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Khari Khari, Man Ko Chithti and other Posts from 24 to 25 Oct 2026

कांग्रेस का जब जब कुर्सी के पास जाने का समय आता है कोई ना कोई कांग्रेसी ही सत्यानाश कर देता है
• दिग्विजय सिंह - सद्दाम हुसैन जी
• मणिशंकर - नीच
और अब
• खड़गे - मोदी का बाप जायेगा
क्या करें राहुल और प्रियंका , और भाजपा यह सब चुनाव में भुनाने के लिए विशेषज्ञ है ही, भुगतो अब ; वैसे लोकतंत्र में यह भाषा मोदी, अमित शाह से लेकर योगी, मनोज तिवारी, निशिकांत दुबे आदि लगातार बोल रहे है, पर कांग्रेस ने बोला तो गलत हो गया
फेल प्रोडक्ट तो असल में नरेंद्र मोदी है, पर कल बोला राहुल को और यह बात किससे पूछनी चाहिए - यह लिखने की आवश्यकता नहीं है पूरे देश को पता है कि कौन फेल है और कब से है
बहरहाल, भाषा की शुचिता अभी और गिरेगी चुनाव आने दीजिए जरा
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सिर्फ पंद्रह पैसे का था - ना डाटा चोरी का डर - ना गोपनीयता भंग होने का खौफ़ और बहुतायत में उपलब्ध और सहज - सरल मार्ग से पहुंच भी जाता था हर तरफ और हर जगह
कितनी ही कहानियां, खून के आँसू लिखे गए इस पर और अनगिनत किस्से जो कभी पूरे हुए और कभी नहीं पर किसी ने साथ नहीं छोड़ा ना शिकायत की, आखिरी में एक बिंदु तक भर - भरकर लिखा गया इस पर, सब खत्म हो गया
जीवन बदलता है, हम सहज और सरल चीज़ों को जटिल बनाने में ज्यादा रूचि लेते है और इस तरह से धीरे - धीरे एक युग छोड़ देते है आहिस्ते से और उन सभी स्मृतियों को ऐसी कब्रगाह में दफना आते है जहाँ से ना उम्मीद लौटती है और ना ही कोई रश्मि किरण
मृत्यु तो सबको आनी ही है पर यदि कोई किसी दबाव में आकर कुछ कर लें या खत्म कर दें अपने को तो किसे दोष दिया जायें
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एकदम सही - सही सन याद नहीं पर शायद 1996-98 के दौरान की बात होगी, मैं पचमढ़ी में था और राज्यपाल भवन में रुका और राज्य की SCERT के लिए हिंदी - अंग्रेजी की पुस्तके लिख और एक टीम के साथ संपादन कर रहा था तब एक दिन निर्मल जी दिखाई दिए और वे बेहद सहजता से मिलें, उन्होंने कुछ हिस्से अपने लिखे जा रहें उपन्यास के पढ़े और पूछा कि - "क्या ये समझ आ रही है हिंदी बहुत क्लिष्ट तो नहीं"
संभवतः वो 'अंतिम अरण्य' ही था, क्योंकि बाद में जब उपन्यास पढ़ा तो वो संवाद याद आयें, उस दिन मैदान में धूप में लेटे हुए निर्मल जी की कृशकाय देह, चेहरे की झुर्रियां, खादी का कुर्ता, सिर पर डाला एक गमछा, झोला, पानी की बोतल, एक डायरी, एक बड़ा सा रजिस्टर, पेन और चेहरे पर धूप की चमक अप्रतिम थी और बहुत मुलायम से हाथ जिनको मिलाते हुए वे बेहद आत्मीय नजर आए, देर तक बात करते रहें और देवास शहर की पूछताछ की थी
निर्मल जी आज भी मेरे प्रिय लेखकों की श्रेणी में है और "अंतिम अरण्य" तो मेरे लिए गीता समान है, उसमें जीवन की दिशा मिलती है, लगभग उनका लिखा सारा है मेरे पास
"वो (ज्ञान ) जब आता है तो बहुत देर हो चुकी होती है"
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निर्मल वर्मा की याद
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देवास से लगे हुए ग्राम चंदाना - बिंजाना में शराब से तेरह लोगों की मृत्यु हो गई, जीतू पटवारी कह रहें है बाईस मौतें हुई है, शहर में रिपोर्ट नहीं हुई कही पर निश्चित रूप से कोई ना कोई तो प्रभावित हुआ होगा ही
