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Malini s Poster on 5 April 26 and Man Ko Chithti - Posts from 1 to 7 April 26

 


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एक दरख़्त की छाया में नहीं, विशाल बरगद की छाया में नहीं, पहाड़ की तलाई में नहीं, नदी के किनारे नहीं, समुद्र की रेत के किनारे नहीं, किसी जंगली झुरमुट में नहीं, किसी सूनसान पगडंडी पर नहीं, किसी शीतल चांदनी में नहीं, रात के गहन स्तब्ध सन्नाटे में नहीं - अभी तक की पूरी जिंदगी एक नन्हीं सी पत्ती की छाया में गुजारकर आया हूँ - इसलिए बहुत अच्छे से जीवन के मायने, अर्थ, उद्देश्य, फलसफे, लोग, मित्र, दुश्मन और जीवन के अन्तिम प्रारब्ध से वाकिफ़ हूँ
बस, एक नया दशक शुरू होने को है - हालांकि छह दशकों की परिलब्धियां इठलाती तो है, इस लंबी अथक यात्रा की पोटली में उपलब्धियों से ज़ियादा असफलताएं है जिन्हें बहुत संजोकर रखा है किसी धड़कन की तरह, बस इसी तरह से शेष समय निकल जाए इस शुष्क और बेजान होती कोपल के बीच उगी पत्ती की छाया में तो धन्य समझूं अपने को
I quote John Burroughs - "One resolution I have made, and try always to keep, is this - "to rise above little things"
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"मुंबईया फिल्म उद्योग के भांड और वैश्विक कलाकार"
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हमारे यहां कंगना रनौत जैसी गंवार और विशुद्ध मूर्ख से लेकर बाकी हेमामालिनी तक की मूक बधिर लोगों की फौज है, मूर्ख अक्षय जैसे लोग है जो पूछते है कि आप आम काटकर खाते है या छीलकर, लिएंडर पेस है - जो अंधभक्त होकर दक्षिणपंथ को ज्वाईन कर लेते है, दलाल मीडिया है जो विधायक सांसद और पार्षदों के टुकड़ों पर पलकर कुत्तों की तरह उनके पीछे कैमरे उठाए दौड़ते है, उनका हगा - मूता चाटकर पेट भरते है तभी ना गत बारह वर्षों में एक भी प्रेस वार्ता नहीं हुई
वही अमेरिका की सदाबहार अभिनेत्री मैरिल स्ट्रीप है जो मूर्ख डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत में मूल सवाल उठाती है और बगैर भय के ट्रंप को सवालों के बीच खड़ा करती है, हमारे परिधान को तो नौटंकी करने और शूट करने से फुर्सत नहीं मिल रही, पूरी दुनिया और अपना देश गैस, पेट्रोल और डीजल के साथ महंगाई से जूझ रहा है और वो अमर होने के नुस्खे शूट कर रहा किसी भांड की तरह कपड़े बदल बदलकर महिलाओं के बीच
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मेरिल ने कहा
आप परिवारों को तबाह कर रहे हैं और इसे राजनीति कह रहे हैं। हमें ऐसा नहीं होना चाहिए।"
ट्रम्प अपनी कुर्सी पर थोड़ा हिले। मॉडरेटर ने अपना पेन नीचे रख दिया। 17 लंबे सेकंड बीत गए—कोई नहीं बोला।
मेरिल ने अपनी बात जारी रखी, उनकी आवाज़ स्थिर थी और चिल्लाने से कहीं ज़्यादा प्रभावशाली थी—ऐसी गूंज जो सिर्फ़ उन्हीं में हो सकती है :
"यह देश मेहनतकश लोगों के आंदोलन और दिलों पर बना है। और जिन लोगों की आप सिर्फ़ संख्या के रूप में बात कर रहे हैं? वे हमारे खेतों में काम करते हैं, हमारा भोजन उगाते हैं, हमारे घर बनाते हैं और हमारे समुदायों की सेवा करते हैं। वे हमारे इतिहास का हिस्सा हैं, चाहे आपको पसंद हो या न हो।"
ट्रम्प ने बीच में बोलने की कोशिश की।
मेरिल ने एक उंगली उठाई—आक्रामक रूप से नहीं, बस दृढ़ता से, उस महिला के अधिकार के साथ जो सच्चाई को भली-भांति जानती है।
"मुझे बात पूरी करने दीजिए।"
कमरे में सन्नाटा छा गया।
उसके बाद मेरिल बोलीं : "नेतृत्व लोगों को डराने के बारे में नहीं है, यह उनकी रक्षा करने के बारे में है। और क्रूरता ताकत नहीं होती है।"
श्रोता तालियाँ बजाते हुए अपनी सीटों से उठ खड़े हुए। ट्रम्प उठे और मंच से चले गए।
मेरिल वहीं रहीं। सीधे कैमरे में देखा, उनकी आवाज़ अब पहले से नरम थी, लेकिन उनके अब तक के किसी भी प्रदर्शन से ज़्यादा तीखी थी ।
"अगर हम रास्ता भटक गए हैं, तो लोगों को बाहर धकेलने से नहीं। हम उसे तब पाएंगे जब हम याद रखेंगे कि हमने क्या बनने का वादा किया था।"
• क्या सबक है इस बातचीत का -
वही कलाकार सच्चा कलाकार है जो भेडिये की आँख में आँख डालकर उसे भेड़िया कह सके !!
• क्या जिज्ञासा है -
क्या दुनिया में सबसे ज्यादा फिल्मे बनाने वाली मुम्बईया बिरादरी में कोई मिस या मिस्टर मेरिल स्ट्रीप हैं ?
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[ कामरेड बादल सरोज और Vishnu Nagar जी की पोस्ट में थोड़े संपादन के साथ साभार ]
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