Skip to main content

Posts

Man Ko Chithti and Khari Khari - End of Communism in India the Black day 4th May 2026

सबसे ज्यादा सतर्क, चौकन्ना और सावधान रहने की जरूरत अपने और बेहद निजी लोगों से है - क्योंकि यही वे लोग है जो आपका क, ख, ग और घ जानते है और समय आने पर आपको पलटकर डूबो देंगे, यही वे लोग साबित होंगे - जो आपको जीवन में सबसे ज्यादा चुनौती भी देंगे और आपकी बाजी भी पलटेंगे, ये ही वो लोग है - जो आपका विश्वास जीतकर आपका सर्वनाश करेंगे - इसलिए मैं आजकल बहुत ज्यादा डरता हूँ तो अपने आसपास के लोगों से - जो मुझे निराशा, मंथन और मुश्किलों में घेरे रहते है, संबल बंधाते हैं, दिलासा देकर प्रचंड आशावाद की नैया में तैराने का जोख़िम उठाते है और अंत में मेरे हर तरह के सद्कर्म और कुकर्म में शामिल रहते है, यह सीख रहा हूँ कैसे और कितनी जल्दी इनसे निजात पाई जाएं और अपना एकांत बचाते हुए अपनी गरिमा और अपने स्व को जिंदा रख सकूं सबसे पहले अपने-आपको बंद कर लिया है और अपने सुख-दुख अपने तक सीमित कर लिए हैं, मेरी जीत, खुशी, बीमारी या अपने नितांत निज पलों को अपने तक रख लिया है, अपनी आय-व्यय या अपने फायदे-नुकसान का लेखा अपनी ही कुंजियों से खुलने वाली संदूकों में बंद कर लिया है, किसी के पूछने पर बस इतना कहता हूँ कि सब ठीक ...
Recent posts

Khari Khari, Sandip Ki Rasoi and other Posts from 1 to 4 May 2026

असल में ना वोटिंग ज्यादा हुआ ना चुनाव हुए है सही तरीके से, केंद्र सरकार ने बेहद भद्दे तरीके से पूर्ण षडयंत्र करके और SIR को माध्यम बनाकर चुनाव जीतने का आपराधिक कार्य किया है इतनी हिम्मत तमिलनाडु या केरला में दिखाते तो वहां की जनता दौड़ा - दौड़ाकर दिमाग ठिकाने पर ला देती इन तीन-चार धूर्त और पूरी पार्टी को, शर्म आनी चाहिए कि एक राज्य में सारी मशीनरी, ज्ञानेश कुमार जैसा निकम्मा गिरगिट ब्यूरोक्रेट और प्रमोटी आयएएस अफसरों (जो वैसे भी जनता पर बोझ होते है, आरक्षण या चापलूसी से बने ये और कर ही क्या सकते है सिवाय Observer बनने के) के सहारे चुनाव जीतने का घिघौना खेल खेला है इसलिए अगर बंगाल, असम में भाजपा आ भी जाए तो यह सिर्फ खौफ है, सरकारी सुविधाएं छीन ना जाएं इसलिए 92-94% तक वेटिंग हुआ और केंद्र की सारी पुलिस से लेकर पैरा मिलिट्री लगाकर चुनाव और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर जो धब्बा लगाया है वह इतिहास में याद रखा जाएगा, सुप्रीम कोर्ट भी तमाम हस्तक्षेप के बावजूद मतदाता सूची से करीब बयानवें लाख लोगों को उनके मताधिकार को दिला नहीं सका और राष्ट्रपति तो अपने यहां रबर स्टाम्प है ही बहरहाल, यह चुनाव बहु...

