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Khari Khari and other Posts from12 to 15 May 2026

बढ़ ही गए आखिर पेट्रोल - डीजल के भाव, हो गई चुनाव की नौटंकी, राजा बाबू विदेश से ही अप्रूव कर दिया इस सरकार ने बारह सालों में देश को सिर्फ महंगाई और बेरोजगारी ही दी है, अस्सी करोड़ मुफ्तखोरों को राशन बांट रहा है और ऊपर से कह रहा है कि सोना मत खरीदो - मतलब कितना नासमझ और भोला भंडारी है यह मणिशंकर कि कहा नहीं जा सकता जनता को ऐसा ही बैसाखनंदन चाहिए़ - क्योंकि गौमूत्र पीकर और गोबर खाकर दिमाग ऐसे ही घटिया शख्स को वोट दे सकते है, हर मोर्चे पर असफल आदमी को जब आप चुनोगे - जो अपने ही सुख और आत्म प्रशंसा में व्यस्त रहता है और दिन में पचास बार कपड़े बदलकर अपने ही फोटो शूट करवाता रहता है - तब और क्या ही करेगा अनपढ़ , कारपोरेट का गुलाम अभी तो 2050 तक इसे ही बनाओ - जब तक ये आपको बेच ना दें या सड़क पर लाकर नंगा न कर दें, अपना खून ना बेचना पड़े या आपकी औलादें भूखी ना मरें , दिमाग गिरवी रखकर सनातनी बनिए और भजन करिए जनता जनार्दन खूब बधाई महंगाई राक्षस की #खरी_खरी *** हर संत का एक अतीत होता है और हर दुष्ट का एक भविष्य होता है बस इतना अगर हम सोच और समझ लें तो जीवन धन्य हो जाएगा *** इधर कुछ बुद्धिजीवी, रिट...
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Khari Khari, Drisht Kavi and The LAst Tanent - Posts from 9 to 11 May 2026

ये अंधेरी शाम के साए है जो सदैव संग रहते हैं _______ गर्मी में दोपहर लंबी, उबाऊ और अलसाई होती है, शामें उदासी से भरी और रातें एकाकी इतनी कि यदि रातभर बैठकर छत पर तारें गिनते रहें तो भी रक्त छोटी पर जाएं, गर्मी फिर भी मुझे भांति है क्योंकि इसके बाद ही वर्षा ऋतु आएगी और सब कुछ भिगोकर तृप्त कर देगी ये जो पीले जर्द पत्ते आप गमलों की पंक्ति में देख रहे हैं - इन्हें सन सोलह में भोपाल के एक दफ्तर से लाया था, तब DFID में राज्य स्तर पर काम करता था, इसके पास नफीस का दिया हुआ अंजीर का पेड़ है, पीपल है, बरगद है, रबर है और नीम है - साथ ही चैताली जब इंदौर छोड़कर कोलकाता जा रही थी तब उसके बड़े से रेलवे क्वार्टर्स से निकाला हुआ कढ़ी पत्ते का पौधा है जो अब बड़ा हो गया है दो नींबू के पौधे थे - जिन्हें बरसों से सम्हाल कर रखा था, लोग कहते है गमले में भी फल आ जाते है - पर नहीं आए, बहुत पानी पीते है तीसरे माले पर इन्हें पालने में अपनी जान जोखिम में डालकर, खुद प्यासा रहकर, गर्मी सहकर इन्हें पालता हूँ और सिर्फ नींबू नहीं - बल्कि अजवाइन, मनी प्लांट, और भी ढेरों सब्जियों के भी पौधे - जो मेरे लायक सब्जी दे देते ...

Khari Khari, Drisht Kavi and other Posts of 4 to 7 May 2026

वोट चोरी, राज्य चोरी, चुनावी घालमेल, और भयानक हिंसा के हल्ले के बाद इन सारी घटनाओ को छुपाने, जनता और देश दुनिया का ध्यान भटकाने के लिए भाजपा क्या कर सकती है इसकी कल्पना अब बहुत मुश्किल नहीं है , ये लोग सिर्फ और सिर्फ स्वार्थ, सत्ता और धन से जुड़े है और इसके लिए कुछ भी कर सकते है जिस अंदाज में इस तरह की कार्यवाहियों का विरोध, और पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे है, विपक्ष से लेकर नामी वकील चुनाव आयोग से लेकर सुप्रीम कोर्ट के SIR वाली प्रक्रिया पर सुस्ती दिखाने या अगली बार वोट कर देना जैसे बयान पर लोग कमेंट कर रहे है वह चिंतनीय है आखिर में प बंगाल में चुनावों की आड़ में कब्जा करके जिस तरह से हिंसा और बाकी सब किया वह शर्मनाक है, जो थोड़ी बहुत आस्था थी वह भी खत्म हो गई है पिछले तेरह साल में शुभेंदु के चौथे पीए की हत्या मतलब बहुत बड़ा लोचा है, क्या जांच इस दिशा में भी होगी, इन चारों मृतक पीए के बारे में विस्तृत जानकारियां ली जाए कि आखिर इनमें क्या समानता थी और ये असमय क्यों मारे गए, शुभेंदु जब टीएमसी में थे तब दो और भाजपा में आने के बाद दो यानी क्या सवाल नहीं है, यह राजनैतिक ना होकर कुछ व्यक्त...

Man Ko Chithti and Khari Khari - End of Communism in India the Black day 4th May 2026

सबसे ज्यादा सतर्क, चौकन्ना और सावधान रहने की जरूरत अपने और बेहद निजी लोगों से है - क्योंकि यही वे लोग है जो आपका क, ख, ग और घ जानते है और समय आने पर आपको पलटकर डूबो देंगे, यही वे लोग साबित होंगे - जो आपको जीवन में सबसे ज्यादा चुनौती भी देंगे और आपकी बाजी भी पलटेंगे, ये ही वो लोग है - जो आपका विश्वास जीतकर आपका सर्वनाश करेंगे - इसलिए मैं आजकल बहुत ज्यादा डरता हूँ तो अपने आसपास के लोगों से - जो मुझे निराशा, मंथन और मुश्किलों में घेरे रहते है, संबल बंधाते हैं, दिलासा देकर प्रचंड आशावाद की नैया में तैराने का जोख़िम उठाते है और अंत में मेरे हर तरह के सद्कर्म और कुकर्म में शामिल रहते है, यह सीख रहा हूँ कैसे और कितनी जल्दी इनसे निजात पाई जाएं और अपना एकांत बचाते हुए अपनी गरिमा और अपने स्व को जिंदा रख सकूं सबसे पहले अपने-आपको बंद कर लिया है और अपने सुख-दुख अपने तक सीमित कर लिए हैं, मेरी जीत, खुशी, बीमारी या अपने नितांत निज पलों को अपने तक रख लिया है, अपनी आय-व्यय या अपने फायदे-नुकसान का लेखा अपनी ही कुंजियों से खुलने वाली संदूकों में बंद कर लिया है, किसी के पूछने पर बस इतना कहता हूँ कि सब ठीक ...