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Khari Khari, Man Ko Chithti and other Posts from 11 to 19 July 2026

होने लगी जिस्म में जुंबिश तो देखिए _______ बुझदिल, कायर और निकम्मी सरकार है मोदी सरकार हाईकोर्ट दिल्ली ने तब स्वत संज्ञान नहीं लिया जब पेपर लीक में बीस से ज्यादा युवाओं ने आत्महत्या कर ली, आज इन जज साहेबान का जमीर जाग रहा और संविधान याद आ रहा है, अरे देश में लोग जब तुम्हारी माँ बहन कर पर्चे उछाल रहे है, जूते फेंक कर मार रहे है - तब जमीर नहीं जाग रहा आप लोगों का, किस मिट्टी के बने हो आप लोग धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देने का आदेश सीजेआई नहीं दे सकते क्या और मोदी सरकार को इस पेपर लीक की जांच करने को नहीं कह सकते, नैतिकता तो बनती है , यह सही है कि न्यायपालिका विधायिका को आदेशित नहीं कर सकती, पर चापलूसी, गुलामी और सेटिंगबाजी भी तो मना है संविधान में देशभर में मुल्ला, मौलाना या पंडित और मोदी सरकार के पाले हुए बागेश्वर से लेकर राम - रहीम तमाम कुकर्म करते है या बकवास करते है तब अदालतों का जमीर नहीं जागता, संविधान में लिखित - "वैज्ञानिक मानसिकता को प्रचारित और प्रसारित करने का कर्तव्य" याद नहीं आता, ऐसी न्यायपालिका जो सेटिंग और खौफ से चलती हो उस पर सिर्फ अफसोस ही किया जा सकता है, इ...
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Khari Khari, Man Ko Chiththi, Drisht Kavi and other Posts from 9 to 11 July 2026

नरोत्तम, कैलाश, नरेंद्र युग की मप्र में समाप्ति __________ नरोत्तम मिश्रा प्रकरण यह दर्शाता है कि एक दिन भाजपा के लोग आपस में ही लड़ भिड़कर अपना सर्वनाश कर लेंगे और यह पार्टी खत्म हो जाएगी, इंतजार कीजिए धर्म, यज्ञ, अनुष्ठान, मंदिर, कालीचरण जैसे बलात्कारी साधुओं के साथ मिलकर करोड़ों रूपये खर्च करके दतिया में जो ढांचे मिश्रा जी ने खड़े किए गए - उन्होंने भी कोई मदद नहीं की,याद रखिए मंदिर - मस्जिद और धर्म अलग है और राजनीति अलग,भाजपा का आलाकमान यह अच्छे से समझता है असल में खतरा भाजपा को कैलाश विजयवर्गीय, नरोत्तम मिश्रा, नरेन्द्र तोमर जैसे लोगों से है - जो येन केन प्रकार से मप्र की सत्ता हासिल कर शीर्ष पर बैठना चाहते है, अठारह वर्ष शिवराज सिंह चौहान ने किसी को आगे नहीं आने दिया - उमा भारती, बाबूलाल गौर, राघव जी, लक्ष्मीकांत शर्मा, नरोत्तम मिश्रा, नरेंद्र तोमर, कैलाश गौड, स्व लक्ष्मण गौड से लेकर कितने ही लोगों ने कोशिश कर ली कि वे मप्र के सिरमौर बने पर कुटिलता में माहिर शिवराज ने व्यापमं जैसा कांड करने के बाद और अवैध खनिज से लेकर नर्मदा से रेत खनन, नर्मदा किनारे फर्जी वृक्षारोपण और लगातार कई ...

