जंतर मंतर पर युवाओं के साथ अब देश भर से बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे है और बाहर आकर लिख रहे है कि गालियां और बेहूदगी से सरकार को कोसा जा रहा है, दरअसल में असहमति की भाषा अलोकतांत्रिक और असभ्य ही होती है यह ध्यान रहें क्योंकि सरकार ने जिस तरह से मेट्रो से लेकर शौचालय में पानी, खाना लाने वालों को, दवाई और मूल चीजों के लाने ले जाने पर प्रतिबन्ध लगाया है वह बेहद शर्मनाक और बेशर्मी भरा निर्णय है, किसी भी लोकतंत्र में संविधान के परे जाकर लोगों के मूल अधिकारों और सुख सुविधाओं को प्रतिबंधित करना कायरता और डरपोक होने की निशानी है
मोदी सरकार बुरी तरह से फैल हुई है और यह जन सैलाब अब बगावत पर उतरा है तो कोई गलत नहीं है, इस मोदी की घटिया और बेहद निकम्मी और किसी लायक नहीं सरकार को जितनी गालियां दी जाएं उतना कम है
***
इंटरनेट और मेट्रो बंद करना संविधानिक अधिकारों का हनन है, और सुप्रीम कोर्ट को यह दिखाई नहीं दे रहा, कल से मूर्ख सरकार पानी बिजली बंद करेगी, इतने कायर हो तो कही डूबकर मर क्यों नहीं जाते, मेट्रो बंद होने और कुछ ही इलाकों में टैक्सी सर्विस चालू रहने से अबकी बार निकल नहीं पाया दूर तक के लिए
कल सीजेआई ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का मेट्रो स्टेशन चालू कर दो - यह क्या बात है, जब दूसरे स्टेशन बंद है तो इस स्टेशन पर मेट्रो आएगी कहां से और जायेगी कहां
समझ आया, नहीं आया, तू समझेगा भी नहीं, पढ़े लिखें लोगों की बातें गजब होती है
***
जंतर मंतर आंदोलन तो मोदी सरकार के खिलाफ एक तरह से समाप्ति है, मुझे लगता है कि यह पूना फिल्म संस्थान, शाहीन बाग, किसान आंदोलन, रोहित वेमुला की मृत्यु के बाद हैदराबाद विवि में हुआ छात्र आंदोलन, मणिपुर से लेकर वे तमाम आंदोलन थे - जिन्होंने इस देश के युवाओं और बुद्धिजीवियों को दिखाया कि यह सरकार क्या कर रही है और कैसे जन विरोधी है, अडानी - अंबानी या किसी अन्य कारपोरेट के दबाव में आकर सारा बजट स्वाहा कर रहें है, मीडिया को दलाल बनाकर देश में एक भयावह किस्म का विकासवादी भ्रम पैदा कर सड़क, बिजली, पानी, पेट्रोल और यहां तक कि अपने ही राम मंदिर का चंदा खा गये
दिल्ली का यह आंदोलन यह भी दिखा रहा है कि कैसे मुखौटों का व्यवसाय बढ़ा और व्यापक हो गया है
बस पहचानते रहिए लोगों को, परखते रहिए अपने आसपास के लोगों को और फिर हर बार नया निर्णय लीजिए, अपने पुराने गलत निर्णयों की समीक्षा कीजिए, कोई बात नहीं यदि आपका निर्णय गलत था तो, पर आपने आगे आकर अपनी बात रखी -निर्णय लिया इसके लिए अपनी पीठ थपथपाइए
समय बदल रहा है, और हां, फैसबुक, इंस्टाग्राम और बाकी अपने जीवन से उन लोगों को खारिज कीजिए जो आपके संग लोकतांत्रिक तरीके से पटरी पर साथ नहीं चल पा रहें है
जय हिंद
***
सोनम की हड़ताल खत्म
फास्ट ट्रैक अदालतों से पेपर लीक खत्म होगा
रात को आकर बोल गया है भांड,
समझ रहे है मित्रों क्या हुआ गत पच्चीस दिनों में, नहीं - तो सुनिए
• चंदा चोरों ने पूरा मामला दबा दिया, चंदा भी एडजस्ट हो गया, चंपत राय ने सब चंपत कर दिया जेल से बाहर रहकर
• E-20 पेट्रोल का मामला भी दब गया, गडकरी फिर से कमाने निकल गया
• मोहन यादव की जमीनों पर व्यवस्थित नामान्तरण हो गया
• नीट का रिजल्ट आ गया और बच्चे खुश है
