अक्सर हम सबको लगता है कि हमें लोग भूल रहे है, महत्व नहीं दे रहे हैं, उपेक्षा कर रहें है, तिरस्कार कर रहें है और अपने जीवन से निकाल रहें हैं - यह बहुत अच्छी बात है, करने दीजिए यह सब उन्हें - जिन्हें यह सब करके सुख मिलता है, क्योंकि वे आपके साथ तब तक थे - जब तक आप उनके लिए काम के थे, उनके हर तरह के जायज़ - नाजायज़ काम में शरीक थे या मदद कर रहें थे, परन्तु जैसे ही आपसे उनका स्वार्थ पूरा हो जाता है - वे दूर छिटकने लगते हैं, आपकी उपेक्षा करके ही वे अपने सारे पाप और धत् कर्मों से दूर रहकर एक साफ छबि बनाने का प्रयास करते है या ईमानदार और नैतिक होना दिखाते हैं
सबसे अच्छी बात तो यह होगी कि आप एकदम निपट अकेले रह जाएं और सब आपसे दूर हो जाएं, बस आप अपने उद्देश्य, कर्म और नीयत साफ रखें, सबके लिए अच्छा सोचते रहें और हर उस बात पर ध्यान देना बंद करें - जो आपको हैदस में डालती है, संत्रास में रखती है, याद रखिये हर प्रश्न का जवाब देना कतई जरूरी नहीं यह एकदम बंद करें, हर मुद्दें पर विचारना और बोलना बंद करें - क्योंकि लोग है और उनकी जुबानें हम पकड़ नहीं सकते - ना हमें यह करने की आवश्यकता है और ना ही हमारी कूबत है
बस यह ध्यान रखिए कि आपको खोकर वे बहुत कुछ खो देंगे और फिर जो शून्य उपजेगा - वह कभी भर नहीं पाएगा, हम सबको बहुत जल्दी यहाँ से प्रस्थान करना है, इस छोटे सफ़र में सीट पकड़कर बैठने से कुछ होने वाला नहीं है, आपकी मंज़िल अभी नहीं तो थोड़ी देर में आती ही होगी, सफर का मज़ा लें - सह यात्रियों को उनके हाल पर छोड़ दें
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13 वर्षों में मोदी सरकार के काबिल मंत्री नितिन गडकरी ने देश में पक्की सड़कों का ऐसा जाल बिछाया कि एक - दो बरसात के बाद पूरे देश में ट्रक से लेकर स्कूटी चलाने वाले, यहां तक कि साइकिल चलाने वाले भी इन सड़कों के जाल में फंसकर जमीन में धंस रहें है, जान दे रहे है और सरकार बहादुर को कोई फिक्र नहीं है
मैं मानता हूँ कि इतने बड़े पैमाने पर गड़बड़ी, गुणवत्ता में कमी रह जाती है, परन्तु जिस वृहद पैमाने पर पुल, सड़कें, रपटें, और सर्विस रोड और पटरियां धंस रही है - वह चिंतनीय है, देश भर की दस - बारह सीमेंट कंपनियों से सीमेंट लेकर और अपने ठेकेदारों से तगड़ा कमीशन लेकर जिस तरह से देश की धरा को सीमेंट कांक्रीट से पाट दिया गया है - उससे जमीन में पानी का रिसाव तो हो नहीं रहा, वह मुद्दा तो अलग है ही, परन्तु जिस अंदाज में सरकार ने टोल टैक्स से लेकर बाकी स्रोतों से कमाई की है - वह शर्मनाक है, देश के मेहनतकश लोगों का रूपया आज जमींदोज हो रहा है, लोग मर रहे है, वाहनों का नुकसान हो रहा है, बीमा कंपनियों का नुकसान हो रहा है, अदालतों में क्लेम के केस बढ़ रहे है और इस तरह से एक तरह के जाल में देश में गरिमा के साथ जीने की गारंटी वाला "आम आदमी" अभिमन्यु की तरह फंस गया है और उसे बाहर निकालने का रास्ता नहीं सूझ रहा है
मोदी को इन सबसे कोई लेना - देना नहीं, राष्ट्रपति रबर स्टाम्प है, सुप्रीम कोर्ट को शबरी माला मंदिर से फुर्सत नहीं, प्रशासन को हफ्ता पहुंच रहा है, मीडिया से बड़ा दलाल कोई नहीं, नितिन गडकरी के बेटे को इथेनॉल फैक्ट्री के लिए पर्याप्त धन मिल गया और अगली चौदह पीढ़ी के लिए वो बेफ्रिक है - बचे हम लोग तो आईए घंटा, थाली, चम्मच बजाये और मोदी गुण गायें
जय श्रीराम, जय सनातन, जय हिंदू राष्ट्र
क्यों बै ये जवाबदेही क्या होता है
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जीवन सुख - दुख की मिश्री है जो साँसों के धागे में लिपटी हर दिन को मीठा - कड़वा बनाते रहती है, कभीं कुछ भारी, कभी कुछ और इस तरह से देखते हुए समय कब निकल जाता है मालूम नहीं पड़ता
समय के साथ भूलना बहुत जरूरी प्रक्रिया है, यदि आपको स्मृति दोष है यानि स्मृतियाँ दंश की तरह से चुभती है, आपको हर बात याद रहती है तो आपसे ज्यादा दुखी कोई नहीं, क्योंकि एक समय के बाद सारी यादें धुंध बनकर आपके आसपास के वातायन में जम जाती है बर्फ की तरह और रीसती रहती है टप - टप
ऐसे में हर क्षण को, हर व्यक्ति, हर घटना, हर सांस को भूलने का अभ्यास कीजिए, और इस भूलने में यदि आप हर बात को, अतीत के बोझ को उतारकर सबको माफ करने का सार्थक प्रयास कर सकें तो यकीन मानिए सब कुछ मनोनुकूल होगा और एक सकारात्मकता से आप भर उठेंगे
यदि अतीत को सिर पर बोझ बनाकर रखेंगे तो सफर करना असहज होगा, हमें ही सबकुछ उतारकर फेंकना होगा, जीवन में हम कई प्रकार के व्यर्थ बोझ उठाकर देह के बोझ के साथ मानसिक संत्रास भी उठा लेते है और यही अवसाद नासूर की तरह से बढ़ते जाते है, भूलना और माफ करते हुए आगे की ओर बहाव के संग बहना यदि आज भी लक्ष्य बना लें तो बहुत कुछ संभव है अभी भी
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