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Khari Khari, Drisht Kavi and Adnan Darvesh's Poem and my Comment - Posts of 7 April 2026

  आखिर वही हुआ जिसका अंदेशा था, चलो देर आए दुरुस्त आए, असल में दुनिया के सारे ट्रंप बेहद लीचड़, कमजोर, और धूर्त है - जिनमें दो कौड़ी की अक्ल नहीं है, वे सिर्फ बकलोल है और शेखीबाज है जो लोग अपने लोगों और अपने देश को साथ नहीं रख सकते, या अपने लोगों के विकास की बात नहीं कर सकते - वे इसके अलावा कुछ और नहीं कर सकते, विशुद्ध रूप से ये सब कायर और डरपोक है और अमेरिकी ट्रंप ने यह कल रात सिद्ध कर दिया और यह भी कि वो पूरा मानसिक रोगी है - बोले तो गंभीर mental, neurotic, depression and anxiety का शिकार है हमारी मीडिया और मीडिया के दलालों को अब मसाला मिलना बंद होगा, पर कोई ना - अब चुनावों की घटिया रिपोर्टिंग चालू होगी - ताकि इन असुरों के नाखून पैने होते रहें और ये बर्बादी के कगार पर हम सबको ले जाएं #खरी_खरी *** अदनान कफील की यह कविता इन दिनों सोशल मीडिया पर घूम रही है, बगैर किसी पूर्वाग्रह के एक पाठकीय टिप्पणी कर रहा हूँ, इस कविता को कई बार पढ़ा और आज जब इसे दोबारा पढ़ा तो भयानक बारीकी से बुनी हुई लगी ईश्वर अगर तू है तो (संशय) और खुदा के होने पर यकीन है थोड़ी ज्यादा बारीकी से बुनी है, यह इसलिए ...
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Malini s Poster on 5 April 26 and Man Ko Chithti - Posts from 1 to 7 April 26

  _____ एक दरख़्त की छाया में नहीं, विशाल बरगद की छाया में नहीं, पहाड़ की तलाई में नहीं, नदी के किनारे नहीं, समुद्र की रेत के किनारे नहीं, किसी जंगली झुरमुट में नहीं, किसी सूनसान पगडंडी पर नहीं, किसी शीतल चांदनी में नहीं, रात के गहन स्तब्ध सन्नाटे में नहीं - अभी तक की पूरी जिंदगी एक नन्हीं सी पत्ती की छाया में गुजारकर आया हूँ - इसलिए बहुत अच्छे से जीवन के मायने, अर्थ, उद्देश्य, फलसफे, लोग, मित्र, दुश्मन और जीवन के अन्तिम प्रारब्ध से वाकिफ़ हूँ बस, एक नया दशक शुरू होने को है - हालांकि छह दशकों की परिलब्धियां इठलाती तो है, इस लंबी अथक यात्रा की पोटली में उपलब्धियों से ज़ियादा असफलताएं है जिन्हें बहुत संजोकर रखा है किसी धड़कन की तरह, बस इसी तरह से शेष समय निकल जाए इस शुष्क और बेजान होती कोपल के बीच उगी पत्ती की छाया में तो धन्य समझूं अपने को I quote John Burroughs - "One resolution I have made, and try always to keep, is this - "to rise above little things" #मन_को_चिठ्ठी *** "मुंबईया फिल्म उद्योग के भांड और वैश्विक कलाकार" _______ हमारे यहां कंगना रनौत जैसी गंवार और...

Man Ko Chiththi and other Posts from 31 March to 2 April 26

"मुंबईया फिल्म उद्योग के भांड और वैश्विक कलाकार" _______ हमारे यहां कंगना रनौत जैसी गंवार और विशुद्ध मूर्ख से लेकर बाकी हेमामालिनी तक की मूक बधिर लोगों की फौज है, मूर्ख अक्षय जैसे लोग है जो पूछते है कि आप आम काटकर खाते है या छीलकर, लिएंडर पेस है - जो अंधभक्त होकर दक्षिणपंथ को ज्वाईन कर लेते है, दलाल मीडिया है जो विधायक सांसद और पार्षदों के टुकड़ों पर पलकर कुत्तों की तरह उनके पीछे कैमरे उठाए दौड़ते है, उनका हगा - मूता चाटकर पेट भरते है तभी ना गत बारह वर्षों में एक भी प्रेस वार्ता नहीं हुई वही अमेरिका की सदाबहार अभिनेत्री मैरिल स्ट्रीप है जो मूर्ख डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत में मूल सवाल उठाती है और बगैर भय के ट्रंप को सवालों के बीच खड़ा करती है, हमारे परिधान को तो नौटंकी करने और शूट करने से फुर्सत नहीं मिल रही, पूरी दुनिया और अपना देश गैस, पेट्रोल और डीजल के साथ महंगाई से जूझ रहा है और वो अमर होने के नुस्खे शूट कर रहा किसी भांड की तरह कपड़े बदल बदलकर महिलाओं के बीच _______ मेरिल ने कहा आप परिवारों को तबाह कर रहे हैं और इसे राजनीति कह रहे हैं। हमें ऐसा नहीं होना चाहिए।" ट्रम्...

Drisht Kavi and Other Posts from 18 to 30 March 2026

देवास में एक घटिया स्कूल है और फर्जी आईआईटी कोचिंग के नाम पर फीस बटोरने वाला प्रॉक्सी स्कूल है - जिससे रोज वाट्सअप पर संदेश आते रहते है, एक घटिया लड़का जो खुद वर्षों तक बी ई पास नहीं कर सका वो जनता को बेवकूफ बनाकर धंधा कर रहा है जिसके अश्लील वीडियो चर्चित हुए थे देशभर में इन कमीनों को पचास बार बोला कि "मेरे निजी नम्बर पर संदेश भेजकर नम्बर का इस्तेमाल ना करें, यह मेरी निजता में दखल है" - पर सुनते नहीं, आज आखिर सीधे बात की उस दो कौड़ी के बीई फेल के किसी बाबू से और बोला कि "यदि अब मैसेज आया तो थाने में रिपोर्ट करूंगा कि मेरी निजता में दखल हो रहा है, और संविधान के अनुच्छेद 21 का वायलेशन हो रहा है" आए दिन ये कंपनी वाले और विभिन्न संस्थाओं के लोग, जूते-चप्पल से लेकर कपड़े बेचने वाले, लोन देने वाले मैसेज और फोन करते रहते है, सुप्रीम कोर्ट को इन नालायकों के खिलाफ कार्यवाही करना चाहिए़ जब इसे कोई जानता नहीं था तब तत्कालीन नवभारत ने इससे अकूत चंदा लेकर विज्ञापन छापे थे , फिर भास्कर और नईदुनिया ने यह परम्परा निभाई, बाद में अब कुछ स्थानीय टटपूँजिया पत्रकार, लोकल चैनल के दलालों ...