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निर्भया उर्फ़ दामिनी उर्फ़ भारत का ऐतिहासिक न्याय 5 मई 2017



निर्भया उर्फ दामिनी उर्फ एक नाबालिग लड़की उर्फ देश मे आंदोलन और मोमबत्ती की अंगड़ाई से हाहाकार !!!
सजा पाए 4 मर्दो को फांसी हो शायद अब, ग़र माफ़ी या पुनर्विचार में कुछ ना हुआ तो
सवाल वही कि क्या इससे किसी को भी सबक मिलेगा ?
क्या छेड़छाड़, बलात्कार रुकेंगे ?
मर्दवादी सोच बदलेंगी ?
पितृ सत्ता के ढांचे में बदलाव होगा महिलाओं को समता का अधिकार मिलेगा?
क्या महिलाएं खुद आगे आकर अपनी सोच और व्यवहार में बदलाव लाएंगी ?
क्या अपने जीवन के अधिकार - चाहे वो पढ़ाई का हो, नौकरी करने का, छोटे कपड़े पहनने का, रात बेरात बाहर जाने का, अपनी मर्जी से जीवन जीने का, शादी का या अकेले रहने का महिलाएं खुद लेंगी और क्या ये सब अधिकार उन्हें समाज या परिवार देगा ?
काम करने की जगह पर शोषण रुकेगा या महिलाएं खुद तरक्की के लिए अपने शरीर का इस्तेमाल नही करेंगी, या स्त्री ही स्त्री के विरुद्ध कोई रणनीतिक षड्यंत्र नही रचेंगी ?
इस फ़ैसले का दुरुपयोग धन ऐंठने और पुरुषों को परेशान करने में नही होगा DV Act 2005 की तरह ?
जेंडर के पुराने पड़ते मुद्दों और जेंडर समानता के नाम पर दुकान चलाने वाली और जेंडर की ताबड़तोड़ दवा बांटने वाली "घर बिगाड़ू" औरतों के व्यवहार और तौर तरीकों में बदलाव आएगा ?
ख़ैर , अब आगे देखना है कि स्व जस्टिस वर्मा के महत्वपूर्ण बदलावकारी परिवर्तनों के बाद आज की बेंच का यह फैसला कितना कारगर होता है भारतीय दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती, सीता, गीता, द्रोपदी, बिलकिस, रेहाना, परमिंदर, एलिजाबेथ, मैरी या दामिनी, निर्भयाओं के परिपेक्ष्य में।

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