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Jeevantika Arpit and Sakshi's Story, visit to Badnagar on 27 April 2022 - Post of 9 May 2022

  || कैसे आसमा में सुराख हो सकता नही || ◆◆◆ जोधपुर और दिल्ली आईआईटी के दो होनहार गोल्ड मेडलिस्ट, पढ़ाई के तुरंत बाद नौकरी की, दुनिया घूमें, उत्तरी अमेरिका भी रहें और भारत भर भी, बाद में मप्र के बडनगर जैसे छोटे से ब्लाक में आकर बस गए, कारण था यहाँ की जमीन और खुशनुमा वातावरण –पढाई के दौरान अर्पित का दोस्त यहाँ से था और उसके माता - पिता यहाँ रहते है, बस और कोई कारण नहीं - ना कोई रिश्तेदार, ना ही दोस्त - बस एक परिवार, चार साल पहले यहाँ आये और यही के हो गए, साक्षी बताती है कि आठ साल पहले वह लुन्याखेड़ी आई थी - कबीर जयंती, पर तब ही से मालवा की मिटटी की सौंधी महक हमेशा उसके जेहन में बनी रहती थी, अर्पित से बात हुई जो बाद में एक - दूसरे के हो लिए हमेशा हमेशा के लिए... इस तरह से जमीन और वातावरण में रहकर सिर्फ अपना उगाया हुआ खाने की शुरुवात हुई ••• अर्पित और साक्षी ने बडनगर में साढ़े तीन बीघा का एक टुकडा खरीदा और पहले दो साल जमीन को जैविक बनाया, बहुत मेहनत लगी क्योकि जमीन रासायनिक खाद से इतनी परिपूर्ण थी कि इलाज मुश्किल था, इस दौरान दोनों ने कुछ पेड़ लगाए और पिछले हिस्से में एक तालाब बनाया - ताकि...

Kuchh Rang Pyar Ke - Post of 8 May 2022

  "Good Fences Make Good Neighbors " "Mending Wall" by E M Forster हम लोग 1970 से पड़ोसी रहें पहले हमारे माँ - बाप संग साथ रहें, जो सुख दुख आपस में बांट लेते थे, सब्जी और दही का जमावन मांग लेते बेशर्मी से या अपने रिश्तेदारों से ज्यादा सगापन भी होता था उनमें, देर रात तक ओटले पर गप्पे होती, निजता जैसा कुछ था ही नही, सब पंचायती होता था जमाई ढूंढना हो या दस्त का इलाज फिर हमारी पीढ़ी जो हाल चाल पूछ लेती थी, कभी सायकिल मांग ली, कभी अस्पताल ले जाने के लिए मदद या बाहर जाते समय घर की चाभी सौंपकर चले गए शादी ब्याह में और अब तीसरी पीढ़ी जो संग- साथ पढ़ी लिखी और बड़ी हुई और नौकरी के लिए बड़े शहरों में चली गई खूब महंगी पढ़ाई करके और ये पीढ़ी अब वायवीय रूप से जुड़ी है आपस में पर अब सम्बन्ध नही रहें - पड़ोसी कब आते है दिल्ली - मुम्बई - बेंगलोर - पूना या अमेरिका से और कब चले जाते हैं, मालूम नही पड़ता, हम भी नही बताते कि दो माह के लिए जर्मनी जा रहें या गुड़गांव , बेटे को बिटिया हुई या नई कार खरीदी हमने मुम्बई में या फ्लैट बुक करके शिफ्ट हो गए मुम्बई में - अपनी कार में सन्न से निकल जाते है हम...