Man Ko Chithti and other Posts from 5 to 9 July 2026

मैं जहाँ सब छोड़ आया था, उस सबको याद करने का कोई अर्थ नहीं है अब, बहुधा हम बूझ चुकी छायाओं से प्रेरणा पाने की उम्मीद करते है - जो एक समय के बाद भूतहा हो चुकी होती है, इन सबके बीच रंग, मौसम, कायदे बदलते रहते है, जैसे अभी थोड़े दिन पहले पलाश के सुर्ख रंग दिल के बेहद करीब थे और आग में सुकून था, उसके पहले वसंत में ताज़े महकते फूल, सप्तपर्णी से लेकर डेहलिया या गुलाब या किसी और फूल का नाम लो पर सब समय के साथ खत्म हो जाता है, हर दफे नए की उम्मीद बनी रहती है - यह तसल्ली कम है क्या जीने को - जो दिल-दिमाग में राहत देती है, पर अब काले बादलों के बीच उनसे और पानी की बूँदों के बीच प्यास एक सिरे से गायब है, दिन - दिन भर हो जाता है कि पानी की याद नहीं आती - जैसे सब स्मृति से लोप हो जाता है एक समय के बाद - वैसे ही सब भूलना पड़ता है जीवन कभी - कभी थोड़ा पीला, थोड़ा जामुनी और थोड़ा सफ़ेद बन जाता है और इन्हीं के बीच सुगंध लेते हुए जीने का स्वांग भरना पड़ता है, कोई चारा है भी और इसके सिवाय - बस, इन दिनों ज़िंदगी गुलज़ार है, इन सबमें ही गुत्थम - गुत्था है मौसम और जीवन के बदलावों में अपनी पसंद के रंगों संग जी...

Khari Khari, Man Ko Chithti and other Posts from 2 to 4 July 2026

अक्सर हम सबको लगता है कि हमें लोग भूल रहे है, महत्व नहीं दे रहे हैं, उपेक्षा कर रहें है, तिरस्कार कर रहें है और अपने जीवन से निकाल रहें हैं - यह बहुत अच्छी बात है, करने दीजिए यह सब उन्हें - जिन्हें यह सब करके सुख मिलता है, क्योंकि वे आपके साथ तब तक थे - जब तक आप उनके लिए काम के थे, उनके हर तरह के जायज़ - नाजायज़ काम में शरीक थे या मदद कर रहें थे, परन्तु जैसे ही आपसे उनका स्वार्थ पूरा हो जाता है - वे दूर छिटकने लगते हैं, आपकी उपेक्षा करके ही वे अपने सारे पाप और धत् कर्मों से दूर रहकर एक साफ छबि बनाने का प्रयास करते है या ईमानदार और नैतिक होना दिखाते हैं सबसे अच्छी बात तो यह होगी कि आप एकदम निपट अकेले रह जाएं और सब आपसे दूर हो जाएं, बस आप अपने उद्देश्य, कर्म और नीयत साफ रखें, सबके लिए अच्छा सोचते रहें और हर उस बात पर ध्यान देना बंद करें - जो आपको हैदस में डालती है, संत्रास में रखती है, याद रखिये हर प्रश्न का जवाब देना कतई जरूरी नहीं यह एकदम बंद करें, हर मुद्दें पर विचारना और बोलना बंद करें - क्योंकि लोग है और उनकी जुबानें हम पकड़ नहीं सकते - ना हमें यह करने की आवश्यकता है और ना ही हमारी क...

Tunnel - A Critical Appreciation of Dr Sunil Chaturvedi's Novel 4 June 2026

"अंधेरे से उजाले की तलाश : डॉ. सुनील चतुर्वेदी का उपन्यास ‘टनल’ " हिंदी साहित्य में ऐसे रचनाकार कम हैं जो अपने व्यावसायिक अनुभवों को केवल जानकारी के स्तर पर नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन और सामाजिक यथार्थ के रूप में साहित्य में रूपांतरित कर सकें. डॉ. सुनील चतुर्वेदी ऐसे ही विरल लेखकों में हैं. भूविज्ञान जैसे तकनीकी विषय में सागर विश्वविद्यालय से पीएच.डी. प्राप्त करने वाले डॉ. चतुर्वेदी ने अपने पेशेगत अनुभवों को समाज और मनुष्य के गहरे अंतर्द्वंद्व से जोड़कर देखने की दृष्टि विकसित की है. व्यंग्य लेखन से अपनी साहित्यिक यात्रा आरंभ करने वाले इस लेखक ने समकालीन समाज, प्रशासन और व्यवस्था पर तीखी टिप्पणियाँ की हैं. उनके पूर्व प्रकाशित उपन्यास—‘महामाया’, ‘कालीचाट’, ‘लपका’ और ‘गाफिल’—पहले ही उन्हें हिंदी कथा-साहित्य में एक विशिष्ट पहचान दिला चुके हैं. वर्तमान में मध्यप्रदेश राज्य जल बोर्ड के सदस्य के रूप में जल संरक्षण और जल प्रबंधन के क्षेत्र में सक्रिय डॉ. चतुर्वेदी का नवीन उपन्यास ‘टनल’ उनके अनुभव, संवेदना और चिंतन का परिपक्व प्रतिफल है. ‘टनल’ केवल एक सुरंग की कहानी नहीं है. यह मनुष्य, सम...