"पूस की रात" जैसी प्रसिद्ध कहानी प्रेमचंद ने सागर जिले के देवरी गांव में बैठकर पूस की रात को महसूस करते हुए लिखी थी, प्रेमचंद की बेटी और दामाद वहां रहते थे और सागर उनका आना - जाना लगा रहता था मुझे आज यह मालूम पड़ा - देवास में आयोजित परसाई जन्मशती के एक कार्यक्रम में, क्या आपको यह बात मालूम थी मेरी आधी अधूरी जानकारी यह भी है कि गुनाहो के देवता की नायिका सुधा भी शायद सागर विवि के अंग्रेजी विभाग में पढ़ाती थी, यह बात धर्मवीर भारती ने किसी से कही थी एक निजी बातचीत में, मित्र इसे दुरुस्त करें *** राहुल नहीं वो आंधी है देश का आधुनिक गांधी है ________ अभी एक वीडियो देखा जिसमें युवा कह रहे है कि मोदी राहुल से तीस मिनट डिबेट कर लें तो हम पुनः मोदी को वोट देंगे मोदी में एक वाक्य मन से बोलने की हिम्मत नहीं, मीडिया के गली मुहल्ले वाले टुच्चे पत्रकार से बात करने की हिम्मत नहीं, जिस मीडिया को पंद्रह वर्षों तक दूध पिलाया वह तो सांप ही निकली पर सोशल मीडिया को तमाम कोशिशों और कानूनी दांव पेंच में दबाने के बाद भी गालियां सुनना पड़ रही है यह कम है क्या, ना दलित साथ है - ना बामन, बनिये या ठाकुर ...
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