Wednesday, June 26, 2013

हरिशंकर परसाई कहिन

तमाम झूठे विश्वासों, मिथ्याचारो, कर्मकाण्डो , तर्कहीन धारणाओ , पाखंडो, को कंठ में ऊँगली डाल -डाल कर और पानी भरकर उलटी करानी पड़ती है , तब धरम की अफीम का नशा उतरता है । अगर यह न किया जाए आदमी जहर से मर भी सकता है ।


हम जब दुःख भोगते है , तब दुसरो से उस दुःख की मान्यता चाहते है । जब यह मान्यता मिलती है , तो दुःख में भी हम गर्व का अनुभव करते है । कोई भोगे, और उसका भुगतना अनदेखा चला जाए , तो उसका दुःख दुगना हो जाता है.
हरिशंकर परसाई

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