Kuchh Rang Pyar ke - Post of 6 May 2022

  ● ज़िन्दगी आगे बढ़ती हुई जो ख़ाली जगह छोड़ती जाती थी, उसमें गुज़री हुई घटनाएँ अपना घर बनाती जाती थीं…क्या एक उम्र के बाद आदमी जीता एक तरफ़ है और जागता दूसरी तरफ़? जब सचमुच जागता है, तब पता चलता है, जीने का अर्थ पता नहीं कहाँ रास्ते में छूट गया…क्या यह सबके साथ होता है…या सिर्फ़ मेरे साथ हो रहा है? ● वो [ज्ञान] जब आता है, तो बहुत देर हो चुकी होती है - निर्मल वर्मा (अंतिम अरण्य) इन दिनों फिर से पढ़ रहा हूँ "अंतिम अरण्य", और नए अर्थ खुल रहें हैं - जीवन, रिश्तों और समझ के , कम से कम दस बार तो पढ़ चुका था पर होता है ना, जब आप किसी पात्र से एकाकार हो जाये, जीवन की गति मन्दसप्तक से होते हुए धैवत और पता नही कहाँ - कहाँ चली जाए तो लगता है सब छोड़कर, सारे तनाव भूलकर अपने - आप से समानुभूति रखनी चाहिये - अपने आप के उस किरदार से जो आपको लगातार कचोटता है, धिक्कारता है, सतर्क करता है, पुचकारता है, आपको अपराध बोध में रखकर शोशेबाज बनाता है, सवाल पूछता है, भय दिखाता है और बार - बार एहसास दिलाता है कि सब त्याग दो, मुक्त हो जाओ और निकल पड़ो - बगैर डरे हुए उस मार्ग पर जो अंततः अनिवार्यतः आएगा ही एक न...

Kuchh Rang Pyar ke, Drisht Kavi - Posts of 3 May 2022

  || ईद की दिली मुबारकबाद || ••• और आख़िर चाँद दिख ही गया, ख़ुशी हुई इस बार पूरे माह रमज़ान के रोजों ने तड़फा दिया था, रोज शाम होते ही रोज़ा छूटने का इंतज़ार रहता कि अब सब लोग पानी पी सकेंगे, इफ्तारी करेंगे - दिन भर की चिलचिलाती धूप, गर्मी, पानी और बिजली की दिक्क़तें इस सबके बीच कड़क रोज़े और रोजेदारों का धैर्य एक कड़ी तपस्या ही है और हर साल यह परीक्षा कड़ी होते जा रही है जैसे जैसे धरती का तापमान बढ़ रहा है, पूरे माह अपनी कक्षा के मित्रों को, प्राध्यापकों को, मित्रों को, बचपन के दोस्तों को, काम से जुड़े और प्रोफेशनल रिश्तों से जुड़े मित्रों को फोन लगाकर ख़ैर खबर लेता था कि सब भालो ना बहरहाल, एक पाक माह गुजर गया और अपने पीछे लाखों किस्से छोड़ गया, देश दुनिया ने इतना कुछ देख समझ लिया और भुगत लिया कि कहना मुश्किल है, यूक्रेन - रूस युद्ध से लेकर खरगोन और दिल्ली के प्रायोजित दंगों ने मन खट्टा कर दिया था, दुर्भाग्य देखिये कि खरगोन में कल ईद बंदूक और कर्फ़्यू के साये में मनेगी , कैसा दहशतज़दा और मनहूस समय हमने बना दिया है ख़ैर, ईद की दिली मुबारकबाद सबको और बधाईयां भी - दिल के दाग़ धो - पोछकर ईद मनाये, ख़ुश रह...

Khari Khari, Kuchh Rang Pyar ke and posts from 26 April to 1 May 2022

  || दुनिया के फेसबुक लेखकों को एक हो जाओ || अपुन लोग्स फिरी में ससुरे जुकेरवा कूँ कंटेंट देता है, भक्तों से लड़ाई करके वकिल्स और पुलिस को रोज़गार, साहित्य से जुड़े फोकटिये सम्पादकों को काम, निठल्ले प्रकाशकों को आजीविका और मीडिया को सुरसुरी वाला मसाला, साला कवियों और कवयित्रियों को फोकट में झेलो - मल्लब क्या क्या ना सहें हमने सितम इस लाईक - कमेंट की खातिर और अपुन को मिलता क्या है - बाबाजी का ठुल्लू तो बोलो मजदूर दिवस ज़िंदाबाद 1 मई ज़िंदाबाद दुनिया के फेसबुकियों - एक हो जाओ [नया वाला संगठित और नेट दीक्षित मजदूर] #कुछ_रंग_प्यार_के #मई_दिवस *** DrGarima Sanjay Dubey बहन ने बड़ी मार्के की बात कही आज "हर आदमी एक चलता - फिरता ब्लड बैंक है और यदि आपका खून किसी जरूरतमंद के शरीर में नही दौड़ रहा हैं तो आपका खून किसी काम का नही है", Sapna Shiwale Solanki जी ने भी यह प्रतिपादित किया कि "सच्ची ख़ुशी जरूरतमंद को खून देकर ही प्राप्त की जा सकती है क्योंकि खुशियाँ बाज़ार में नही मिल सकती, आप अमेज़ॉन या स्विगी से सब आर्डर कर सकते है पर खुशियाँ नही" मित्रों, ये बीज वक्तव्य थे - परन्तु बहुत...

