Sunday, November 23, 2014

पता नहीं- सोनल शर्मा का संकलन



"पता नहीं" सोनल का पहला काव्य संग्रह है. सोनल पिछले कई बरसों से समाज के ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यक्रमों में लगी हुई है और कविता उनके लिए एक महत्वपूर्ण जगह है जहां वे अपने आपको सम्पूर्ण रूप से अभिव्यक्त कर पाती है.

इधर हिन्दी की सभी पत्रिकाओं में सोनल की कवितायें प्रमुखता से छपी है और वे लगातार चर्चा में रही है. सोनल की कवितायें हमें एक नए रचना संसार में ले जाती है जहां भावनाएं, द्वन्द और एक रोशनी की राह खोजती छटपटाहट है, यह राह उन सभी गलियारों में से निकलती जो मन के कही गहरे कोनों से कवि अपने आपसे एकाकार होता है और भाषा और बिम्बों से अपना रचना संसार रचती है. सोनल इन्ही सबके बीच लोगों की आवाज, अपने स्वरों में मिलकर एक वृहद् संसार रचती है जो उन्हें कविता के नए और ठोस धरातल पर ले जाता है और अपने तई वे एक ऐसी दुनिया बनाती है जो उन्हें बाकी सबसे अलग बनाता है और ये कवितायें एक सार्थकता देते हुए व्यापक फलक पर अपने होने को चरितार्थ करती है.

अच्छी बात यह है कि सोनल का पहला काव्य संग्रह अंतिका प्रकाशन, गाजियाबाद से आ रहा है जिसका ब्लर्ब हिन्दी के ख्यात कवि और वागर्थ के सम्पादक डा एकांत श्रीवास्तव ने लिखा है. इस संग्रह में कवितायें तीन भागों में नजर आती है - अन्तरंग, बहिर्रंग और जोरबा दी बुद्धा

स्वागत किया जाना चाहिए इस संग्रह का, उम्मीद करें कि यह संग्रह कविता के नए प्रतिमान स्थापित करके हिन्दी कविता को एक दिशा देगा.

1 comment:

Kavita Rawat said...

सोनल शर्मा का संकलन के बारे में सार्थक प्रस्तुति हेतु धन्यवाद!