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Khari Khari, Drisht kavi and other Posts from 27 Jan to 3 Feb 2023

जिस अंदाज में महंगाई बढ़ी और नौकरियां कम हुई साथ ही जीएसटी से लेकर नोटबन्दी के दुष्प्रभाव अब स्पष्ट दिख रहे है और इस सबके बाद सरकार का जो घटिया रवैया है लोगों के प्रति - वह बेहद दुखद है आज़ादी के बाद सबसे घटिया और गैर जिम्मेदाराना व्यवहार वाली सरकार है जनता भाँग और गांजा पीकर मस्त है, अडाणी - अम्बानी जैसे लोगों ने जो सत्यानाश कर दिया है अर्थ व्यवस्था और बैंकिंग का वह भी समझ नही आ रहा, मतलब हद यह है कि लगता है पूरी जनता रोटी नही गोबर खा रही है और मदमस्त हो रही है और बेरोजगारी झेल युवाओं को अफ़ीम चाटना ही है ; इतने पढ़े - लिखें गंवार आकाशगंगा के किसी कोने में नही होंगे दूध हुआ महंगा 3/- प्रति लीटर कोई हुक्मरान को जहर का भाव भी बता दें अब शर्मनाक है और बजट पर थाली पीटो रे कम्बख्तों *** रजत शर्मा ने पूछा था कि सेठ, अगर गए तो क्या होगा, तो सेठ बोला था - मेहनत करो, बैंक वेंक को कुछ नही होगा रजत और रवीश के चक्कर में बापड़ा गौतम गरीब मारा गया और अब दुनिया में मुँह दिखाने लायक नही रहा कसम खुदा की, रजत शर्मा चाय वाले को भी बुला लें एक बार *** || जो भजे हरि को || ••••• सुबह से कुछ खोज रहा था, लगभग द
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कोई हमें मृतकों से ज्यादा कभी प्रेम नहीं करता - अम्बर पांडे का नया संग्रह “गरूड और अन्य शोक गीत - Post of 27 Jan 2023

  “कोई हमें मृतकों से ज्यादा कभी प्रेम नहीं करता” – [अम्बर पांडे का नया संग्रह “गरूड और अन्य शोक गीत”] संदीप नाईक वेद और ऋचाएं हिंदी कविता के श्रेष्ठ उदाहरण है और फिर बाद में हम देखते है कि अनेक धार्मिक ग्रन्थ काव्य के कारण ही लोकप्रिय हुए है और जनमानस में जुबान पर रहें. इसी कला को तुलसीदास से लेकर कबीर, रसखान, जायसी से लेकर संत परम्परा के नामदेव, तुकाराम, ज्ञानदेव और रुकमाबाई तक ने अपनी बड़ी से बड़ी बात कविता में सहज ढंग से कही है और वह जीवन दर्शन जनमानस को कंठस्थ हो जाता है और यही ताकत कविता की है. मालवा से लेकर सभी जगह लोक में हमारे यहाँ वाचिक परम्परा का महत्व भी है जो पीढी-दर-पीढी एक दूसरे को हस्तांतरित होता रहता है. आज रामचरित मानस, महाभारत से लेकर गीता और कबीर, गोरक्षनाथ और तमाम लोगों की बात या यूँ कहें कि उनका लिखा काव्य जो हम तक आया है वह सिर्फ इस वजह से आ पाया कि यह सब कविता में था और सहज था. इसमें लोगों ने समय-समय पर जनश्रुतियों के हिसाब से अपने समय और काल की बातें, अनुभव और प्रसंग भी जोड्कर इसे समृद्ध किया. प्रिंटिंग प्रेस के आने के बाद छ्पाई ने इस सब वृहद काम को एक बड़े स्वरुप

Khari Khari, Drisht Kavi and other Posts from 3 to 26 Jan 2023

बड़नगर एक डेढ़ साल पहले गया था तो ज़मीन के एक छोटे से टुकड़े पर खेती कर रहें दम्पत्ति की कहानी लिखी थी, जो भास्कर से लेकर देश दुनिया के लोगों ने चुराकर या तोड़ मरोड़कर छाप ली और मेरा नाम तक क्रेडिट में ना लिखा तब लगा था कि यह एक अनूठा काम है क्योंकि अपनी व्यस्तता में वही एक काम देख पाया था, अभी तीन-चार दिन वहाँ रहा, ग्रामीणजनों से लेकर शासकीय लोगों और जनप्रतिनिधियों से मिला, 4-5 गाँव घूमा तो समझ आया कि बड़नगर बहुत धनवान शहर है, कहने को ब्लॉक है पर व्यवसाय से लेकर खेती और कई तरह के काम बहुत उन्नत और आधुनिक है, आसपास के इलाकों में उतना धन, कौशल, दक्षता नही जितनी बड़नगर में है हजारों किसानों ने काली उर्वरा मिट्टी और प्रचुर पानी का इस्तेमाल करके बहुत बेहतर और शानदार काम किया है और रिकॉर्ड तोड़ उत्पादन किया है, जैविक खेती ही नही बल्कि सभी प्रकार की फसलों में परिवर्तन करके नवाचार किये है, ये सब दर्ज किया जाना चाहिये और छोटे मोटे विशुद्ध वणिक बुद्धि से किये जाने वाले स्व केंद्रित और आत्म मुग्ध कामों को दरकिनार किया जाना चाहिये जो लोग भी अपने छोटे कामों का हो हल्ला करके जबरन का श्रेय लूटने की कोशिश करत