• सीजेआई ज्ञान दे चुके कि "सोशल मीडिया की क्रेडिबिलिटी कुछ नहीं होती"
• मोदी फिर घूमने निकलेगा, बस जितनी गालियां और बद्दुआएं इसने बेशर्मी से झेली - उसकी दाद दीजिए, नीच और गंवार को इतिहास में फर्क नहीं पड़ा तो इस परजीवी को क्या असर पड़ेगा
बाकी तो भारत में (राहगीर का गीता है ना) - "आदमी चूतिया है"
***
मोदी, शाह और राजनाथ से लेकर तमाम मंत्री फास्टट्रैक अदालत से लेकर सहानुभूति की बात कर कह रहे है कि युवाओं को भड़काया जा रहा है, अब ये तुम जैसे गंवार, धोखेबाज़ और फर्जी लोगों के बस के नहीं है, अपने धर्म और कांवड़ के लिए ढूंढ लो
रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य की बात करो, विकास और सबके भले की बात करो, बहुत नौटंकी कर ली, सिंहासन खाली करो
दिल्ली में मेट्रो बंद है, हर जगह पुलिस छावनियां बनी हुई है, स्टेशन से लेकर बाजार और सड़क पुलिस से अटे पड़े हैं एक तरह से डरपोक और कायर सरकार ने अघोषित आपातकाल लगा रखा है और मजेदार यह है कि कल से आजतक इस सरकार को इतनी गालियाँ दी जा रही है कि एकाध शर्म वाला आदमी होता तो किसी जगह जाकर डूब मरता, पर प्रधान से लेकर मोदी तक बेशर्मों की फौज है और ये ढीठ है
***
सीजेआई सूर्यकांत को लाठी चार्ज के वीडियो देखने का समय नहीं है क्योंकि समय की बर्बादी होती है
मतलब इतना असंवेदनशील आदमी और सारे फसाद और झगड़े की जड़ इसी व्यक्ति के प्रवचन और उदगार थे, उद्योगपतियों के लिए और धर्म के लिए समय है पर जब लोग मर रहे हो - तब इन्हें समय नहीं है कुछ देखने समझने को, लगता है पूरा सुप्रीम कोर्ट भारत की जनता के टैक्स के रूपयों से विदेशियों या एलियन के लिए काम करता है
इतनी भ्रष्ट सत्ता, स्वार्थी प्रशासन और कार्यपालिका और गैर जिम्मेदार न्यायपालिका कभी नहीं रही है दुनिया में
जिस देश के आम युवाओं के साथ यह बर्बरता होती हो वहां पढ़े लिखें, दक्ष और कौशल से परिपूर्ण युवा विदेश क्यों नहीं जायेंगे, IIT, IIM या मेडिकल के श्रेष्ठ डाक्टर क्यों ना पलायन करें, जब अनपढ़, गंवार, गुंडे, मवाली और हत्यारे सत्ता में बैठकर जनता के साथ षडयंत्र में व्यस्त रहते हो
देश को आरक्षण, हिंदू मुस्लिम, मंदिर मस्जिद में उलझाकर ये सब संगठित रूप से मलाई खा रहे है, लंदन घूम रहे है, ऐयाशी कर रहें है - ससुरे चंदा चोर कही के
***
कायदे से तो उस शख्स को हटाओ पद से जिसने इस देश के युवा को काकरोच बोला और आज यह फसाद खड़ा हुआ, एक अच्छी बात यह हुई कि धर्मेंद्र के बहाने नरेंद्र की औकात सामने आई
जिस तरह से युवाओं ने मीडिया को भी नंगा किया और उन्हें घेरकर भगाया, वह काबिले तारीफ है, यह आग छोटे शहरों, कस्बों तक भी जाना चाहिए, अनपढ़, गंवार और दलाल यहां भी ज्यादा पैदा हो गए है मीडिया के नाम पर
भाजपा हटाओ - देश बचाओ
***
सुप्रीम कोर्ट ने आज वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी की अध्यक्षता में एसआईटी बनाई जो चंदा चोरी की पुनः जांच करेगी, इसका सीधा सा अर्थ यह है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बनाई गई एसआईटी से कोर्ट संतुष्ट नहीं है और इसका दूसरा अर्थ यह है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी चोरी में शामिल है और अब योगी को भी इस्तीफा देना चाहिए ताकि राम मंदिर में चोरी की पूरी घटना की निष्पक्षता से जांच हो सके और इसका अगला अर्थ यह है कि मोदी सरकार और मोदी सरकार के सारे मुख्यमंत्री भ्रष्ट हैं
