"मनुष्य बली नहीं, समय होत बलवान" [इस पोस्ट का उद्देश्य सहानुभूति अर्जित करना, या अपना कौशल एवं दक्षता दिखाना नहीं है, आप पढ़कर इसका मर्म पकड़ने की कोशिश करें ] ***** गत 17 जुलाई की बात है, मै जयपुर के लिए निकल रहा था और छत पर गमले में कुछ नींबू लगे थे, सोचा आने तक गिर जायेंगे और शायद खराब भी हो जायेंगे, इसलिए तोड़कर फ्रिज में रख देता हूँ, गलती से जल्दी में स्लीपर पांव में नहीं थी, तोड़ने में नींबू का एक छोटा सा काँटा बाये पैर की एड़ी में चुभ गया, मैंने तुरंत खींचकर निकाल दिया, थोड़ी देर दर्द होता रहा - पर लगा कि ठीक हो जायेगा उसके बाद मैं निकल गया यात्राओं पर, दो - चार दिन बाद एड़ी में दर्द शुरू हुआ और लगा कि एड़ी में कुछ चुभ रहा है, फिर याद आया कि यह तो वही काँटा है, उसके बाद असहनीय दर्द, चलने में दिक्कत, रात को नींद नहीं और एड़ी में लगातार जैसे शूल चुभ रहें हो, सारा ध्यान इस पर ही लगा रहता हर दम मित्रों, परिजनों और शुभ चिंतकों ने - जैसा कि होता है ज्ञानदान शुरू किया - "आंकड़े के दूध से लेकर नींबू बाँधना, गुड का चटखा, गुड - हल्दी गर्म करके बांधना,अजवाइन, अंबी हल्दी को चुन...
"पूस की रात" जैसी प्रसिद्ध कहानी प्रेमचंद ने सागर जिले के देवरी गांव में बैठकर पूस की रात को महसूस करते हुए लिखी थी, प्रेमचंद की बेटी और दामाद वहां रहते थे और सागर उनका आना - जाना लगा रहता था मुझे आज यह मालूम पड़ा - देवास में आयोजित परसाई जन्मशती के एक कार्यक्रम में, क्या आपको यह बात मालूम थी मेरी आधी अधूरी जानकारी यह भी है कि गुनाहो के देवता की नायिका सुधा भी शायद सागर विवि के अंग्रेजी विभाग में पढ़ाती थी, यह बात धर्मवीर भारती ने किसी से कही थी एक निजी बातचीत में, मित्र इसे दुरुस्त करें *** राहुल नहीं वो आंधी है देश का आधुनिक गांधी है ________ अभी एक वीडियो देखा जिसमें युवा कह रहे है कि मोदी राहुल से तीस मिनट डिबेट कर लें तो हम पुनः मोदी को वोट देंगे मोदी में एक वाक्य मन से बोलने की हिम्मत नहीं, मीडिया के गली मुहल्ले वाले टुच्चे पत्रकार से बात करने की हिम्मत नहीं, जिस मीडिया को पंद्रह वर्षों तक दूध पिलाया वह तो सांप ही निकली पर सोशल मीडिया को तमाम कोशिशों और कानूनी दांव पेंच में दबाने के बाद भी गालियां सुनना पड़ रही है यह कम है क्या, ना दलित साथ है - ना बामन, बनिये या ठाकुर ...