Saturday, February 26, 2011

चिड़िया- एक


एक चिड़िया झांकती है

दरवाजे की देह से भीतर

और दीवारे झनझना जाती है

उसकी चहचहात से

चिड़िया कमरे की चौहद्दी से

नापती है दुनिया को

और चारो और गर्दन घुमाकर

उड़ जाती है फुर्र से

दुनिया की हदों से बेहतर है

उसका खुला उन्मुक्त आकाश

जहां आज भी हवा तक

निर्भय होकर विचरण करती है...

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