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Post of 12 April 2026 - इक्कीसवीं सदी का एक बंटे चार

  इक्कीसवीं सदी का एक बंटे चार  सिक्कों की खनक कम हो रही है, सूरज की किरणों की चमक कम हो रही है, चट्टानों के दाग़ भी फ़ीके पड़ते नज़र आ रहे है, नदियों में उद्दाम वेग से बहता पानी रूक गया है, जंगलों की पगडंडी खो गई है - किसी सूने रास्ते पर, पहाड़ों के पीछे से झांकता सूरज उदास है कि सांझ की शफक पर अंधेरों के साये है बेतरतीब से और मद्धम सी लौ के साथ टिमटिमाते तारों में सुकून दिखता नहीं सदी के एक चौथाई समय का बोझ उठाए घड़ी की सुईयां बेचैन है, वे थक गई है पेंडुलम की निर्बाध गति से और अब बहुत शिद्दत से किसी कंजी लगी पुरानी दीवार से वाबस्ता होकर थम जाना चाहती है, पेंडुलम छुप जाना चाहता है उन कवेलुओं के बीच - जहां से बरसात में नेह की बूंदें टप-टप टपकती है और पूरे कच्चे घर को सौंधी खुशबू से भर देती है  कितना मुश्किल है दो सदियों के बीच रहना - एक जिसके छठे दशक के अंत तक आते-आते जन्में, मुक्ति के स्वप्न देखते और आज़ादी की हवा में सांस लेकर विचरते लोग-जिनके पास उनींदें से चमकीले स्वप्न थे, मेहनतकश हाथ, कुछ भले से उजियारे और होठों पर उमंगों के गीत- जिनसे वे प्रतिफल या अनुतोष नहीं, बल्कि...
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हिंदी साहित्य की आत्म मुग्ध पगली आलोचक आजकल बहुत चहक रही है और उस मूर्ख को लगता है कि हिंदी के युवा लेखक उसकी मेधा और सुंदरता पर मोहित है। अरे पगली, नादां घसियारी हिंदी में दो रुपए कौड़ी के दाम से हर ऐरा गैरा नत्थू खैरा घटिया किस्म की पत्रिकाएं निकाल रहा है। दो रुपए के अख़बारों की गिनती नहीं है। इतना छपा हुआ कचरा है कि सात आठ रुपए में रद्दी भी नहीं पड़ती । ये सब कागज कारे करने को तेरी उजबक किस्म की बकवास छापकर पाठक नाम कुंठित और अपराध बोध से ग्रस्त चूहों से रुपया ऐंठते है और  दिमाग और विचारधारा को गिरवी रखकर सरकारी विज्ञापन जुगाड़ते है। अब सोच पगली, तेरे लंबे बकवास भरे आलेख, टटपुंजिया लेखकों की लुगदी की तरह लिखी उबाऊ और चालीस पेज से लेकर दस हजार शब्दों की आलोचना पढ़ता कौन है , तेरे स्त्री विमर्श, नैन मटक्की यात्राओं और बकवास और सड़क छाप प्रवचन नुमा बीज वक्तव्य सुनता कौन है। ये पी एच डी कर रहे युवा मित्र बड़ी आस से दूर दराज के गांवों से बाप महतारी का पसीना बहाकर विश्व विद्यालयों में आए है, अपने गुरुओं के तलुएं चाटकर और मेहनत करके एमए, एमफिल कर रहे है, हाड़तोड़ मेहनत से ...

Khari Khari, Man Ko Chiththi and 14 years after Mom , other Posts from 20 to 28 July 2026