भाजपा के संरक्षण में शराब और नशीली दवाओं का कारोबार कई माह, बल्कि वर्षों से शहर में चल रहा है, सड़कों से लेकर गली मोहल्लों में खुले आम शराब, पाउडर, और गांजा - भाँग बिक रही है और इन सबको जन प्रतिनिधियों का खुला संरक्षण है, सांसद - देवास ने बीच में खुलेआम कलेक्टर को चेतावनी दी थी कि इस पर रोक लगाएं और यह पवित्र कार्य थोड़े दिन बंद रहा और अब फिर से धड़ल्ले से शराब बिक रहीं है नतीजा सामने है कि तेरह से ज्यादा मौतें हो चुकी है
मेरी कॉलोनी में ही शराब के ठेके पर शाम होते ही भीड़ लग जाती है और आसपास बैठकर लोग पीते है, पीने में कोई बुराई नहीं - कौन मेरे रुपए से पी रहें, पर सड़क पर बैठकर खुलेआम पीना और किसी का कोई नियंत्रण नहीं, सब्जी - भाजी और फल वालों को हटाने नगर निगम का गेंग आ जाता है रोज शाम, पर पुलिस या प्रशासन को कोई चिंता नहीं होती कि यह नेशनल हाईवे है और इसी कॉलोनी में सबसे ज्यादा निजी अस्पताल है, परिवार रहते है, आए दिन हुड़दंग, झगड़े होते रहते है पर किसी को कोई चिंता नहीं शराबी लोग खुले आम ओपन स्पेस में बैठकर पीते है और जाम लगा देते है अक्सर
शराब माफिया इतने ताकतवर है कि ना एसपी कुछ कर पा रहे और ना कलेक्टर - बस श्रीराम का नाम लो और चीयर्स बोलो - क्योंकि शहर में मांस - मदिरा से लेकर तमाम अवैध धंधों को चार दशकों से संरक्षण प्राप्त है तो कोई क्या ही करेगा
चम्मचों से देश परेशान है, सब चंदे की गंगा में नहाकर निकलते है और पुण्यवान हो जाते है मराठी में कहावत है - "पदरी पड़ले आणीक पवित्र झाले", अता प्रश्न हा आहे की हा पदर कुणाचा
मप्र में मोहन यादव सरकार ने सागर, देवास से लेकर पूरे प्रदेश को शराब और ड्रग्स से Vulnerable बना दिया है, धार्मिक शहरों में ही शराब का कारोबार फल-फुल था है और इस गोरख धंधे में सब शामिल है
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जिन लोगों के बाप - माँ ने कांग्रेस के जमाने में तलूए चाटकर नौकरी हासिल की, जिंदगी भर एक ही शहर और स्कूल या दफ्तर में डटे रहें, जिनकी ढक्कन अर्थात विशुद्ध मूर्ख लड़कियों की पढ़ाई कांग्रेस जमाने में हुई, शादियाँ हुई, अपने जमाई को नौकरी लगवाई और शहर में बुलाकर घर जमाई बना लिया और कभी फिर ट्रांसफर नहीं होने दिया, तमाम नैतिक - अनैतिक काम करके जीवन भर सुविधाएं भकोसते रहे - वे लोग कांग्रेस को गाली देकर भाजपा के पिठ्ठू बन रहें है, सिर्फ इसलिए कि अब इनको अपनी औलादें सेट करनी है, अदालतों में पड़े मुकदमों से निपटना है, अवैध जमीन,प्लॉट, खेती - जिस पर कब्जा कर रखा है उसको लीगल करवाना है, बीबी की मार - पिटाई वाले रिपोर्ट्स हटवाना है और तमाम वो काम करवाने है - जिन्हें अवैध या अश्लील कहा जाता है
धन्य है ऐसे लोग और दुर्भाग्य से ये वो पढ़े - लिखें मूर्ख है जो जीवन भर दुख या गरीबी क्या होती है - इन्हें मालूम नहीं और सिर्फ कांग्रेस, गली मुहल्ले के कुत्तों की थूथन चाटकर, स्थानीय कांग्रेसी नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों को भयानक रिश्वत देकर बचते रहे - वे आज अवसर परस्त होकर मूर्खतापूर्ण बात कर रहे है
और कह रहे कि मेरे इतने फॉलोअर्स है , लाइक करें, कमेंट्स करें - फेसबुक के फ़ॉलोअर्स होने से कुछ नहीं होता और इनकी घटिया चीजें पढ़ता कौन है और अब चूके हुए चौहानों का कोई भविष्य नहीं, अपने घर - परिवारों में नितांत अकेले पड़ गए और एकाकी जीवन बीता रहे इन लोगों को सड़ - सड़कर ही मरना है , कुत्ते भी नहीं रोएंगे यह भी सच है, दो कौड़ी की चापलूसी वाली नौकरी करके और तमाम जगहों पर गबन, भ्रष्टाचार करके जीवन बीताया और अब ब्रह्मज्ञान दे रहे है
रोना नहीं, हंसी आती है इन तुच्छ लोगों पर - जो इंसान तो क्या एक कोशीय अमीबा होना भी डिजर्व नहीं करते
खैर

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