Monday, March 28, 2011

एनजीओ पुराण भाग ग्यारह

एक वैज्ञानिक था, नौकरी से तंग आकार उसने समाजसेवा का काम ले लिया ठेके पर, इसके साथ साथ उसने हर जिले में कंप्यूटर की दुकाने भी खोली, बाद में वो बड़े ठेके लेने लगा, फिर उसने सबसे पिछड़े प्रदेश में विश्वविद्यालय खोला और बाद में तो विश्वविद्यालय की भी चैन खोल ली, इस तरह से वामपंथ की सीढ़ी से वो पूंजी की सीढ़ी पर चढ गया, आजकल देश का बिरला शिक्षाविद है वो.(इतिश्री एनजीओ पुराण भाग ग्यारह समाप्त)

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