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The Whistleblower Post of 27 Dec 2021

 #The_Whistleblower

एकदम ही बेकार सीरीज, कोई अर्थ नही है कहानी में, ना कड़ियों का आपस में कोई लिंक है, दुर्भाग्य यह है कि जो इस कांड में पूरी शिद्दत और दम खम से संलिप्त थे वे आज भी सत्ता में पूरी मुस्तैदी से मौजूद है - उनके बारे में ना एक शब्द - ना इशारा और सबसे कमजोर बात कि आजतक का अक्षय सिंह मेघनगर जाकर मरा था / मारा गया था - उसे कहानी की शुरुआत से दिखाया गया है और मौत उज्जैन थाने में दिखाई जबकि वह डाक्टर वर्षा के घर मरा था, कुछ भी कहानी है - ना तथ्य, ना गल्प और ना नाटकीयता
58 से ज्यादा लोग मारे गए थे जिनका कोई जिक्र नही है - बस यह एकमात्र सच हैं कि अंततः "व्हिसिल ब्लोवर ही कलप्रीट है" - यह बात बीच में आती भी है और सम्भवतः सच भी हो
कुल मिलाकर टाइम वेस्ट
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आभा निवसरकर "एक गीत ढूंढ रही हूं... किसी के पास हो तो बताएं.. अज्ञान के अंधेरों से हमें ज्ञान के उजालों की ओर ले चलो... असत्य की दीवारों से हमें सत्य के शिवालों की ओर ले चलो.....हम की मर्यादा न तोड़े एक सीमा में रहें ना करें अन्याय औरों पर न औरों का सहें नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." मैंने भी ये गीत चित्रकूट विवि से बी एड करते समय मेरी सहपाठिन जो छिंदवाडा से थी के मुह से सुना था मुझे सिर्फ यही पंक्तिया याद है " नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." बस बहुत सालो से खोज जारी है वो सहपाठिन शिशु मंदिर में पढाती थी शायद किसी दीदी या अचार जी को याद हो........? अगर मिले तो यहाँ जरूर पोस्ट करना अदभुत स्वर थे और शब्द तो बहुत ही सुन्दर थे..... "सब दुखो के जहर का एक ही इलाज है या तो ये अज्ञानता अपनी या तो ये अभिमान है....नफरतो के जहर से प्रेम के प्यालो की और ले चलो........"ये भी याद आया कमाल है मेरी हार्ड डिस्क बही भी काम कर रही है ........आज सन १९९१-९२ की बातें याद आ गयी बरबस और सतना की यादें और मेरी एक कहानी "सत...

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