धन, वैभव, यश और संतान जैसे सुख एक साथ कभी नहीं मिलते और यदि आपको मिल रहा है यह सब, तो आप संसार के इतिहास में बहुत ही बिरले व्यक्ति है और इसे सदा अपने पास बनाएं रखिए - ऐसे सद्प्रयास हमेंशा करिए - ताकि जीवन के उत्तरार्द्ध में आप अपना अंतिम समय सुकून से बीता सकें और खुशी से विदा ले सकें #मन_को_चिठ्ठी #त्यौहार_की_बातें [ अनुभव जन्य बातें ही लिखूंगा जो देख रहा हूँ, इधर पिछले कुछ समय से लोगों को बहुत नजदीक से देख समझ रहा हूँ और परख भी रहा हूँ और यह लग रहा है कि हम सब बहुत शुष्क जीवन जीते हुए अपने - आपको धोखे में रखकर जी रहे हैं ] *** हमारी हिंदी का युवा पढ़ लिख गया - एम ए, पीएचडी और पोस्ट डॉक्टरेट भी या सिर्फ बीए करके बैठ गया, इस समय वह अपनी पोस्ट्स पर इतनी दुरूह भाषा इस्तेमाल करके अपनी कुंठाए, बेरोजगारी, प्रेम, कविता, कहानी, आलोचना या एक ऐसी फेंटेसी के बारे में लिख कर अपना जीवन बर्बाद कर रहा कि देखा नहीं जाता उसकी दो पोस्ट्स पढ़ लो - निर्मल वर्मा , अज्ञेय, मुक्तिबोध, शमशेर या रांगेय राघव से कम नहीं दिखती - मतलब ऐसे शब्द ढूंढकर मेहनत करके पचास बार लिखता है और फिर पोस्ट करता है कि मुझे लगता ...
गजब का खेल चल रहा, सत्तारूढ़ दल के लोग जिसमें गृहमंत्री भी शामिल है और कई केबिनेट मंत्री भी सड़कों पर विपक्ष के खिलाफ सड़कों पर रैली, धरने कर रहें है - दुनिया का सबसे बड़ा जुगाड़ू और शक्तिशाली अमित शाह भी सड़कों पर है झंडा लेकर - मजा आ रहा है यह सब देखकर मल्लब एक राहुल, जिसे पप्पू कहते थे ये ज्ञानी और सनातनी लोग, उसने इन सबको सड़क पर ला दिया और बकवास करने पर मजबूर कर दिया, अभी तो मोती ने चुनौती का जवाब दिया नहीं - जिस दिन स्वीकार करने की हिम्मत होगी उस दिन इस देश से सदा के लिए भाजपा और संघ का नामोनिशान मिट जायेगा इसे कहते है मानसिक दीवालियापन *** "Autumn is a second spring when every leaf is a flower" • Albert Camus [ जीवन का हर पतझड़ अपने भीतर एक नया वसंत समेटे होता है ] *** अगर आप सही को सही और गलत को गलत नहीं बोल सकते या फर्क नहीं समझ सकते सच और झूठ का तो आपका पढ़ा लिखा होना, तथाकथित बुद्धिजीवी होना या पत्रकार, अधिकारी, मीडिया, डॉक्टर , वकील, जज, इंजीनियर, प्राध्यापक या समाजसेवी होना व्यर्थ है, आप यह सब समझ कर बोल नहीं सकते तो आपमें और किसी अदाणी - अंबानी में कोई फर्क नहीं ...