नरोत्तम, कैलाश, नरेंद्र युग की मप्र में समाप्ति __________ नरोत्तम मिश्रा प्रकरण यह दर्शाता है कि एक दिन भाजपा के लोग आपस में ही लड़ भिड़कर अपना सर्वनाश कर लेंगे और यह पार्टी खत्म हो जाएगी, इंतजार कीजिए धर्म, यज्ञ, अनुष्ठान, मंदिर, कालीचरण जैसे बलात्कारी साधुओं के साथ मिलकर करोड़ों रूपये खर्च करके दतिया में जो ढांचे मिश्रा जी ने खड़े किए गए - उन्होंने भी कोई मदद नहीं की,याद रखिए मंदिर - मस्जिद और धर्म अलग है और राजनीति अलग,भाजपा का आलाकमान यह अच्छे से समझता है असल में खतरा भाजपा को कैलाश विजयवर्गीय, नरोत्तम मिश्रा, नरेन्द्र तोमर जैसे लोगों से है - जो येन केन प्रकार से मप्र की सत्ता हासिल कर शीर्ष पर बैठना चाहते है, अठारह वर्ष शिवराज सिंह चौहान ने किसी को आगे नहीं आने दिया - उमा भारती, बाबूलाल गौर, राघव जी, लक्ष्मीकांत शर्मा, नरोत्तम मिश्रा, नरेंद्र तोमर, कैलाश गौड, स्व लक्ष्मण गौड से लेकर कितने ही लोगों ने कोशिश कर ली कि वे मप्र के सिरमौर बने पर कुटिलता में माहिर शिवराज ने व्यापमं जैसा कांड करने के बाद और अवैध खनिज से लेकर नर्मदा से रेत खनन, नर्मदा किनारे फर्जी वृक्षारोपण और लगातार कई ...
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