बढ़ ही गए आखिर पेट्रोल - डीजल के भाव, हो गई चुनाव की नौटंकी, राजा बाबू विदेश से ही अप्रूव कर दिया इस सरकार ने बारह सालों में देश को सिर्फ महंगाई और बेरोजगारी ही दी है, अस्सी करोड़ मुफ्तखोरों को राशन बांट रहा है और ऊपर से कह रहा है कि सोना मत खरीदो - मतलब कितना नासमझ और भोला भंडारी है यह मणिशंकर कि कहा नहीं जा सकता जनता को ऐसा ही बैसाखनंदन चाहिए़ - क्योंकि गौमूत्र पीकर और गोबर खाकर दिमाग ऐसे ही घटिया शख्स को वोट दे सकते है, हर मोर्चे पर असफल आदमी को जब आप चुनोगे - जो अपने ही सुख और आत्म प्रशंसा में व्यस्त रहता है और दिन में पचास बार कपड़े बदलकर अपने ही फोटो शूट करवाता रहता है - तब और क्या ही करेगा अनपढ़ , कारपोरेट का गुलाम अभी तो 2050 तक इसे ही बनाओ - जब तक ये आपको बेच ना दें या सड़क पर लाकर नंगा न कर दें, अपना खून ना बेचना पड़े या आपकी औलादें भूखी ना मरें , दिमाग गिरवी रखकर सनातनी बनिए और भजन करिए जनता जनार्दन खूब बधाई महंगाई राक्षस की #खरी_खरी *** हर संत का एक अतीत होता है और हर दुष्ट का एक भविष्य होता है बस इतना अगर हम सोच और समझ लें तो जीवन धन्य हो जाएगा *** इधर कुछ बुद्धिजीवी, रिट...
ये अंधेरी शाम के साए है जो सदैव संग रहते हैं _______ गर्मी में दोपहर लंबी, उबाऊ और अलसाई होती है, शामें उदासी से भरी और रातें एकाकी इतनी कि यदि रातभर बैठकर छत पर तारें गिनते रहें तो भी रक्त छोटी पर जाएं, गर्मी फिर भी मुझे भांति है क्योंकि इसके बाद ही वर्षा ऋतु आएगी और सब कुछ भिगोकर तृप्त कर देगी ये जो पीले जर्द पत्ते आप गमलों की पंक्ति में देख रहे हैं - इन्हें सन सोलह में भोपाल के एक दफ्तर से लाया था, तब DFID में राज्य स्तर पर काम करता था, इसके पास नफीस का दिया हुआ अंजीर का पेड़ है, पीपल है, बरगद है, रबर है और नीम है - साथ ही चैताली जब इंदौर छोड़कर कोलकाता जा रही थी तब उसके बड़े से रेलवे क्वार्टर्स से निकाला हुआ कढ़ी पत्ते का पौधा है जो अब बड़ा हो गया है दो नींबू के पौधे थे - जिन्हें बरसों से सम्हाल कर रखा था, लोग कहते है गमले में भी फल आ जाते है - पर नहीं आए, बहुत पानी पीते है तीसरे माले पर इन्हें पालने में अपनी जान जोखिम में डालकर, खुद प्यासा रहकर, गर्मी सहकर इन्हें पालता हूँ और सिर्फ नींबू नहीं - बल्कि अजवाइन, मनी प्लांट, और भी ढेरों सब्जियों के भी पौधे - जो मेरे लायक सब्जी दे देते ...