मैं जहाँ सब छोड़ आया था, उस सबको याद करने का कोई अर्थ नहीं है अब, बहुधा हम बूझ चुकी छायाओं से प्रेरणा पाने की उम्मीद करते है - जो एक समय के बाद भूतहा हो चुकी होती है, इन सबके बीच रंग, मौसम, कायदे बदलते रहते है, जैसे अभी थोड़े दिन पहले पलाश के सुर्ख रंग दिल के बेहद करीब थे और आग में सुकून था, उसके पहले वसंत में ताज़े महकते फूल, सप्तपर्णी से लेकर डेहलिया या गुलाब या किसी और फूल का नाम लो पर सब समय के साथ खत्म हो जाता है, हर दफे नए की उम्मीद बनी रहती है - यह तसल्ली कम है क्या जीने को - जो दिल-दिमाग में राहत देती है, पर अब काले बादलों के बीच उनसे और पानी की बूँदों के बीच प्यास एक सिरे से गायब है, दिन - दिन भर हो जाता है कि पानी की याद नहीं आती - जैसे सब स्मृति से लोप हो जाता है एक समय के बाद - वैसे ही सब भूलना पड़ता है जीवन कभी - कभी थोड़ा पीला, थोड़ा जामुनी और थोड़ा सफ़ेद बन जाता है और इन्हीं के बीच सुगंध लेते हुए जीने का स्वांग भरना पड़ता है, कोई चारा है भी और इसके सिवाय - बस, इन दिनों ज़िंदगी गुलज़ार है, इन सबमें ही गुत्थम - गुत्था है मौसम और जीवन के बदलावों में अपनी पसंद के रंगों संग जी...
अक्सर हम सबको लगता है कि हमें लोग भूल रहे है, महत्व नहीं दे रहे हैं, उपेक्षा कर रहें है, तिरस्कार कर रहें है और अपने जीवन से निकाल रहें हैं - यह बहुत अच्छी बात है, करने दीजिए यह सब उन्हें - जिन्हें यह सब करके सुख मिलता है, क्योंकि वे आपके साथ तब तक थे - जब तक आप उनके लिए काम के थे, उनके हर तरह के जायज़ - नाजायज़ काम में शरीक थे या मदद कर रहें थे, परन्तु जैसे ही आपसे उनका स्वार्थ पूरा हो जाता है - वे दूर छिटकने लगते हैं, आपकी उपेक्षा करके ही वे अपने सारे पाप और धत् कर्मों से दूर रहकर एक साफ छबि बनाने का प्रयास करते है या ईमानदार और नैतिक होना दिखाते हैं सबसे अच्छी बात तो यह होगी कि आप एकदम निपट अकेले रह जाएं और सब आपसे दूर हो जाएं, बस आप अपने उद्देश्य, कर्म और नीयत साफ रखें, सबके लिए अच्छा सोचते रहें और हर उस बात पर ध्यान देना बंद करें - जो आपको हैदस में डालती है, संत्रास में रखती है, याद रखिये हर प्रश्न का जवाब देना कतई जरूरी नहीं यह एकदम बंद करें, हर मुद्दें पर विचारना और बोलना बंद करें - क्योंकि लोग है और उनकी जुबानें हम पकड़ नहीं सकते - ना हमें यह करने की आवश्यकता है और ना ही हमारी क...