संसार में, देश में, प्रदेश में, जिले में, शहर में, यहाँ तक कि आसपास के मोहल्लों में भी इतने आयोजन होते रहते हैं कि यदि हर जगह शामिल होना चाहें, तो एक जीवन भी कम पड़ जाए, आजकल मैंने लगभग सभी प्रकार के आयोजनों में शिरकत करना बंद कर दिया है - इसके मुख्य रूप से दो-तीन कारण हैं पहला, साहित्य, लेखन और पठन-पाठन से विश्वास उठता जा रहा है, क्योंकि आजकल के अधिकांश साहित्यकार — और कई पुराने लोग भी — केवल आत्ममुग्धता में डूबे दिखाई देते हैं, वे अपनी ही प्रशंसा में लगे रहते हैं, अपने परिचितों की किताबों, कविताओं और कहानियों की चर्चा करते हैं, जबकि बाकी दुनिया जाए भाड़ में — जैसी मानसिकता हावी है दूसरा, ये लोग जरूरी सामाजिक और मानवीय मुद्दों को छोड़कर ऐसी मूर्खतापूर्ण बातों में उलझे रहते हैं, जिनका वास्तविक जीवन से कोई लेना-देना नहीं होता तीसरा, अधिकांश लोग भयानक किस्म के नेपोटिज़्म में व्यस्त हैं और उसी को बढ़ावा दे रहे हैं, इसलिए अब इन लोगों से बात करने या बहस करने का भी कोई अर्थ नहीं बचा है पहले किताबों और पत्रिकाओं के प्रति बहुत श्रद्धा थी, पुरानी खरीदी हुई किताबें और पत्रिकाएँ आज भी सहेजकर रखी ...
Not the right way to suppress voices. This is highly unethical and undemocratic. Why are they so afraid? Ultimately, all office bearers function on public funds and are accountable to the people. They cannot stop or withhold such accounts merely to silence criticism. The government seems to be turning increasingly intolerant of dissent. If this trend continues, the Modi government may not even see the dawn of 2029 *** "इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है, नाव जर्जर ही सही लहरों से टकराती तो है" _______ कॉकरोच जनता पार्टी के फॉलोअर इंस्टाग्राम पर भारतीय जनता पार्टी से ज्यादा हो गए, उसके संस्थापक ने आज सुबह सभी से अनुरोध किया है कि भारतीय जनता पार्टी को अनफॉलो करना शुरू कर दें मुझे लगता है कि यह एक तरह का शुभ संकेत है - भले ही युवा लोग जोश में आकर पार्टी ज्वाइन कर रहे हैं और हो सकता है कि वह थोड़े दिनों में कुछ धमाल भी करें, करना भी चाहिए - जब देश में 70 - 80 साल से ज्यादा के लोग अपनी राजनीतिक और निजी महत्वाकांक्षाओं, हवस और दिखावे के लिए जनता के रूपयों पर धमाल और कमाल दोनों क...