भाजपा हटाओ देश बचाओ
***
कार्पोरेट्स, अदाणी, अंबानी और फासिस्टस लोगों की गुलाम सरकार देश छोड़ो, मोदी - शाह इस्तीफा दो
भाजपा हटाओ - देश बचाओ, इनके पाप का घड़ा भर चुका है इसे फोड़ो और आगे बढ़ो
मोदी सरकार हटाओ - यही समय है जब हम अपनी गलती सुधारें, आपस में भले विवाद हो या मतभेद पर इस निकम्मी और नालायक सरकार को हटाना बहुत जरूरी है, जो जहां है वहां से सपोर्ट करें, दिल्ली में आज जंतर मंतर पर जाएं, और यदि नहीं तो प्रण लें कि इस नालायक और देश बेचूं सरकार को अब नहीं आने देंगे, ये नीच राम जी से लेकर बद्री केदार और हमारे भगवानों का चंदा चुराकर खा गए और अपने कार्यालय बना लिए, चंपतराय जैसे चोर इनके एजेंट है, ऐसे लोगों को सत्ता में रखकर क्या हम चुप रहेंगे
हमें काम करने वाला प्रधानमंत्री चाहिए भांड, नौटंकी, कपड़े बदलू, षडयंत्रकारी, अनपढ़, गंवार, महिलाओं को ताड़ने वाला, दंगे कराने वाला, हमारी गंगा जमनी तहजीब बर्बाद करने वाला, विदेश नीति में कमजोर, शिक्षा - स्वास्थ्य की उपेक्षा करने वाला, युवाओं की आवाज दबाने वाला और आर्थिक रूप से हर छोटे आदमी से लेकर बड़े बड़े उद्योगों को और बाजार को बर्बाद करने वाला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नहीं चाहिए और ना ही चाहिए गडकरी, हरदीप पुरी, निर्मला सीतारमण, किरण रिजूजु, राजनाथ या जयशंकर जैसे घटिया और निकम्मे मंत्री जो नित नए तरीकों से देश बर्बाद कर रहें है और आम लोगों की जिंदगी में खलल डाल रहे है
मोहन यादव हो, भजनलाल हो या योगी हो या भाजपा के राज्यों के भ्रष्ट मुख्यमंत्री - इन सबको भी हटाओ, इन्होंने राज्याें को कंगाल कर जल, जंगल और जमीन हथिया ली है , भगाओ और काबिज हो जाओ
***
बीतेंगे कभी तो दिन आखिर
______
कल जंतर मंतर से संसद तक मार्च करने वाली भीड़ भाजपा के खिलाफ वोट में तब्दील नहीं होगी क्योंकि अपने कल्लू मामा ने ऐसी तकनीक ईजाद कर ली है कि आप वोट कही भी, किसी को भी दो - सिर्फ कमल खिलेगा, कमल खिलेगा
अब एक ही इलाज है, धर्मेंद्र प्रधान, अमित शाह, नितिन गडकरी, निर्मला सीतारमण और नरेन्द्र मोदी के इस्तीफे के साथ चुनाव बैलेट पेपर से करवाने की मांग करो - वरना राष्ट्रपति, तमाम राज्यपाल, विधायिका से लेकर न्यायपालिका के सर्वोच्च पदों के लोगों से इस्तीफ़ा माँगों और नहीं दे तो चुनावों का बहिष्कार करो और कार्यपालिका को संविधान की शपथ याद दिलाओ - सौ में से एकाध ब्यूरोक्रेट तो अक्ल वाला होगा कम से कम, बाकी तो गुलाम और मजबूरी में खाकी पेंट और सफेद शर्ट पहनकर गिरगिट बने बैठे ही है, खास करके प्रमोटी - जो चुनाव करवाने के लिए ही दौड़ा करते है जिनसे कोई बदलाव या काम की उम्मीद नहीं है - अपवाद को छोड़कर
मीडिया का तो ऐसा बहिष्कार करो कि कोई कैमरा लेकर आए तो उसी कैमरे से उसके चेहरे का ऐसा झकास "फोटो" बना दो कि बीबी - बच्चे पहचानने से मना कर दें और अगले सात जन्मों में उसके खानदान में कोई मीडिया में आकर गोदी में बैठने की जुर्रत ना करें
दुष्यंत से माफी सहित -
"कैसे आसमाँ में सुराख हो सकता नहीं,
करोड़ों पत्थर आकाश में उछालो यारों"
***
Comments