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Khari Khari, Man Ko Chithti, Drisht Kavi and other Posts from 9 to 16 March 2026

"रंग बिरंगे अलबम" यह मेरी बहुत पुरानी कविता है जो मैंने विद्या भवन, उदयपुर में एक प्रशिक्षण संपन्न करवाने के बाद दिसंबर 1997 में लिखी थी, यह सिर्फ अंश है बाद में इसे व्यवस्थित कविता के रूप में पूरा किया था, अलबम कभी लगाऊंगा या शायद फेसबुक के नोट्स में है बहुत पुरानी कविता है जो उस समय के नईदुनिया इंदौर के दीवाली विशेषांक में और बाद में कई अन्य पत्रिकाओं में छपी थी आज मित्र Anamika Shukla ने इसे भेजा तो कितनी ही स्मृतियाँ बरबस ही आँखों के सामने आ गई बहुत शुक्रिया अनामिका *** तुम्हें मदद के लिए जब दुहाई देने लगा तुम्हारी आंख में क्या है दिखाई देने लगा चला था ज़िक्र मेरी ख़ामियो का महफ़िल में जो लोग बहरे थे उनको सुनाई देने लगा मैं उसके झूठ की ताईद करने आया था मैं उसके झूठ पर ख़ुद ही सफ़ाई देने लगा ज़मीर बेच के लौटा जब ऊंचे दामों पर जो रास्ते में मिला वो बधाई देने लगा • सलीम सिद्दीक़ी *** छोटे कस्बों के मीडिया और स्थानीय चैनल सिर्फ हिंदू - मुस्लिम मुद्दों पर ही चल रहे है - पार्षदों, विधायकों और सांसदों के प्रवक्ता बनकर ये मीडिया प्रतिनिधि अराजक हो जाते है और बाज दफे शहरों की हवा...
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Man Ko Chithti, Drisht Kavi and Khari Khari - Posts from 26 Feb to 8 March 2026

"अचानक मुझमें असंभव के लिए आकांक्षा जागी,  अपना यह संसार काफी असहनीय है, इसलिए मुझे चंद्रमा, या खुशी चाहिए—कुछ ऐसा, जो वस्तुतः पागलपन-सा जान पड़े, मैं असंभव का संधान कर रहा हूँ... देखो, तर्क कहाँ ले जाता है—शक्ति अपनी सर्वोच्च सीमा तक, इच्छाशक्ति अपने अंतर छोर तक! शक्ति तब तक संपूर्ण नहीं होती, जब तक अपनी काली नियति के सामने आत्मसमर्पण न कर दिया जाये। नहीं, अब वापसी नहीं हो सकती, मुझे आगे बढ़ते ही जाना है..."  • कालीगुला "मुझे चांद चहिये" - सुरेंद्र वर्मा के उपन्यास से __________ प्रिय हर्ष, तुम्हें लिखना वैसा ही है जैसे किसी बंद खिड़की से आकाश को पुकारना, तुम चले गए हो, पर तुम्हारी चुप्पी अब भी शब्दों से अधिक बोलती है, तुम्हारे भीतर जो प्रेम था, वह साधारण नहीं था—वह ज्वार की तरह उठता था, पूर्णिमा के चाँद की तरह फैलता था, और उसी चाँद की तरह शायद तुम्हें दूर, बहुत दूर ले भी गया वर्षा वशिष्ठ तुम्हारे लिए केवल एक स्त्री नहीं थी, वह तुम्हारा स्वप्न थी, तुम्हारी आकांक्षा, तुम्हारा आत्मविश्वास और तुम्हारी असुरक्षा—सब कुछ, तुमने प्रेम को पूजा की तरह जिया, और जब वह तुम्हारे...