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Khari Khari, Man Ko Chithti and other Posts from 2 to 4 July 2026

अक्सर हम सबको लगता है कि हमें लोग भूल रहे है, महत्व नहीं दे रहे हैं, उपेक्षा कर रहें है, तिरस्कार कर रहें है और अपने जीवन से निकाल रहें हैं - यह बहुत अच्छी बात है, करने दीजिए यह सब उन्हें - जिन्हें यह सब करके सुख मिलता है, क्योंकि वे आपके साथ तब तक थे - जब तक आप उनके लिए काम के थे, उनके हर तरह के जायज़ - नाजायज़ काम में शरीक थे या मदद कर रहें थे, परन्तु जैसे ही आपसे उनका स्वार्थ पूरा हो जाता है - वे दूर छिटकने लगते हैं, आपकी उपेक्षा करके ही वे अपने सारे पाप और धत् कर्मों से दूर रहकर एक साफ छबि बनाने का प्रयास करते है या ईमानदार और नैतिक होना दिखाते हैं सबसे अच्छी बात तो यह होगी कि आप एकदम निपट अकेले रह जाएं और सब आपसे दूर हो जाएं, बस आप अपने उद्देश्य, कर्म और नीयत साफ रखें, सबके लिए अच्छा सोचते रहें और हर उस बात पर ध्यान देना बंद करें - जो आपको हैदस में डालती है, संत्रास में रखती है, याद रखिये हर प्रश्न का जवाब देना कतई जरूरी नहीं यह एकदम बंद करें, हर मुद्दें पर विचारना और बोलना बंद करें - क्योंकि लोग है और उनकी जुबानें हम पकड़ नहीं सकते - ना हमें यह करने की आवश्यकता है और ना ही हमारी क...
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Tunnel - A Critical Appreciation of Dr Sunil Chaturvedi's Novel 4 June 2026

"अंधेरे से उजाले की तलाश : डॉ. सुनील चतुर्वेदी का उपन्यास ‘टनल’ " हिंदी साहित्य में ऐसे रचनाकार कम हैं जो अपने व्यावसायिक अनुभवों को केवल जानकारी के स्तर पर नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन और सामाजिक यथार्थ के रूप में साहित्य में रूपांतरित कर सकें. डॉ. सुनील चतुर्वेदी ऐसे ही विरल लेखकों में हैं. भूविज्ञान जैसे तकनीकी विषय में सागर विश्वविद्यालय से पीएच.डी. प्राप्त करने वाले डॉ. चतुर्वेदी ने अपने पेशेगत अनुभवों को समाज और मनुष्य के गहरे अंतर्द्वंद्व से जोड़कर देखने की दृष्टि विकसित की है. व्यंग्य लेखन से अपनी साहित्यिक यात्रा आरंभ करने वाले इस लेखक ने समकालीन समाज, प्रशासन और व्यवस्था पर तीखी टिप्पणियाँ की हैं. उनके पूर्व प्रकाशित उपन्यास—‘महामाया’, ‘कालीचाट’, ‘लपका’ और ‘गाफिल’—पहले ही उन्हें हिंदी कथा-साहित्य में एक विशिष्ट पहचान दिला चुके हैं. वर्तमान में मध्यप्रदेश राज्य जल बोर्ड के सदस्य के रूप में जल संरक्षण और जल प्रबंधन के क्षेत्र में सक्रिय डॉ. चतुर्वेदी का नवीन उपन्यास ‘टनल’ उनके अनुभव, संवेदना और चिंतन का परिपक्व प्रतिफल है. ‘टनल’ केवल एक सुरंग की कहानी नहीं है. यह मनुष्य, सम...

Khari Khari, Man Ko Chiththi and other Posts from 23 to 30 June 2026

सुतून-ए-दार पे रखते चलो सरों के चरागां जहाँ तलक ये सितम की सियाह रात चले • मज़रुह सुल्तानपुरी मतलब सनातनियों और हिंदू अंध भक्तों की हिम्मत देखिए मंदिर चोरी का चंदा और आभूषण बाथरूम में जाकर छुपाते थे और फिर उठाते थे, गजब का अपमान है हमारे प्रभु श्रीराम और हिंदू आस्था का, शर्म - लिहाज और भगवान का ख़ौफ नहीं जरा भी रोज - रोज नए नए खुलासे हो रहे और अब सीधी सी बात है चंपत से लेकर सबको गिरफ्तार करो और भाजपा सरकार एवं राज्य प्रमुख को बर्खास्त कर हिरासत में लिया जाए, दूसरे राज्यों की जेलों में भेजकर पंद्रह दिन की "पुलिसिया रिमांड" पर लिया जाए - ताकि सारे टाँके नीचे से ऊपर तक ढीले हो जाए और बात उप्र तक ही नहीं - दिल्ली तक जाए यहां एक उदाहरण दूंगा, पिछले दिनों उज्जैन, नलखेडा में परिवार के साथ जाना हुआ, भाई-भाभी और बाकी लोगों ने मंदिर में श्रद्धा के अनुसार नगद दान पेटी में डालना चाहा, पर उपस्थित पुजारियों ने जोर - जबदस्ती की कि थाली में डालो और जैसे ही सौ - पांच सौ के नोट डाले, बगैर एक क्षण गंवाएं उन्होंने उठा लिए, उज्जैन गर्भ गृह में मैंने सौ का नोट दानपेटी में डालने की कोशिश की तो पण्ड...

