Monday, June 11, 2018

एक था मोदी 11 June 2018



एक था मोदी
_________
भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को अब यह मुगालते नही होना चाहिए कि वे जन्म से क्रीम है और IAS, IPS are born, they are not made. They are being MAD now onwards
मोदी सरकार ने बगैर परीक्षा या प्रक्रिया के दस लोगों को चुनने का मौका देकर एक और बड़े संविधानिक ढांचे को खत्म करने का विज्ञापन दिया है
निश्चित ही राष्ट्रभक्तों और चाटुकारों को मलाई वाली पकी पकाई खीर मिल रही है और अगर यही हाल रहा तो आने वाले 2024 तक यू पी एस सी पर ताले पड़ जाएंगे और सफाई कर्मचारी से लेकर केबिनेट सेक्रेटरी तक राष्ट्र भक्त हर जगह नजर आएंगे
यह सरकार नही बल्कि देश को खोखला करने वाली सबसे बड़ी संस्था है जब कुछ ब्यूरोक्रेट्स अभी भी सुन नही रहे तो यह तरीका निकाला है घुसपैठ का और अब आगे देखिए कि नौकरशाही , अफसरशाही को किस तरह से कौड़े लगाकर देश हित का काम किया जाएगा या ये चुने हुए देशभक्त स्वफूर्त भावना से जनकल्याण करेंगे
उत्तर प्रदेश में डाक्टर कफील के भाई को गोली मार हो दी है कल - पुलिस कुछ करेगी - इसका शक है और बाकी छग मप्र राज में ब्यूरोक्रेट्स कैसे थिंक टैंक बनकर चाटुकारिता की हद पार कर रहे है यह हम देख ही रहे है और जो सच मे काम करना चाह रहे है या सवर्ण फ्रेम में फिट नही बैठते उन्हें मंत्रालयों में बाबू बनाकर रख दिया है
कुल मिलाकर देश को , देश के संघीय ढांचे को तोड़ने की जबरजस्त शुरुवात है - चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट, विभिन्न आयोग, मीडिया, बैंक , रिज़र्व बैंक, प्रक्रियाओं को तोड़मरोडने के बाद अब पेश है दस चाटुकारों की सीधे उच्च पदों पर भर्ती वो भी आरक्षण और नियम कायदों को धता बताकर
जियो लल्ला , जियो - उर्जित पटेल से अर्थ शास्त्री से लेकर दीपक मिश्रा से न्यायविद जैसे लोगों की कमी है क्या - जिनकी ना रीढ़ की हड्डी है - ना नैतिकता और जाहिर है ये दस कौन होंगे उनके नाम, खून, जात , संपर्क - सम्बन्ध, तेल पानी पिये डंडे और राष्ट्रहित से कौन वाकिफ ना होगा
दूसरा मौजूदा ब्यूरोक्रेसी को भी सोचना होगा कि यदि वे अपने अपेक्षित कार्य ना करके इन आवाजाही वाले नेताओं के कहने में आकर जन भावनाओं को कुचलकर काम करेंगे - नियमों के विपरीत, तो एक दिन नही - बल्कि बहुत जल्दी हकाल दिए जाएंगे और उनके नाम मिट जाएंगे इस धरा से और उनकी औलादें क्या करेंगी, विदेश में कैसे पढ़ेंगी और फिर वंशवाद की बेल भी सूख जाएगी, दिल्ली - इलाहाबाद के धंधे खत्म हो जाएंगे और सब फुस्स
लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशिक्षण संस्थान का नाम बदले - आप सुझाइए कोई धांसू सा - उसे भी कम्बख़्त उत्तर भारत का नागपुर बना ही दें - वक्त की मांग है और इसका बहुत शानदार इंफ्रा स्ट्रक्चर है भाई - आओ कब्जा करें, नष्ट करें और भ्रष्ट करें
आइये हम करें राष्ट्र आराधन

No comments: