एक कायर और मणिशंकर क्या कर सकता है फ्रांसिस बेकन के अनुसार, हिंसा प्रतिशोध की उपज है; यह व्यक्ति को कानून और विवेक से दूर ले जाती है, एवं चार्ल्स लैम्ब की मानवीय दृष्टि हमें याद दिलाती है कि मनुष्य की श्रेष्ठता उसकी संवेदना में है, क्रूरता में नहीं हिंसा ताकत का नहीं, विवेक की पराजय का प्रमाण है; जहाँ तर्क और संवेदना हारते हैं, वहीं क्रूरता जीतने का भ्रम पालती है कल वैसे सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या है, बचे खूचों का श्राद्ध हो जाएगा ओम शांति *** गधे - घोड़े या मणिशंकर पदों पर आसीन हो तो काकरोच, मक्खी, श्वान, शूकर पार्टी बनाने में क्या संकोच, बदनामी से डर नहीं लगता साहब , सभ्य खाल ओढ़कर बैठे खून पिपासुओं से डरते है कायर और क्या कर सकता है - मेट्रो बंद, रेल बंद, कर्फ्यू, गिरफ्तारी, वाटर कैनन, आंसू गैस....गोली, नरसंहार, इतना डरपोक और कायर प्रधान आज तक कोई नहीं था इंदिरा जी ने इमरजेंसी लगाई पर बसें, ट्रेन बंद नहीं की, लोगों को बस से खींचकर नहीं निकाला बल्कि इन संघियों को मीसा के अंतर्गत जेल में बंद किया था पटेल का अनुसरण करने वाला कल्लू मामा सिर्फ जस्टिस लोया, हीरेन पंड्या, माया कोडनानी को मरव...
स्मित मच्छार के साहस को सलाम पर जिस तरह से उसे मीडिया द्वारा महिमा मंडित किया जा रहा है उससे लगता है कि वह भारत रत्न लेकर ही रहेगा और आगामी चुनावों में भाजपा से उम्मीदवार भी हो सकता है बाकी सब छोड़ भी दें तो उसने अपना काम किया है जो उसका कर्तव्य था, ईमानदारी से किया इसकी शाबाशी है, पर मोदी ने उससे जो बात की और उसने भी किस मजबूरी में स्क्रिप्टेड बातें बोली वह आश्चर्यजनक नहीं लगती - थोड़ा गंभीरता से सोचिए अजीब हालत है, हर बात को हम धर्म और सनातन से जोड़ रहे है और सेना से लेकर इसरो के वैज्ञानिक भी 2014 के बाद सीख गए है कि कितना चालाक होना है और Survive करना है इस तंत्र में अपनी किसी कहानी में लिखा था कभी कि "चिड़िया बहुत भोली और फोकस्ड होती है पर उतना चालाक होना ही पड़ता है जितना ज़िन्दा रहने के लिए जरूरी है" #खरी_खरी *** कितने अभागे है वे पुल जो सिर्फ गलियारे है जिनके नीचे से गुजरती नहीं कोई नदी • वीरेन डंगवाल ***