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Khari Khari, Man Ko Chithti, Drisht Kavi and other Posts from 4 to 24 Feb 2026

  समय शेष नहीं है, जो भी जितना भी है इसमें एक हड़बड़ाहट है, एक जल्दी है, बहुत कुछ कर गुजरना है अभी - इसलिए, मैं किसी को अब जज नहीं करता - क्योंकि ना मेरे पास अब क्षमता बची है और ना ही कोई विशेष योग्यता है, मेरे भीतर इतनी कमियां है कि समझ नहीं आता कैसे ऊबरू इनसे, जब मैं इस पड़ाव पर पहुंचा हूँ तो यह सरल सी बात समझ आई है कि कमियों के अलावा हम किसी और चीज से बने ही नहीं है हम सबमें थोड़ी बहुत अच्छाईयां है - जो एक बेहतरीन आवरण की तरह से चेहरे को ढांककर जिंदगी भर का गुजारा चला देती है और हम ताउम्र इसी भ्रम में बने रहते है कि हम श्रेष्ठ है, बहरहाल, अब समय नहीं अपनी कमजोरियों से ही निजात पा लूं तो शेष सफ़र आसान हो सकें, किसी तरह के बोझ, पूर्वाग्रहों और धारणाओं के तले दबकर अपने को भारी नहीं करना चाहता इस समय जब वाचालता छोड़कर स्थितप्रज्ञ हो रहा हूँ, अपनी एषणाओं को छोड़कर अपरिग्रही बनने का अभ्यास कर रहा हूँ - बहुत कठिन है पर जी जान से लगा हूँ मुश्किल है पर कोशिश है कि सब समझ पाऊं आहिस्ता-आहिस्ता और इसे भावनात्मकता से भी आगे बढ़कर गुन पाऊं तो शायद कुछ ठौर मिलें, अपने आपको भी समझ पाऊं और जज करन...
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Man Ko Chiththi Post of 2 Feb 2026

अपने अनुभव से कह रहा कि निराश, असफल, फेल, नापास होना बिल्कुल बुरा नहीं है, सकारात्मकता अच्छी बात है, पर मनुष्य जीवन में हमेशा उत्साह में, सकारात्मक या आशावादी नहीं हुआ जा सकता, और यदि मैं यह करता हूँ , दिखता हूँ या व्यवहार में लाता हूँ तो यह मैं अपने आप से दोगलापन कर रहा हूँ, अपने आपको धोखा दे रहा हूँ और असहज हूँ, मन और चित्त शांत नहीं है, कोई हड़बड़ाहट और बेचैनी है जो मुझे खाये जा रही है, इस सबमें दूसरों को धोखा देता हूँ - वह बात तो बहुत देर से हो सकती है कि मेरे इस नकली मुखौटे ने कितनों का नुकसान कर दिया, जीवन भर ऐसे मुखौटो से ही धोखा खाते आया हूँ - फिर वह विचारधारा हो, व्यवहार हो, ईमानदारी हो, साहित्य हो, समाजसेवा हो, कानूनी दायरे और अदालतें हो, न्याय हो, नैतिकता या स्वाभिमान, सब भोंथरे और थोथे निकलें इसलिए कोशिश करता हूँ कि जैसा हूँ - वैसा ही रहूँ, जो भाव-भंगिमा भीतर से है वही बनी रहे, जो भाषा भीतर उपजती है वही व्यक्त करूँ - अब उसमें गाली आये या श्रृंगार , यही उम्मीद करता हूँ कि सकारात्मकता और प्रचंड आशा के बदले सहज, सरल जीवन बगैर दाँव-पेंच के बना रहें, जब जीवन भर कोई आवरण नहीं ओढ...

Khari Khari, Drisht Kavi, Man Ko Chiththhi and other Posts from 25 to 31 Jan 2026

"कल से निराश दिख रहे, क्या हुआ" - अभी लाइवा मिल गया, दूध लेने जा रहा था "आपने समाचार नहीं सुना, मेरा नाम नहीं था किसी भी लिस्ट में, पद्मश्री से पद्मभूषण तक की" - आवाज जैसे किसी गुफा से आ रही थी "पर तुमने तो राखी, दिवाली, होली, ईद, क्रिसमस, गुरू पर्व, कांग्रेस, भाजपा, सपा, बसपा, से लेकर सबके जन्मदिन पर बधाई वाले पोस्टर लगाए थे अपनी कविताओं की दो सौ बारह किताबों के मुख पृष्ठों के साथ" फिर भी कुछ ना मिला - "और तो और कलेक्टर, पटवारी और सफाई कर्मचारी तक के फोटो पर हैप्पी जन्मदिन लिखा था, किसी ने अनुशंसा नहीं की" "क्या ही कहूँ, अब विश्वास उठ गया है साला लेखन से और इस देश से, अब मैं जा रहा किसी द्वीप पर रहने - वही मरूंगा सुखी" - लाइवा बोला "सुनो, अब जा ही रहे तो मेरे लिए दो लीटर दूध, एक किलो पनीर देते जाना, आज छुट्टी है तो मस्त मटर पनीर बनेगा आज तुम्हारे इस गम में और मैं तुम्हे मुहल्ले का बल्लम भूषण घोषित करता हूँ" - लाइवा को जाते देख रहा था #दृष्ट_कवि *** संविधान भर बना रहें और लोग वास्तविक अर्थ में समता, भ्रातृत्व और स्वतंत्रता का ...

Umar Khalid and Hon Supreme Court of India Post of 23 Jan 2026

यह सब पढ़ना भी किसी कोठरी में क़ैद होने जैसा है पर इस सबके बाद भी यदि हम सब लोग थोड़ा-थोड़ा पानी किसी अहाते के पेड़ को डालना शुरू करें तो ... बहुत दुआएं उमर खालिद तुम्हारे लिए __________ "उमर की बात" •••••••••• 'जब सुप्रीम कोर्ट ने जमानत खारिज की तब से जेल पहले से अधिक भीड़ भरी और अराजक हो गई है जिसने तनहाई के लिए जंग को और तीखा बना दिया । कैद के दौरान , मैं संगीत, पढ़ने और जानवरों की देखभाल में सुकून पाता हूँ; ये छोटी-छोटी दिनचर्याएँ मुझमें उम्मीद और मानसिक मजबूती बनाए रखने में मदद करती हैं। इस बार अंतरिम जमानत के बाद जब मैं तिहाड़ लौटा तो वहाँ बहुत कुछ बदल चुका था। हमारे बैरक में लगभग पचास और बंदियों को रखा गया था, जबकि यह जगह पहले ही क्षमता से अधिक भर चुकी थी। इसका अर्थ यह हुआ कि पहले से भी कम सन्नाटा था। सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत खारिज किए जाने के बाद यह शांति की कमी और ज़्यादा खटकी। जब मैं अभी भी फैसले के बाद मीडिया के तूफ़ान से उबरने की कोशिश कर रहा था, तो अब टीवी समाचार और अखबारों पर लगातार रिपोर्टिंग के कारण मुझे पहचानने वालों की संख्या भी बढ़ गई थी । अब हर कोई क...