Wednesday, May 4, 2011

एनजीओ पुराण भाग ७२

अंदर से वो बिलकुल सहिष्णु नहीं थी हाँ अहिंसा की बात बहुत करती थी, अपनी बिरादरी के सारे देवी देवता और मंदिरों की वह गहरी उपासक थी और सारे साधू संतो की अनुयायी पर काम के मामले में वो बेहद लापरवाह और चापलूसी से पिछले कई वर्षों से वो इसी जगह टिकी हुई थी बिलकुल फेविकोल के गोंद की तरह पर अब इस नए ससुरे डीएम् ने उसकी जड़े हिलाने का तय कर लिया है आजकल वो मंदिरों में ज्यादा और काम पर कम दिखाई देती है (एनजीओ पुराण भाग ७२)

No comments: