Friday, February 12, 2016

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जिस देश में सरकार के कारण रोहित को मरना पड़े या या कन्हैया को गिरफ्तार होना पड़े उस देश में इससे ज्यादा शर्मनाक नहीं हो सकता. जिसने नारे लगाए उसे पकड़ना छोड़कर निर्दोष को पकड़ना सिर्फ कमजोरी दर्शाता है और हताशा.

अब समझ गए ना कि पढ़े लिखे छात्रों के खिलाफ कम पढ़े लिखे लोग किस स्तर पर उतरकर एक बड़ी संपत्ति पर कब्जा करना चाहते है और समूचे दलित आन्दोलन को कुचलना चाहते है.

कितना लाचार है सरकार का हताश तंत्र जिसका गृह मंत्री बाकी सारे महत्पूर्ण काम छोड़कर एक विवि में पीछे समय लगा रहा है. यह दम पाकिस्तान के सामने दिखाएँगे तो सच में छप्पन इंच का सीना दमकेगा....... कमजोर को दबाकर क्या दिखा रहे हो सरकार?

दम हो तो जाओ दाउद को लाओ, नवाज शरीफ से पंगा लो, दिल्ली में हार जाने का अपराध बोध, अरविन्द की लोकप्रियता से जल भुनकर इस हद तक आ गए कि एक गरीब घर के बच्चे को गिरफ्तार कर लिया वाह रे मर्दों............

दिल्ली पुलिस को इस्तेमाल करके अपनी छबि कब तक चमकाओगे जनाब.......?


देश की बेरोजगारी, भुखमरी, कुपोषण, गरीबी, महिला हिंसा से लड़ो........दम है तो शिक्षा में बदलाव लाओ......कब तक मुद्दों से भटककर उद्योगपतियों को मदद करते रहोगे, कब तक दलितों को कुचलने के कुत्सित प्रयास करते रहोगे?

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सन 1991-92 में आडवानी ने रथ यात्रा निकालकर मंडल आयोग की रिपोर्ट को कमजोर किया था और प्रमाणपत्र बांटे थे नागरिकता के, हमने तब भी आडवानी से नही माँगा था और आज रोहित की मौत के बाद ये अपनी हताशा और कुछ ना कर पाने की बेबसी को जेएनयू के बहाने समूचे दलित और वंचित आन्दोलन को कमजोर करना चाहते है, गांधी को कितनी बार मारोगे, पूरी दुनिया देख रही है, जो छबि तुमने बनाई थी विकास और गति की वह औंधे मुह पडी है आज गटर में, और यह भी कि दो साल के पहले ही कितना विध्वंस कर दिया देश का और हजार साल पीछे पत्थर युग में ले गए हो.......

गाली गलौज और बदतमीजी से यदि समस्याएं सुलझ सकती तो अमेरिका सिर्फ गालियों का ही आयात निर्यात करता, जब कहता हूँ कि कूढ मगज और अधकचरे दीनानाथ प्रदत्त इतिहास और संस्कृति ज्ञान की रट्टा मार परीक्षाएं पढ़कर आये ज्ञान से और एक विशेष कुंठित विचार धारा से पढ़कर आये शिक्षालयों के प्रोडक्ट ऐसे ही निकलेंगे तो समझ आता है कि इन मूर्खों से उलझने से कोई फ़ायदा नहीं है गदर्भाधिराज वही रहेंगे और इनकी देशभक्ति सिर्फ उलझने में है, तर्क इनके बस का नहीं क्योकि नागपुर की गैंग इन्हें यही सीखाती है बचपन से, लाठी से पीया तेल आखिर कब जोर मारेगा ?
तुम्हारे भ्रष्ट और हत्यारे सिपहसालार, तुम्हारे मुख्यमंत्री, बलात्कारी मंत्रियों की फौज, जुबान पर काबू खो चुके केबिनेट मंत्रीगण, तुम्हारे उद्योगपति, तुम्हारे नेताओं और मंत्रियों का व्यापमं के बहाने, नक्सलवाद के बहाने, जरुरी वस्तुओं, दवाईयों और पेट्रोल - डीजल के भाव बढाने का खेल या टैक्स चोरी का खेल अब समझ आ रहा है आम आदमी को - इसलिए तुम्हारी अपढ़ और लठैत ब्रिग्रेड की बौखलाहट और हताशा जाहिर है सामने आना ही थी.
कब तक तुम विश्वविद्यालयों को माखनलाल पत्रकारिता भोपाल में बिठाई चोकडी की तरह कब्जा करके हथियाते रहोगे, कब तक आम लोगों को जरुरी चीजों से महरूम रखोगे, कब तक अघोषित आपातकाल लगाकर कांग्रेस के साठ साला शासन को कोसकर समय माँगते रहोगे, अब तुम देश में फ्रांस से किसी बाप को बुला लो या ओबामा को, पाकिस्तान के नाम पर बरगालाओ या इशरत जहां को उसकी मौत के बाद बारह साल बाद भुनाओ, गांधी के गोडसे का जश्न मनाओ या सावरकर के गुण गाकर पटेल का स्तुप बनाओ - असलियत सब सामने है अब गुरु.........
असलियत सामने है और लोग तय करेंगे.....
भक्त, जाहिल और उज्जड लोग यह ना पढ़े और ना अपने दिमाग का कूड़ा मवाद यहाँ उन्डेले - वो स्वच्छ भारत की जागीर है वहाँ जाकर उल्टी करें......वरना कमेन्ट डिलीट कर दिया जाएगा..........

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Out Look 1 to 15 Feb 16 Thanks Akansha Pare 

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