Khari Khari, Man Ko Chithti Posts of 21 to 23 June 2026

  नब्बे पेपर लीक और नीट से लेकर लखनऊ में आज जल गए सोलह बच्चों को देखकर समझ आता है कि इस देश में भावी नागरिकों की क्या हालत कर दी है इन नालायकों ने, दिल्ली में कोचिंग में युवा बर्बाद हुए और मरे थे - उससे कोई सबक नहीं लिया मोदी, शाह और योगी ने अपने बकवास और घटिया भाषणों में कभी शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की बात नहीं की, सिवाय हिंदू, मुस्लिम, रोहिंग्या, मंदिर - मस्जिद, बीफ़, सर, नोटबंदी के अलावा कुछ नहीं बोला और सिर्फ वोट उगाही का काम किया दिल्ली कोचिंग, अहमदाबाद हवाई दुर्घटना में मेडिकल के छात्रों से लेकर आज लखनऊ तक सिर्फ युवा, किशोर ही मर रहे है जलकर, नीट से लेकर बाकी परीक्षाओं के पेपर लीक और मप्र में राज्य प्रायोजित व्यापमं में भी साठ से ज्यादा छात्र और लोग मारे गए है - पर इन बेशर्मों को फर्क नहीं पड़ रहा, मामा दिल्ली चला गया कितने बेशर्म और निर्लज्ज है इस सरकार के लोग, चंदा चोर और अपंजीकृत कार्यकर्ताओं की अंधभक्त फौज और तो और देश भर के पढ़े - लिखे गंवार प्राध्यापक जो इनके दस्त चाट रहे और नौकरी बचा रहे अपनी, जैसे हमारे भोपाल के माखनलाल गौशाला पत्तल कारिता के चाटुकार घटिया अखबारों ...

Khari Khari, Man Ko Chiththi - Posts of 19 June 2026

मजेदार दुनिया बना ली है ज्ञानियों, बुद्धिजीवियों और दुनिया के कर्ताधर्ताओं ने - इन मूर्खों को लगता है हम ही इस पूरी पृथ्वी का भार अपने काँधे पर सम्हालकर चल रहे है - इसलिए अमीबा से लेकर डायनोसोर जिंदा रहें और अब मनुष्य भी इन्हीं के रहमो - करम पर सांस ले रहा है मतलब एक ज्ञानी ने "सूचना के अधिकार" पर लम्बा - चौड़ा व्याख्यान दिया दो घंटे में, जिसमें दो बार ब्रेक लिया दस - दस मिनिट का कि बोलते - बोलते हांफनी चलने लगी थी, फिर प्रश्नोत्तर का सत्र या समय आया तो हम लोगों ने पूछा कि - "बॉस, हमारी ये व्यवहारिक दिक्कतें है - जिलों में या राजधानी के विभागों में" तो अगले को पसीना आ गया और जवाब दिया - "असल में मैंने आजतक सूचना के अधिकार का कभी जीवन में प्रयोग नहीं किया और ना ही कोई आवेदन ड्राफ्ट किया है" फिर क्या था, अपुन ने सारी श्रद्धा - भक्ति छोड़कर ताजी - ताजी हुई बरसात में कीचड़ से लथपथ और भीगा हुआ जूता उठा लिया और बोला "हरामखोर, निकल, साले PPT Reader ....कही के, अगली बार दिख ना जाना नहीं तो सारी की सारी 67 स्लाइड्स की पोंगली बना देंगे" ये तो हाल है इन मगर...

Khari Khari, Drisht Kavi and Man Ko Chiththi - Posts from 17 to 19 June 2026

अपनी सारी स्मृतियां, उमस, लंबी दोपहरें, उदास शामें, ठंडी रातें और भुनसार में उगते सूरज को छोड़कर तुम चले जाओगे, हर बार एक पेंडोरा बॉक्स की तरह से तुम आते हो और अपने साथ चिलचिलाती धूप, शुष्कता, सड़कों का सूनापन, तप रहें एकल लंबे मौन में खड़े पेड़ों की रिक्तता, चातक और चकोर के मिलन के स्वप्न, जाते हुए रोहिणी नक्षत्रों की तपन, सूखती हुई नदियों का ठहराव, ढूह से बन गए रिक्त पहाड़, समुद्र किनारे आग बन गए रेत के स्वर्णिम कण, सूखे मैदान बन गए तालाब की मेढ़ से लेकर गहराते हुए सूखे कुएँ, पानी के अभाव में पपड़ी की तरह जमती जा रही जमीन, आस्मान में ताकती असंख्य आंखें, प्यास से झुलसते कंठ - जिनमें कितनी ही प्रार्थनाएं अवरुद्ध हो गई है, और सबसे महत्वपूर्ण प्रेम की छूटी हुई वो जगह जिसे भरना मतलब अपने बेगुनाह होने के बावजूद भी सब कुछ चुपचाप सहना शामिल है, भी इसी सारे अफ़साने का हिस्सा है इस सबके बावजूद भी तुम्हारी विषाक्त उपस्थिति, स्मृति गंध, मिठास और फिर से जीवन के अगले बरस में सावन, वसंत, शिशिर और हेमंत के बाद बनी रहेगी - इसलिए कि तुम बौराएं हुई आम्र मंजरियों में फलों का गुलदस्ता ले आते हो - जामुन, लीच...