Drisht Kavi and other Posts from 24 to 29 April 2026

प्रसिद्ध गीतकार स्व नईम जी को को मप्र शासन ने एक बार संस्कृति पुरस्कार में निर्णायक बनाया तो नईम जी ने तत्कालीन प्रमुख सचिव और सुयोग्य कवि स्व सुदीप बैनर्जी को अपनी स्टाईल में कहा कि "साला जिस पुरस्कार के लिए हमें योग्य नहीं समझा उसका निर्णायक बना दिया" आजकल यही हो रहा है कि आपको बोलने या बतियाने योग्य समझते नहीं लोग पर कार्यक्रमों में हेड काउंट बढ़ाने के लिए आमंत्रण दे देते है ताकि बोलने का मौका भी ना देना पड़े और कहने को भी हो जाए कि आपको बुलाया तो था आयोजन में अभी किसी एक कार्यक्रम का न्यौता मिला जिसमें पचासों ज्ञानी और स्वयंभू सेलिब्रिटी आने वाले है, मेरे खुद के फिल्मों और शास्त्रीय संगीत , कला संस्कृति के सौ से ज्यादा गंभीर और अकादमिक आलेख स्तरीय पत्रिकाओं में प्रकाशित है, पर भागीदारी नही - हिस्सेदारी के लिए बुलाया गया है, और यह भी कि इसे अन्य बड़े समूहों तक प्रसारित करें , तो यह सब लिखने का मन हुआ भला हुआ जो मेरी गगरी फूटी कोई कुछ भी कहें पर सच यह है कि शराफत छोड़ दी मैंने, जब साहित्य से खुद को अलग कर लिया तो इन कैमराजीवी या रील प्रेमी और आत्म मुग्ध आयोजकों और आत्म प्र...

Man Ko Chithti, Khari Khari and Amey Kant's Book Posts from 22 to 24 April 2026

भारतीय शादियों में क्या बदला - एक विहंगावलोकन _______ 1 - शादी के नाम कर संस्कार नहीं - बस दिखावा और इवेंट हो रहे हैं, सेलिब्रिटी और नेता के आने पर जो गदर हो रहा है वह शोचनीय है, उनके साथ सेल्फी का अजब तमाशा चलता है 2 - मेहमानों को आने के पहले सोचना पड़ता है कि मेहंदी, हल्दी, महिला संगीत, वर या वधू निकासी के समय के कपड़े, शादी के समय कपड़े, पार्टी के कपड़े, फेरों के समय के कपड़े, आवागमन के लिए महंगी गाड़ियां, परफ्यूम से लेकर जेवर आदि की आवश्यकता - क्या सारे रिश्तेदार इतने सक्षम है 3 - परिवार के बड़े और बूढ़े लोगों की उपेक्षा कर यार - दोस्त और कार्यालयीन स्टाफ की ओर ज्यादा ध्यान दिया जाता है 4 - बारात में कान फ़ोड़ू डीजे से लेकर भयानक कर्कश ढोल और ताशे से लेकर बाकी सबका भौंडा प्रदर्शन 5 - सड़क पर देर तक नाच - गाना और आसपास के लोगों को, राहगीरों को त्रस्त कर देने की हद तक का जाम लगवाना और यह भूल जाना कि आसपास अस्पताल, मरीज, बूढ़े, बच्चे, परीक्षाएं या कोई अन्य संकट हो सकते है, एंबुलेंस भी निकल नहीं पाती, पूरी पूरी रात अश्लील गानों पर नाचना - क्या सभ्यता हो गई है हमारी 6 - भोज में न्यूनतम सौ...

Drisht Kavi , Man Ko Chiththi and other Posts from 14 to 21 April 26

हिंदी में कवियों का एक गैंग है - जो हर शहर और हर जगह पर सक्रिय रहता है, फिर वो पुरस्कार समारोह हो, दलित आयोजन हो, बुद्ध पूर्णिमा हो, दीवाली हो, होली या राम नवमी, और ये सब ससुरे इतने सुसंगठित है कि एक - दूसरे के बिना मंच पर इनकी ना कविता उतरती है - ना रात को दारू और ना अगले दिन की सुबह वाली इनमें सत्तर पार से लेकर गेहूँ की बाली या कच्चे चने के जैसे ताजे कमसिन और अमीबा जैसे परजीवी से लेकर लोमड़ी - सियार जैसे धूर्त एवं घाघ एक साथ मौजूद रहते है, और हिंदी का कमजोर अंग्रेजी वाला पीएचडी शोधार्थी ना हो तो चखने के समय ककड़ी कौन छिलेगा या गुरुजी के पोतडे और टट्टी पेशाब के लंगोट कौन धोएगा साले रोना रोयेंगे दलित, एलीट और सवर्ण का - पर यात्रा हवाई ही होना ही चाहिए, एयरपोर्ट पर अंग्रेजी पढ़ना ना आएं भले और इनकी महफिलें और साजो - सामान, लगेज ही देख लो, चमक - दमक देख लो, दूर दराज तक के कार्यक्रमों के स्थान देख लो - तो समझ आता है कि देश के किसी भी कोने में ये मुंह मारने को शुकर देव की तरह तैयार रहते है और मजेदार यह है कि संचालक एक ही रिपीट होता रहता है जो जुगाड़ से किसी सरकारी कालेज में माड़साब बन गया...