लाख शिकस्त खाएं मगर आबिदा नहीं हुआ मैं कई बरस का होकर भी संजीदा नहीं हुआ, मुझको रहा मलाल और मलाल भी उम्र भर का मैं क्यों किसी शख्स का पसंदीदा नहीं हुआ • अज्ञात *** फिल्मी नचनिया और अव्वल दर्जे की मूर्ख महिला सांसद लायक नहीं, एक चरित्रहीन और अभद्रता से ऊलजुलूल बकने वाली इस मूर्ख को Right To Call Back के तहत बुलाने की व्यवस्था होना थी, दरअसल कोई राजनैतिक दल इस राईट टू कॉल बैक को नहीं चाहता, बहरहाल इस गंवार और नीच औरत पर काबू लगाने की जरूरत है *** माँ पहली गुरू, फिर पिता, फिर कुटुंब एवं परिजन और बाकी फिर स्कूल-कालेज के शिक्षक जीवन जीने की कला और व्यवहारगत शिक्षा, मूल्यों की समझ, कौशल और दक्षता, जीवन कौशल के दस हुनर तो आप सबने, इस व्यापक संसार ने सिखायें है और रोज हर कदम पर सीखने को मिलते है इसलिए आज सिर्फ एक व्यक्ति या संस्था को बधाई या धन्यवाद ज्ञापित करने से कुछ नहीं होगा, कृतज्ञ हूँ सबका और उन लोगों का भी जिन्हें मैं बता भी नहीं सकता कि उनसे कितना सीखा और आभार भी नहीं कह पाया गुरूपूर्णिमा या शिक्षक दिवस सिर्फ दिन नहीं वरन कृतज्ञता ज्ञापित करने, आत्मावलोकन करने और अपने-आप को सीखने, गलत...

Small Posts on Jantar Mantar Protest New Delhi and Khari Khari - Posts from 19 to 25 July 2026

जंतर मंतर पर युवाओं के साथ अब देश भर से बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे है और बाहर आकर लिख रहे है कि गालियां और बेहूदगी से सरकार को कोसा जा रहा है, दरअसल में असहमति की भाषा अलोकतांत्रिक और असभ्य ही होती है यह ध्यान रहें क्योंकि सरकार ने जिस तरह से मेट्रो से लेकर शौचालय में पानी, खाना लाने वालों को, दवाई और मूल चीजों के लाने ले जाने पर प्रतिबन्ध लगाया है वह बेहद शर्मनाक और बेशर्मी भरा निर्णय है, किसी भी लोकतंत्र में संविधान के परे जाकर लोगों के मूल अधिकारों और सुख सुविधाओं को प्रतिबंधित करना कायरता और डरपोक होने की निशानी है मोदी सरकार बुरी तरह से फैल हुई है और यह जन सैलाब अब बगावत पर उतरा है तो कोई गलत नहीं है, इस मोदी की घटिया और बेहद निकम्मी और किसी लायक नहीं सरकार को जितनी गालियां दी जाएं उतना कम है *** इंटरनेट और मेट्रो बंद करना संविधानिक अधिकारों का हनन है, और सुप्रीम कोर्ट को यह दिखाई नहीं दे रहा, कल से मूर्ख सरकार पानी बिजली बंद करेगी, इतने कायर हो तो कही डूबकर मर क्यों नहीं जाते, मेट्रो बंद होने और कुछ ही इलाकों में टैक्सी सर्विस चालू रहने से अबकी बार निकल नहीं पाया दूर तक के लिए...

Khari Khari, Man Ko Chithti and other Posts from 11 to 19 July 2026

होने लगी जिस्म में जुंबिश तो देखिए _______ बुझदिल, कायर और निकम्मी सरकार है मोदी सरकार हाईकोर्ट दिल्ली ने तब स्वत संज्ञान नहीं लिया जब पेपर लीक में बीस से ज्यादा युवाओं ने आत्महत्या कर ली, आज इन जज साहेबान का जमीर जाग रहा और संविधान याद आ रहा है, अरे देश में लोग जब तुम्हारी माँ बहन कर पर्चे उछाल रहे है, जूते फेंक कर मार रहे है - तब जमीर नहीं जाग रहा आप लोगों का, किस मिट्टी के बने हो आप लोग धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देने का आदेश सीजेआई नहीं दे सकते क्या और मोदी सरकार को इस पेपर लीक की जांच करने को नहीं कह सकते, नैतिकता तो बनती है , यह सही है कि न्यायपालिका विधायिका को आदेशित नहीं कर सकती, पर चापलूसी, गुलामी और सेटिंगबाजी भी तो मना है संविधान में देशभर में मुल्ला, मौलाना या पंडित और मोदी सरकार के पाले हुए बागेश्वर से लेकर राम - रहीम तमाम कुकर्म करते है या बकवास करते है तब अदालतों का जमीर नहीं जागता, संविधान में लिखित - "वैज्ञानिक मानसिकता को प्रचारित और प्रसारित करने का कर्तव्य" याद नहीं आता, ऐसी न्यायपालिका जो सेटिंग और खौफ से चलती हो उस पर सिर्फ अफसोस ही किया जा सकता है, इ...