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Khari Khari, Man Ko Chiththi and other Posts from 3 to 8 Aug 2026

Legal Practice and Implications __________ The legal profession demands rigorous study, ethical conduct, and dedicated service to clients. Increasingly, however, social media appears to be filled with lawyers showcasing professionally designed posters, podcasts, reels, and self-promotional content. It often raises a genuine question: when do they find the time to read case law, prepare matters, meet clients, and appear before courts? Even senior or junior AORs are into pomp & show these days There is nothing wrong with sharing legal awareness or educating the public. In fact, legal literacy is a valuable service. But there is a fine line between public legal education and self-promotion. The professional ethics governing advocates in India require restraint in advertising and solicitation. The Bar Council of India Rules prohibit advocates from directly or indirectly advertising their professional services or using exaggerated publicity to attract clients. The dignity of the profess...
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Khari Khari, Man Ko Chithti and other Posts from 30 July to 2 Aug 2026

बहुत लंबी थी जुलाई, शुक्र है खत्म हुई आज **** चाँद किस खिडकी में रहता था - दीवार की या आसमान की ________________ बचपन सावन और हरेपन से भरा था. बरसात शुरू होते ही सब हरा हो जाता था – पहले मन, फिर तन और अंत में सारी प्रकृति. बचपन में हरा, नीला या लाल समझ नही आता था. आज जब उम्र के छठे दशक में हूँ तो समझ आ रहा है कि हरापन क्या होता है. माँ थी तो बरसात थी. पिता की और माँ की नौकरी में सब ओर हरा -ही - हरा था. नब्बे - ढाई सौ के वेतनमान में दोनों की तनख्वाह से घर चलता और बहुत मजे से चलता था. आज हम लोग पांच अंकों में कमा रहें है तो अकाल है. अकाल - अक्ल का भी और खुशियों का भी. अकाल - सुखों का और दृष्टि का भी. अकाल - जीवन में हरियाली का भी और हरेपन का भी. कारण एक नहीं, अनेक है. और सबसे बड़ा कारण हरेपन की अपेक्षा का भी है. उस मिट्टी के सौंधेपन का भी जिसके होने से हरापन होता है. बरसात में त्यौहार आते. त्यौहार आते तो रंग - बिरंगी भाजियां आती, हरी और बेहद ताज़ी. ढेरों उपवास करती थी माँ, जो दादी और नानी ने उस पर थोप दिए थे. बड़ी बहु होने के नाते करने ही पड़ते. बडो का जीवन समर्पण, संघर्ष और मूक रहकर ही निक...

