वोट चोरी, राज्य चोरी, चुनावी घालमेल, और भयानक हिंसा के हल्ले के बाद इन सारी घटनाओ को छुपाने, जनता और देश दुनिया का ध्यान भटकाने के लिए भाजपा क्या कर सकती है इसकी कल्पना अब बहुत मुश्किल नहीं है , ये लोग सिर्फ और सिर्फ स्वार्थ, सत्ता और धन से जुड़े है और इसके लिए कुछ भी कर सकते है जिस अंदाज में इस तरह की कार्यवाहियों का विरोध, और पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे है, विपक्ष से लेकर नामी वकील चुनाव आयोग से लेकर सुप्रीम कोर्ट के SIR वाली प्रक्रिया पर सुस्ती दिखाने या अगली बार वोट कर देना जैसे बयान पर लोग कमेंट कर रहे है वह चिंतनीय है आखिर में प बंगाल में चुनावों की आड़ में कब्जा करके जिस तरह से हिंसा और बाकी सब किया वह शर्मनाक है, जो थोड़ी बहुत आस्था थी वह भी खत्म हो गई है पिछले तेरह साल में शुभेंदु के चौथे पीए की हत्या मतलब बहुत बड़ा लोचा है, क्या जांच इस दिशा में भी होगी, इन चारों मृतक पीए के बारे में विस्तृत जानकारियां ली जाए कि आखिर इनमें क्या समानता थी और ये असमय क्यों मारे गए, शुभेंदु जब टीएमसी में थे तब दो और भाजपा में आने के बाद दो यानी क्या सवाल नहीं है, यह राजनैतिक ना होकर कुछ व्यक्त...
सबसे ज्यादा सतर्क, चौकन्ना और सावधान रहने की जरूरत अपने और बेहद निजी लोगों से है - क्योंकि यही वे लोग है जो आपका क, ख, ग और घ जानते है और समय आने पर आपको पलटकर डूबो देंगे, यही वे लोग साबित होंगे - जो आपको जीवन में सबसे ज्यादा चुनौती भी देंगे और आपकी बाजी भी पलटेंगे, ये ही वो लोग है - जो आपका विश्वास जीतकर आपका सर्वनाश करेंगे - इसलिए मैं आजकल बहुत ज्यादा डरता हूँ तो अपने आसपास के लोगों से - जो मुझे निराशा, मंथन और मुश्किलों में घेरे रहते है, संबल बंधाते हैं, दिलासा देकर प्रचंड आशावाद की नैया में तैराने का जोख़िम उठाते है और अंत में मेरे हर तरह के सद्कर्म और कुकर्म में शामिल रहते है, यह सीख रहा हूँ कैसे और कितनी जल्दी इनसे निजात पाई जाएं और अपना एकांत बचाते हुए अपनी गरिमा और अपने स्व को जिंदा रख सकूं सबसे पहले अपने-आपको बंद कर लिया है और अपने सुख-दुख अपने तक सीमित कर लिए हैं, मेरी जीत, खुशी, बीमारी या अपने नितांत निज पलों को अपने तक रख लिया है, अपनी आय-व्यय या अपने फायदे-नुकसान का लेखा अपनी ही कुंजियों से खुलने वाली संदूकों में बंद कर लिया है, किसी के पूछने पर बस इतना कहता हूँ कि सब ठीक ...