि मेरे लिए प्रेम और सेक्स एक ही सिक्के के दो पहलू है .......इस पर भी खूब बहस हुई और फ़िर सत्तू बनाम इतिहास और साहित्य बनाम मार्क्सवाद और फ़िर नई-पुरानी कविता और भाषा के द्वंद आदि बाप रे बाप...............जिंदगी की अनेक बेहतरीन शामो में शुमार एक शाम और कविता के नाम........

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