सबसे ज्यादा सतर्क, चौकन्ना और सावधान रहने की जरूरत अपने और बेहद निजी लोगों से है - क्योंकि यही वे लोग है जो आपका क, ख, ग और घ जानते है और समय आने पर आपको पलटकर डूबो देंगे, यही वे लोग साबित होंगे - जो आपको जीवन में सबसे ज्यादा चुनौती भी देंगे और आपकी बाजी भी पलटेंगे, ये ही वो लोग है - जो आपका विश्वास जीतकर आपका सर्वनाश करेंगे - इसलिए मैं आजकल बहुत ज्यादा डरता हूँ तो अपने आसपास के लोगों से - जो मुझे निराशा, मंथन और मुश्किलों में घेरे रहते है, संबल बंधाते हैं, दिलासा देकर प्रचंड आशावाद की नैया में तैराने का जोख़िम उठाते है और अंत में मेरे हर तरह के सद्कर्म और कुकर्म में शामिल रहते है, यह सीख रहा हूँ कैसे और कितनी जल्दी इनसे निजात पाई जाएं और अपना एकांत बचाते हुए अपनी गरिमा और अपने स्व को जिंदा रख सकूं सबसे पहले अपने-आपको बंद कर लिया है और अपने सुख-दुख अपने तक सीमित कर लिए हैं, मेरी जीत, खुशी, बीमारी या अपने नितांत निज पलों को अपने तक रख लिया है, अपनी आय-व्यय या अपने फायदे-नुकसान का लेखा अपनी ही कुंजियों से खुलने वाली संदूकों में बंद कर लिया है, किसी के पूछने पर बस इतना कहता हूँ कि सब ठीक ...
असल में ना वोटिंग ज्यादा हुआ ना चुनाव हुए है सही तरीके से, केंद्र सरकार ने बेहद भद्दे तरीके से पूर्ण षडयंत्र करके और SIR को माध्यम बनाकर चुनाव जीतने का आपराधिक कार्य किया है इतनी हिम्मत तमिलनाडु या केरला में दिखाते तो वहां की जनता दौड़ा - दौड़ाकर दिमाग ठिकाने पर ला देती इन तीन-चार धूर्त और पूरी पार्टी को, शर्म आनी चाहिए कि एक राज्य में सारी मशीनरी, ज्ञानेश कुमार जैसा निकम्मा गिरगिट ब्यूरोक्रेट और प्रमोटी आयएएस अफसरों (जो वैसे भी जनता पर बोझ होते है, आरक्षण या चापलूसी से बने ये और कर ही क्या सकते है सिवाय Observer बनने के) के सहारे चुनाव जीतने का घिघौना खेल खेला है इसलिए अगर बंगाल, असम में भाजपा आ भी जाए तो यह सिर्फ खौफ है, सरकारी सुविधाएं छीन ना जाएं इसलिए 92-94% तक वेटिंग हुआ और केंद्र की सारी पुलिस से लेकर पैरा मिलिट्री लगाकर चुनाव और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर जो धब्बा लगाया है वह इतिहास में याद रखा जाएगा, सुप्रीम कोर्ट भी तमाम हस्तक्षेप के बावजूद मतदाता सूची से करीब बयानवें लाख लोगों को उनके मताधिकार को दिला नहीं सका और राष्ट्रपति तो अपने यहां रबर स्टाम्प है ही बहरहाल, यह चुनाव बहु...