Post of 12 April 2026 - इक्कीसवीं सदी का एक बंटे चार

  इक्कीसवीं सदी का एक बंटे चार  सिक्कों की खनक कम हो रही है, सूरज की किरणों की चमक कम हो रही है, चट्टानों के दाग़ भी फ़ीके पड़ते नज़र आ रहे है, नदियों में उद्दाम वेग से बहता पानी रूक गया है, जंगलों की पगडंडी खो गई है - किसी सूने रास्ते पर, पहाड़ों के पीछे से झांकता सूरज उदास है कि सांझ की शफक पर अंधेरों के साये है बेतरतीब से और मद्धम सी लौ के साथ टिमटिमाते तारों में सुकून दिखता नहीं सदी के एक चौथाई समय का बोझ उठाए घड़ी की सुईयां बेचैन है, वे थक गई है पेंडुलम की निर्बाध गति से और अब बहुत शिद्दत से किसी कंजी लगी पुरानी दीवार से वाबस्ता होकर थम जाना चाहती है, पेंडुलम छुप जाना चाहता है उन कवेलुओं के बीच - जहां से बरसात में नेह की बूंदें टप-टप टपकती है और पूरे कच्चे घर को सौंधी खुशबू से भर देती है  कितना मुश्किल है दो सदियों के बीच रहना - एक जिसके छठे दशक के अंत तक आते-आते जन्में, मुक्ति के स्वप्न देखते और आज़ादी की हवा में सांस लेकर विचरते लोग-जिनके पास उनींदें से चमकीले स्वप्न थे, मेहनतकश हाथ, कुछ भले से उजियारे और होठों पर उमंगों के गीत- जिनसे वे प्रतिफल या अनुतोष नहीं, बल्कि...
हिंदी साहित्य की आत्म मुग्ध पगली आलोचक आजकल बहुत चहक रही है और उस मूर्ख को लगता है कि हिंदी के युवा लेखक उसकी मेधा और सुंदरता पर मोहित है। अरे पगली, नादां घसियारी हिंदी में दो रुपए कौड़ी के दाम से हर ऐरा गैरा नत्थू खैरा घटिया किस्म की पत्रिकाएं निकाल रहा है। दो रुपए के अख़बारों की गिनती नहीं है। इतना छपा हुआ कचरा है कि सात आठ रुपए में रद्दी भी नहीं पड़ती । ये सब कागज कारे करने को तेरी उजबक किस्म की बकवास छापकर पाठक नाम कुंठित और अपराध बोध से ग्रस्त चूहों से रुपया ऐंठते है और  दिमाग और विचारधारा को गिरवी रखकर सरकारी विज्ञापन जुगाड़ते है। अब सोच पगली, तेरे लंबे बकवास भरे आलेख, टटपुंजिया लेखकों की लुगदी की तरह लिखी उबाऊ और चालीस पेज से लेकर दस हजार शब्दों की आलोचना पढ़ता कौन है , तेरे स्त्री विमर्श, नैन मटक्की यात्राओं और बकवास और सड़क छाप प्रवचन नुमा बीज वक्तव्य सुनता कौन है। ये पी एच डी कर रहे युवा मित्र बड़ी आस से दूर दराज के गांवों से बाप महतारी का पसीना बहाकर विश्व विद्यालयों में आए है, अपने गुरुओं के तलुएं चाटकर और मेहनत करके एमए, एमफिल कर रहे है, हाड़तोड़ मेहनत से ...

Khari Khari, Man Ko Chiththi and 14 years after Mom , other Posts from 20 to 28 July 2026

लाख शिकस्त खाएं मगर आबिदा नहीं हुआ मैं कई बरस का होकर भी संजीदा नहीं हुआ, मुझको रहा मलाल और मलाल भी उम्र भर का मैं क्यों किसी शख्स का पसंदीदा नहीं हुआ • अज्ञात *** फिल्मी नचनिया और अव्वल दर्जे की मूर्ख महिला सांसद लायक नहीं, एक चरित्रहीन और अभद्रता से ऊलजुलूल बकने वाली इस मूर्ख को Right To Call Back के तहत बुलाने की व्यवस्था होना थी, दरअसल कोई राजनैतिक दल इस राईट टू कॉल बैक को नहीं चाहता, बहरहाल इस गंवार और नीच औरत पर काबू लगाने की जरूरत है *** माँ पहली गुरू, फिर पिता, फिर कुटुंब एवं परिजन और बाकी फिर स्कूल-कालेज के शिक्षक जीवन जीने की कला और व्यवहारगत शिक्षा, मूल्यों की समझ, कौशल और दक्षता, जीवन कौशल के दस हुनर तो आप सबने, इस व्यापक संसार ने सिखायें है और रोज हर कदम पर सीखने को मिलते है इसलिए आज सिर्फ एक व्यक्ति या संस्था को बधाई या धन्यवाद ज्ञापित करने से कुछ नहीं होगा, कृतज्ञ हूँ सबका और उन लोगों का भी जिन्हें मैं बता भी नहीं सकता कि उनसे कितना सीखा और आभार भी नहीं कह पाया गुरूपूर्णिमा या शिक्षक दिवस सिर्फ दिन नहीं वरन कृतज्ञता ज्ञापित करने, आत्मावलोकन करने और अपने-आप को सीखने, गलत...