हमारे देवास गांव (सॉरी जिला मुख्यालय) के बिजली विभाग वाले पिछले चार - पांच दिन से रोज सुबह छह बजे से कभी ग्यारह, कभी बारह और आज दस बजे तक यानी छह - सात घंटा रोज मेंटेनेंस के नाम पर बिजली काट रहे थे कि बरसात में हम सम्मानित उपभोक्ताओं को कोई कष्ट ना हो, और बेचारों की किस्मत देखो - आज दस बजे बिजली आई ही थी कि दो - चार बार फिर चाय पीने चली गई, और अभी तेज हवा चल रही तो आधे घंटे काफी हाउस में डोसा खाने गई है, लंच टैम से ज्यादा हो गया तो भूख लगी होगी बिजली रानी को भी - फिर बरसात का भरोसा नहीं, खाना तो होना कि नई फोन तो उठाकर रख ही देते है बेचारे, हम लोग उन्हें परेशान कर देते है, साला हजार - दो हजार रुपया माह का बिल भरकर जैसे खरीद लिया हो उन्हें , इसलिए फोन उठाकर रखना मेरे कूँ तो एकदम वाजिब लगता हैगा अब आप हो बोलो गलत बोला क्या मैं कैसे जीबो रे *** हमारे प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री डाक्टर मोहन यादव की भाषा से समझ गया कि उन्होंने राजनीति विज्ञान में सच में विक्रम विवि उज्जैन से पीएचडी की है और वे उच्च शिक्षा मंत्री थे उसके बाद इस समय प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री है लिख रहा हूँ ताकि सनद रहें जुब...
आरती, अजान, गुरुबाणी का पाठ या चर्च में कैरोल गाने वालों की आवाज ठीक हो तो बढ़िया नहीं तो धर्म को जिस तरह से बड़े - बड़े भोंपू लगाकर अपनी जाति, वर्ग या समुदाय या सबको जो पुण्य बांटने का कार्य है ना उसके बजाय इन सभी बेसुरों को भयानक पाप लगेगा, मतलब रोज - रोज एक ही तरह की किताब से वही - वही चीखते - चिल्लाते है और कर्कश स्वरों से पूरे माहौल का कबाड़ा कर देते है, कितनी कमजोर याददाश्त है कि सदियों से वही गा - बजा रहे हो फिर भी जीवन में अमल नहीं करते आखिर कब तक वही सब दोहराते रहेंगे, नया क्यों नहीं रचते, ऐसे ही भागवत सुनाने वाले लोग भी कितने वर्षों से एक ही तरह की कहानी कर्कश आवाज में सुनाकर धर्म का नुकसान कर रहें है, कितने अज्ञानी है ये लोग कि अपनी ही भौंडी आवाज को पहचानते नहीं और अपनी आवाज के साथ ढोल मंजीरे और संवादिनी की आवाज भी इतनी बढ़ा देते है कि पूछो मत हर आरती, अजान या अन्य में आखिर में आते आते ये लोग माइक के सामने लगभग विक्षिप्त हो जाते है और एक ही बात, स्लोगन या नारे को इतना दोहराते है कि लगता है उन्माद और पागलपन का दौरा पड़ा है, इनके साथ वाली भीड़, बच्चे भी अपना दिमाग गिरवी रखकर प...