Drisht Kavi, Naye Sal Ki Duaa - Hindi Kavita 1 Jan2023

हिंदी कविता का वितान और सिमटा हुआ छोटा सा मंच कुल मिलाकर दो कवियों और एकाध आधे अधूरे व्यक्ति से बचें रहें - जो बापड़ा सबसे रजिस्टर पर हस्ताक्षर ही करवाते रहता है *** हिंदी कविता मासिक आयोजन , महाकवियों के आगमन , निरापद आलोचकों और विश्वविद्यालयों के पुरस्कार की लालसा में जी रहें विष ' बैलों ' से बची रहें , छोटे कस्बों में लोग न आएं और न ही शहरों की कविताई वाली घटिया राजनीति के सैप्टिक टैंक के ढक्कन खोलकर खुले छोड़ जाये - हमें सुख से जीने दें *** हे ईश्वर , हिंदी कविता को प्रगतिशील , जनवादियों , जलेस , अलेस और प्रयोगवादियों से बचाना , बचाना - उन कवियों से भी जो हर घटिया तुकबंदी के नीचे अपनी जवानी की फोटू चैंपकर महान बनने की प्रक्रिया में ज्ञानपीठ या साहित्य अकादमी जुगाड़ने का जतन 24x7 करते है *** हिंदी कविता को उनसे भी बचाना जो "तू मुझे बुला - मैं तुझे" की तर्ज़ पर महान और सबकी आँख की तारें बनें है , कविता को खतरा कवियों से उतना नही - जितना पोस्टर बैनर बनाने वाले उन हिंदी के मजदूरों से है जो बड़े लोगों के चंद अशआर उठाकर उन्हें ओबलाइज करते है एवं जिनकी औकात सिर्फ़

Kuchh Rang Pyar Ke and Drisht Kavi - Posts fromn 25 to 28 Dec 2022

  वर्चुअल दुनिया से असली दुनिया में ••••• इस वर्ष के आखिरी हफ़्ते में आखिरी यात्रा कर रहा हूँ और इस तरह की उबाऊ यात्रा में जब अपना कोई मिल जाता है तो सारी थकान भी दूर हो जाती है और खुशी का तो पूछो ही मत, लम्बी यात्रा कर एक और यात्रा पर पहुँचा तो खबर मिली, बस फिर क्या था - समय कम था, घूमे फिरे, शॉपिंग की, मिठाई ली, बढ़िया खाना खाया और जल्दी मिलने का वादा कर विदा हो गए, ये यहाँ प्रशिक्षण पर है और अपुन रास्ते की धूल फांकेंगे फिर से, पर उम्मीद है फिर दोस्त मिलेंगे किसी अड्डे या ठिये पर - जो मेरी ताकत है ये जनाब है तो पटना के पर दक्षिण भारत में किसी बैंक में राजभाषा अधिकारी है - विजयवाड़ा नामक शहर में, बहुत सहज, नेकदिल है, खूब पढ़ते और लिखते है, युवा विलक्षण आलोचक की श्रेणी में है, देश के चुनिंदा अग्र पंक्ति के साहित्यकार है, और बहुत साफ़ बोलते है - इसलिये मेरे लाड़ले है, लम्बे समय से फेसबुक से जुड़े थे, रोज बात न हो तो चैन नही पड़ता हमें, इनकी शादी में ना जाने पा का अफ़सोस था, आज मिलकर थोड़ा गिल्ट कम हुआ, पर अभी बहु से मिलना बाकी है - सो जनाब ने वादा किया है कि घर लेकर आयेंगे Khushbu Thakur तुम्हे

Khari Khari, Drisht Kavi and other Posts of Dec 22

Professional goals are temporary but personal loss is permanent *** 2014 से अभी तक की उपलब्धि यह है कि 80 करोड़ से ज़्यादा गरीब गुर्गों उर्फ़ वोट बैंक को घर बैठे राशन फ्री में बाँटना पड़ रहा है और 80 करोड़ से ज़्यादा मक्कार और लोभी लालची लोग यह नही समझ रहें कि सब चुनाव की माया है जो इस देश मे रोज़ होते रहते है अभी गुजरात, दिल्ली और हिमाचल में हुए, 2023 में मप्र, राजस्थान में होंगे और 2024 में देश भर में खाओ, खूब खाओ मुफ़्त का, संडास बन ही गए है घरों में, बस इतना याद रखना कि मुखाग्नि देते समय जब औलादें मुंह पर थूकेगी तुम्हारे और पूछेंगी कि जीवन के 7- 8 वर्ष मुफ़्त का राशन खाते रहें और ज़मीर कहाँ बेच दिया था तो - क्या जवाब दोगे हरामखोरो मध्यम वर्ग मेहनत कर टैक्स भरें और माले मुफ्त ये उड़ाये - इससे बड़ी मूर्खता कोई सत्ताधीश कर सकता है, कितनी अक्ल है यह स्पष्ट है रोज़गार ना देकर पाँच किलो की रेवड़ी बाँटना ही असली राम राज्य है मित्रों, किसान करें मेहनत और ये बाँटे मुफ़्त #खरी_खरी *** नफ़रत के बाज़ार में मुहब्बत की दुकान ••••• ◆ देश मोदी नही अम्बानी अडाणी चला रहे है ◆ भाजपा नफ़रत फैला रही है, हम मुहब्बत फैल