Skip to main content

Sandip Ki Rasoi - Bharwa Kakoude - Post of 27 August 2024

 भरवा ककौड़े




आधा किलो ककौडों को साफ धोकर थोड़ा सूखा लें और फिर चाकू की सहायता से उन्हें बीच में से काटकर बीज निकाल ले
अब एक प्लेट में दो बड़े चम्मच बेसन, आधा कटोरी सिकें हुए मूंगफली के दानों का पाउडर, दो चम्मच सफ़ेद तिल, स्वादानुसार नमक, लाल मिर्च, गरम मसाला, धनिया पाउडर, अमचूर, चाट मसाला, जीरा पाउडर, सौंफ, काली मिर्च कूटी हुई थोड़ी सी मिला लें और इसमें दो चम्मच तेल, अदरख लहसून का पेस्ट मिला लें
इस सारे मिश्रण को अच्छे से मिला लें और कटे ककौडों के बीच ठूंस ठूंसकर भर दें
अब कड़ाही अच्छे से गर्म करें और पर्याप्त सरसो का तेल डाल दें, जब सरसो का तेल गरम हो जाये तो दो - तीन बूंद पानी के डाल दें, इसके बाद इसमें जीरा, राई और मेथीदाना डाले, थोड़ा सा हींग डाले
जब ये सब तड़तडाने लगे तो रखे हुए ककौड़े एक एक कर डाल दें और पाँच मिनिट यूँ ही होने दें
पाँच मिनिट बाद बहुत हल्के हाथों से पलट दें और ढाँककर रख दें, फिर दस मिनिट बाद पलटें और आधा कप पानी डाल दें साथ ही इसे अच्छे से ढाँक दें, पानी इसलिये कि मसाले जले नही
बस लगभग बीस मिनिट आपके भरवा ककौड़े तैयार है, इस सब्जी को ज्वार, मक्का या गेहूँ की रोटी के साथ खायें या रागी के डोसे के साथ
ककौडों में आम सब्जियों से 45 % अधिक प्रोटीन होता है ऐसा सुना है, अपुन को तो स्वाद होने कूँ माँगता है बस, खाली पीली कैलोरी गिनेगा तो साला कुछ भी नही खा - पी सकता ना यार
जन्माष्टमी की छुट्टी और फुर्सत का इससे स्वादिष्ट और पौष्टिक उपहार हो नही सकता, और यह भी याद रखिये दुनिया के श्रेष्ठतम रसोइये पुरुष है

Comments

Popular posts from this blog

हमें सत्य के शिवालो की और ले चलो

आभा निवसरकर "एक गीत ढूंढ रही हूं... किसी के पास हो तो बताएं.. अज्ञान के अंधेरों से हमें ज्ञान के उजालों की ओर ले चलो... असत्य की दीवारों से हमें सत्य के शिवालों की ओर ले चलो.....हम की मर्यादा न तोड़े एक सीमा में रहें ना करें अन्याय औरों पर न औरों का सहें नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." मैंने भी ये गीत चित्रकूट विवि से बी एड करते समय मेरी सहपाठिन जो छिंदवाडा से थी के मुह से सुना था मुझे सिर्फ यही पंक्तिया याद है " नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." बस बहुत सालो से खोज जारी है वो सहपाठिन शिशु मंदिर में पढाती थी शायद किसी दीदी या अचार जी को याद हो........? अगर मिले तो यहाँ जरूर पोस्ट करना अदभुत स्वर थे और शब्द तो बहुत ही सुन्दर थे..... "सब दुखो के जहर का एक ही इलाज है या तो ये अज्ञानता अपनी या तो ये अभिमान है....नफरतो के जहर से प्रेम के प्यालो की और ले चलो........"ये भी याद आया कमाल है मेरी हार्ड डिस्क बही भी काम कर रही है ........आज सन १९९१-९२ की बातें याद आ गयी बरबस और सतना की यादें और मेरी एक कहानी "सत...

Rest in Peace Dr BK Pasi, You will be Remembered Always

नमन डा बी के पासी सन 1991-92 का साल था , एम ए अंग्रेज़ी में करने के बाद कुछ और पढ़ा जाए इस बात की इच्छा थी लिहाजा सोचा कि पीएच डी करने में तो समय लगेगा क्यों ना एम फिल कर लिया जाए, इंदौर के देवी अहिल्या विवि में थोड़ा परिचय था, स्याग भाई ( डा रामनारायण स्याग ) ने ताजा ताजा शोध पूरा किया था और शिक्षा विभाग में अक्सर आना जाना होता था, देवास की मीना बुद्धिसागर उन दिनों वहा शोध के लिए पंजीकृत हुई ही थी, डा उमेश वशिष्ठ, डा सुशील त्यागी, डा छाया गोयल और डा देवराज गोयल से परिचय था ही, सो सोचा कि क्यों ना यहाँ कुछ पढाई की संभावनाएं टटोली जाएँ. सीधा जाकर डा बी के पासी से मिला तो उन्होंने अपने चिर परिचित अंदाज में कहा क्या करेगा अब पढ़कर और इतना अच्छा काम कर रहा है तो अब क्या करना है फिर मैंने जिद की तो उन्होंने कहा कि थोड़ा ठहर जा मै एक नया पाठ्यक्रम शुरू कर रहा हूँ भविष्य अध्ययन मान्यता के लिए प्रकरण यु जी सी गया है आते ही सूचना करूंगा. बात आई गयी हो गयी, एक दिन बैतूल में गया हुआ था एक शिक्षक प्रशिक्षण में था तो डा पासी का फोन घर पहुंचा और कहा कि तुरंत मिलने को बुलाया है. मै आते ही ...

आशिक की है बारात - जरा झूमके निकले. 27 April 2017

भौंडी आवाज में गरीब बैंड वालों को गवाने वालों, ढोल और ताशों से दूसरों का चैन छिनने वालों, सड़कों पर घटिया नाच कर ट्रैफिक जाम करने वालों - जाओ तुम्हे श्राप देता हूँ कि तुम्हारे वैवाहिक जीवन मे इससे ज्यादा कलह और शोर हो, तुम्हारी जीवन गाड़ी हमेंशा किसी ट्रैफिक में दबकर सिसकती रहें और तुम अपनी घरवाली के ढोल ताशों पर ताउम्र नाचते रहो और कोई एक चवन्नी भी ना लुटाएं, तुम्हारे जीवन मे बिजली ना आये और ऐसा अंधेरा छा जाएं कि तुम एक जुगनू के लिए तरस जाओ। शादी कर रहे हो तो क्या किसी के बाप  पर एहसान कर रहे हो - साला रात रात भर पुट्ठे हिलाकर नाचते हो और दूसरों की नींद हराम करते हो, बारात में घण्टों सड़कों पर मटकते रहते हो, तुम्हारी शादी क्या इतिहास में पहली बार हो रही ? साला अपना जीवन तो नर्क बनाओगे ही शादी के बाद - उसके मातम में हम सबको क्यों लपेटे में लेते हो ? और प्रशासन , पुलिस खींसे निपोरकर नाचते लौंडों और पसीने में नहाती औरतों को घूरकर मजे से देखती रहती है कि कही कुछ दिख जाए, सड़क पर और छतों पर खड़े लोग काल भैरव को मन्नत करते है कि कुछ सामान दिख जाए तो दिन बन जाएं - इन सब बारातियों...