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Man Ko Chithti, Khari Khari and Amey Kant's Book Posts from 22 to 24 April 2026

भारतीय शादियों में क्या बदला - एक विहंगावलोकन _______ 1 - शादी के नाम कर संस्कार नहीं - बस दिखावा और इवेंट हो रहे हैं, सेलिब्रिटी और नेता के आने पर जो गदर हो रहा है वह शोचनीय है, उनके साथ सेल्फी का अजब तमाशा चलता है 2 - मेहमानों को आने के पहले सोचना पड़ता है कि मेहंदी, हल्दी, महिला संगीत, वर या वधू निकासी के समय के कपड़े, शादी के समय कपड़े, पार्टी के कपड़े, फेरों के समय के कपड़े, आवागमन के लिए महंगी गाड़ियां, परफ्यूम से लेकर जेवर आदि की आवश्यकता - क्या सारे रिश्तेदार इतने सक्षम है 3 - परिवार के बड़े और बूढ़े लोगों की उपेक्षा कर यार - दोस्त और कार्यालयीन स्टाफ की ओर ज्यादा ध्यान दिया जाता है 4 - बारात में कान फ़ोड़ू डीजे से लेकर भयानक कर्कश ढोल और ताशे से लेकर बाकी सबका भौंडा प्रदर्शन 5 - सड़क पर देर तक नाच - गाना और आसपास के लोगों को, राहगीरों को त्रस्त कर देने की हद तक का जाम लगवाना और यह भूल जाना कि आसपास अस्पताल, मरीज, बूढ़े, बच्चे, परीक्षाएं या कोई अन्य संकट हो सकते है, एंबुलेंस भी निकल नहीं पाती, पूरी पूरी रात अश्लील गानों पर नाचना - क्या सभ्यता हो गई है हमारी 6 - भोज में न्यूनतम सौ...
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Drisht Kavi , Man Ko Chiththi and other Posts from 14 to 21 April 26

हिंदी में कवियों का एक गैंग है - जो हर शहर और हर जगह पर सक्रिय रहता है, फिर वो पुरस्कार समारोह हो, दलित आयोजन हो, बुद्ध पूर्णिमा हो, दीवाली हो, होली या राम नवमी, और ये सब ससुरे इतने सुसंगठित है कि एक - दूसरे के बिना मंच पर इनकी ना कविता उतरती है - ना रात को दारू और ना अगले दिन की सुबह वाली इनमें सत्तर पार से लेकर गेहूँ की बाली या कच्चे चने के जैसे ताजे कमसिन और अमीबा जैसे परजीवी से लेकर लोमड़ी - सियार जैसे धूर्त एवं घाघ एक साथ मौजूद रहते है, और हिंदी का कमजोर अंग्रेजी वाला पीएचडी शोधार्थी ना हो तो चखने के समय ककड़ी कौन छिलेगा या गुरुजी के पोतडे और टट्टी पेशाब के लंगोट कौन धोएगा साले रोना रोयेंगे दलित, एलीट और सवर्ण का - पर यात्रा हवाई ही होना ही चाहिए, एयरपोर्ट पर अंग्रेजी पढ़ना ना आएं भले और इनकी महफिलें और साजो - सामान, लगेज ही देख लो, चमक - दमक देख लो, दूर दराज तक के कार्यक्रमों के स्थान देख लो - तो समझ आता है कि देश के किसी भी कोने में ये मुंह मारने को शुकर देव की तरह तैयार रहते है और मजेदार यह है कि संचालक एक ही रिपीट होता रहता है जो जुगाड़ से किसी सरकारी कालेज में माड़साब बन गया...

Khari Khari, Harsh, Drisht Kavi, Asha Bhosle's Sad Demise, and Other Posts from 8 to 13 April 2026

You have to choose your own battles, and the right place to conquer Be careful while choosing the both, because we have limited time and energy *** दिन उदासियां की स्मृतियों से गुजरता है और रातें भविष्य की कोख में जन्म लेने के स्वप्न देखते विदा हो रही है, तुमसे बात करने की सदिच्छा में भोर होती है और दिन चढ़ने तक स्मृति पटल से सब मिट जाता है, इन यात्राओं के साथ भौतिक यात्राओं पर भी प्रतिबंध लगा सकूं तो सुकून की छांह में यह अर्थहीनता कुछ कम हो, जीवन अनिश्चितताओं में इस उम्मीद पर हर पल बीतता है कि "यह भी गुजर जायेगा, सकारात्मक बने रहो" - पर ना ये सब गुजरता है और ना जीवन का अंत करीब नज़र आता है और इस सबके बीच व्योम में टंगी आत्मा का बोझ शरीर के मानस पर दिनों-दिन बढ़ते ही जा रहा है इधर कबीट (कैथा)की खुश्बू, जंगली इमली, महुआ, तेंदू की नर्म पत्तियाँ, जामुन के कच्चे फल, आम की कच्ची छोटी गुठलियां, खिरनी का पीलापन, इमली की खटास, करौंदे की खटास, चारोली यानी अचार की मिठास और कच्चा हरापन और देर रात तक ठंडी हवा में सुबह के शुक्र तारे के सपने बेचैन कर रहें है, लगता है अरुण दाते की आवाज में ...

Khari Khari, Drisht Kavi and Adnan Darvesh's Poem and my Comment - Posts of 7 April 2026

  आखिर वही हुआ जिसका अंदेशा था, चलो देर आए दुरुस्त आए, असल में दुनिया के सारे ट्रंप बेहद लीचड़, कमजोर, और धूर्त है - जिनमें दो कौड़ी की अक्ल नहीं है, वे सिर्फ बकलोल है और शेखीबाज है जो लोग अपने लोगों और अपने देश को साथ नहीं रख सकते, या अपने लोगों के विकास की बात नहीं कर सकते - वे इसके अलावा कुछ और नहीं कर सकते, विशुद्ध रूप से ये सब कायर और डरपोक है और अमेरिकी ट्रंप ने यह कल रात सिद्ध कर दिया और यह भी कि वो पूरा मानसिक रोगी है - बोले तो गंभीर mental, neurotic, depression and anxiety का शिकार है हमारी मीडिया और मीडिया के दलालों को अब मसाला मिलना बंद होगा, पर कोई ना - अब चुनावों की घटिया रिपोर्टिंग चालू होगी - ताकि इन असुरों के नाखून पैने होते रहें और ये बर्बादी के कगार पर हम सबको ले जाएं #खरी_खरी *** अदनान कफील की यह कविता इन दिनों सोशल मीडिया पर घूम रही है, बगैर किसी पूर्वाग्रह के एक पाठकीय टिप्पणी कर रहा हूँ, इस कविता को कई बार पढ़ा और आज जब इसे दोबारा पढ़ा तो भयानक बारीकी से बुनी हुई लगी ईश्वर अगर तू है तो (संशय) और खुदा के होने पर यकीन है थोड़ी ज्यादा बारीकी से बुनी है, यह इसलिए ...