यह सब पढ़ना भी किसी कोठरी में क़ैद होने जैसा है पर इस सबके बाद भी यदि हम सब लोग थोड़ा-थोड़ा पानी किसी अहाते के पेड़ को डालना शुरू करें तो ... बहुत दुआएं उमर खालिद तुम्हारे लिए __________ "उमर की बात" •••••••••• 'जब सुप्रीम कोर्ट ने जमानत खारिज की तब से जेल पहले से अधिक भीड़ भरी और अराजक हो गई है जिसने तनहाई के लिए जंग को और तीखा बना दिया । कैद के दौरान , मैं संगीत, पढ़ने और जानवरों की देखभाल में सुकून पाता हूँ; ये छोटी-छोटी दिनचर्याएँ मुझमें उम्मीद और मानसिक मजबूती बनाए रखने में मदद करती हैं। इस बार अंतरिम जमानत के बाद जब मैं तिहाड़ लौटा तो वहाँ बहुत कुछ बदल चुका था। हमारे बैरक में लगभग पचास और बंदियों को रखा गया था, जबकि यह जगह पहले ही क्षमता से अधिक भर चुकी थी। इसका अर्थ यह हुआ कि पहले से भी कम सन्नाटा था। सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत खारिज किए जाने के बाद यह शांति की कमी और ज़्यादा खटकी। जब मैं अभी भी फैसले के बाद मीडिया के तूफ़ान से उबरने की कोशिश कर रहा था, तो अब टीवी समाचार और अखबारों पर लगातार रिपोर्टिंग के कारण मुझे पहचानने वालों की संख्या भी बढ़ गई थी । अब हर कोई क...
एक युवा साथी से बात हो रही थी अभी - जो सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहे हैं और काफी समझदार हैं, समझदार से आशय सिर्फ व्यवहारिक समझदारी से नहीं - परंतु पढ़ाई और अकादमिक समझ से भी है उस मित्र ने पूछा कि - "सर आप इतना रोज घूमते हो, 60 साल की उम्र होने को आई है तो रोज बदलती हुई दुनिया कैसे नजर आती है" मैंने जवाब दिया - "दुनिया में अच्छे लोग ज्यादा हैं, दुनिया गोल है और हम सब एक दूसरे से जुड़े हुए हैं और मेरी यह बात रोज पुख्ता होती है - जब तुम जैसे प्यारे लोग मिलते हैं अच्छी बातें होती है और बहुत प्यार - सम्मान मिलता है, कोशिश करता हूँ कि वही लोगों को लौटा सकूं - तभी यह दुनिया हम तुम जैसे अच्छे लोगों को देकर एक दिन विदा हो जाएंगे" #कुछ_रंग_प्यार_के *** तमाम पुस्तक मेलों, चर्चाओं, गोष्ठियों, कार्यशालाओं और वैचारिक मंथनों के बाद, हिंदी विभागों से बंटने वाली पीएचडी की डिग्रियों बाद पढ़ने वाली एक पूरी कौम खत्म हो गई, लिखने वाली नई कौम पैदा हुई है - जो नई हिंदी या फ़ड़तूस किस्म का लेखन करके जबरन का बौद्धिक आतंक पैदा कर रही है और आत्म मुग्ध होकर अपना कूड़ा बेच रही है, इनका ना साहि...