Khari Khari and other Posts from 24 to 25 April 2022

|| ट्वीटर का असाधारण राजपत्र में जनसाधारण के लिए नोटिस || ••••• नए भाव - सभी राशि भारतीय मुद्रा मतलब ₹ में है, तत्काल प्रभाव से लागू ◆ सिर्फ फैशन के लिए बने रहने वाले 1000/- प्रतिवर्ष ◆ हर तीन माह में ट्वीट करने वाले 2000/- प्रतिवर्ष ◆ हर माह ट्वीट करने वाले 3000/- प्रतिवर्ष ◆ हर हफ्ते करने वाले 4000/- प्रतिवर्ष ◆ दिन में एक बार करने वाले 5000/- प्रतिवर्ष ◆ दिन में पाँच से दस ट्वीट 7000/- प्रतिवर्ष ◆ प्रधान मंत्री से लेकर बाकी पदों पर आसीन को टैग करते हुए ट्वीट करने वाले 10000/- प्रतिवर्ष ◆ और सबसे आखिरी में "ब्ल्यू टिक" वालों के लिए 50000/- प्रतिवर्ष ( बहुत इज्जत कमा ली इन्होंने ब्ल्यू टिक के नाम पर ससुरों ने ) ◆ बॉलीवुड और बाकी फर्जी डिग्निटीज़ के लिए एक लाख रूपये ◆ फेक आईडी वालों को पाँच लाख प्रतिवर्ष अन्यथा पहचान सामने आज ही कर दी जाएगी ◆ सभी अधिकारी, संविधानिक पदों और कम्पनीज़ के सीईओ को पचास लाख रुपये प्रतिवर्ष देना होंगे हर आम और खास को सूचित किया जाता है कि ट्वीटर अब समाज सेवी एप नही और ना ही आपकी समस्याओं से लेना देना है - हम धँधा करने आये है भाँड़ में जाओ आप और आपके ...

Khari Khari, Drisht Kavi and other Posts of 22 and 23 April2022 [Pankaj Chaturvedi]

पंकज चतुर्वेदी हिंदी के कवि है प्राध्यापक है पहले सागर में थे और अब कानपुर में गहन - गम्भीर अध्येता है और नया रचते रहते है लगातार, पिछले दिनों उन्होंने बनारस के मंदिर में विजिट किया तो किसी ने चंदन लगा दिया, हिंदी में हल्ला शुरू हो गया कि हमें डराया जा रहा है, वामपंथी चंदन कैसे लगा रहें है आदि आदि, ट्रोलबाज सक्रिय हो गए असल में व्यर्थ की बहस खड़ी की है - चंदन से लोग डरने लगे, टोपियों से डरने लगे तो हो गया कल्याण फिर, और जिस तरह से यह ट्रोलबाजी है वह बेहद निम्न स्तर की है याद आता है राज्य संसाधन केंद्र, इंदौर के हमारे नए भवन का उदघाटन था 2004 में और मैंने उदघाटन के लिए श्रीमती कमल एवं चंद्रकांत देवताले जी को अतिथि के रूप में बुलाया था, अचानक आयोजको में से एक निदेशक, श्रीमती अंजली अग्रवाल ने उन्हें कहा कि आप जोड़े से पूजा करिये, पूरी पूजा हुई विधि विधान से और बाद में जब मैने देवताले जी को खाने के समय छेड़ा कि "कहिये पंडित देवताले कैसे है" तो वे आदत अनुसार मेरे कान में फुसफुसाकर बोले "साला, आज मुक्तिबोध भी फंस जाते तो आरती उतारना पड़ती उन्हें भी सपत्नीक" पिछले दो तीन वर्ष...