माननीय सुप्रीम कोर्ट आज SIR को वैध कर देगा किस्सा खत्म, कल्लो आपको जो करना है, उखाड़ लो - जो उखाड़ना है, इत्ते पढ़े लिखें और वरिष्ठ अधिकारी ज्ञानेश बाबू क्या गलत करेंगे, क्या बो देस पीरेमी नई है, और पद पर बने रैने के लिए सरकार का थोड़ा सा काम कर दिया तो क्या गलत किया और फेर की फर्क पैंदा पाजी, तुसी नाराज मत हो यारा और सुन लो, अब नागरिक होने की पहचान केचुआ ही करेगा, जिसका नाम SIR में ज्ञानेश सर ने नहीं लिखा - वे देश छोड़कर चले जाएं, हाँ नई तो महंगाई बढ़ रही इनकी वजह से सबको राज्यसभा अच्छी लगती है - इसलिए सर्फ एक्सेल वाले दाग़ अच्छे है #खरी_खरी *** गणित, भाषा, विज्ञान, नागरिक शास्त्र, इतिहास, कला, संगीत, वाद्य, व्यवहार, नैतिकता, मूल्य बोध, और वो सब सीखता रहा - जो जीवन चलाने के कौशल और दक्षताओं में शामिल था, इन्हीं का इस्तेमाल करके आवश्यकता अनुसार अकिंचित सी लक्ष्मी कमाई और बाद में शिक्षक की भूमिका में भी रहा लंबे समय तक, अपने चालीस वर्षीय व्यवसायिक जीवन में पंद्रह वर्ष स्कूल, निजी कॉलेज, फिर दो - तीन स्कूल्स में प्राचार्य भी रहा और बच्चों को युवाओं को विज्ञान, अंग्रेजी सीखाई, सामाजिक क्षेत्र ...
Khari Khari, Man Ko Chiththi, Sapne V/S Everyone and Why Marriage is Important and other Posts from 21 to 25 May 2026
संसार में, देश में, प्रदेश में, जिले में, शहर में, यहाँ तक कि आसपास के मोहल्लों में भी इतने आयोजन होते रहते हैं कि यदि हर जगह शामिल होना चाहें, तो एक जीवन भी कम पड़ जाए, आजकल मैंने लगभग सभी प्रकार के आयोजनों में शिरकत करना बंद कर दिया है - इसके मुख्य रूप से दो-तीन कारण हैं पहला, साहित्य, लेखन और पठन-पाठन से विश्वास उठता जा रहा है, क्योंकि आजकल के अधिकांश साहित्यकार — और कई पुराने लोग भी — केवल आत्ममुग्धता में डूबे दिखाई देते हैं, वे अपनी ही प्रशंसा में लगे रहते हैं, अपने परिचितों की किताबों, कविताओं और कहानियों की चर्चा करते हैं, जबकि बाकी दुनिया जाए भाड़ में — जैसी मानसिकता हावी है दूसरा, ये लोग जरूरी सामाजिक और मानवीय मुद्दों को छोड़कर ऐसी मूर्खतापूर्ण बातों में उलझे रहते हैं, जिनका वास्तविक जीवन से कोई लेना-देना नहीं होता तीसरा, अधिकांश लोग भयानक किस्म के नेपोटिज़्म में व्यस्त हैं और उसी को बढ़ावा दे रहे हैं, इसलिए अब इन लोगों से बात करने या बहस करने का भी कोई अर्थ नहीं बचा है पहले किताबों और पत्रिकाओं के प्रति बहुत श्रद्धा थी, पुरानी खरीदी हुई किताबें और पत्रिकाएँ आज भी सहेजकर रखी ...