ये अंधेरी शाम के साए है जो सदैव संग रहते हैं _______ गर्मी में दोपहर लंबी, उबाऊ और अलसाई होती है, शामें उदासी से भरी और रातें एकाकी इतनी कि यदि रातभर बैठकर छत पर तारें गिनते रहें तो भी रक्त छोटी पर जाएं, गर्मी फिर भी मुझे भांति है क्योंकि इसके बाद ही वर्षा ऋतु आएगी और सब कुछ भिगोकर तृप्त कर देगी ये जो पीले जर्द पत्ते आप गमलों की पंक्ति में देख रहे हैं - इन्हें सन सोलह में भोपाल के एक दफ्तर से लाया था, तब DFID में राज्य स्तर पर काम करता था, इसके पास नफीस का दिया हुआ अंजीर का पेड़ है, पीपल है, बरगद है, रबर है और नीम है - साथ ही चैताली जब इंदौर छोड़कर कोलकाता जा रही थी तब उसके बड़े से रेलवे क्वार्टर्स से निकाला हुआ कढ़ी पत्ते का पौधा है जो अब बड़ा हो गया है दो नींबू के पौधे थे - जिन्हें बरसों से सम्हाल कर रखा था, लोग कहते है गमले में भी फल आ जाते है - पर नहीं आए, बहुत पानी पीते है तीसरे माले पर इन्हें पालने में अपनी जान जोखिम में डालकर, खुद प्यासा रहकर, गर्मी सहकर इन्हें पालता हूँ और सिर्फ नींबू नहीं - बल्कि अजवाइन, मनी प्लांट, और भी ढेरों सब्जियों के भी पौधे - जो मेरे लायक सब्जी दे देते ...
वोट चोरी, राज्य चोरी, चुनावी घालमेल, और भयानक हिंसा के हल्ले के बाद इन सारी घटनाओ को छुपाने, जनता और देश दुनिया का ध्यान भटकाने के लिए भाजपा क्या कर सकती है इसकी कल्पना अब बहुत मुश्किल नहीं है , ये लोग सिर्फ और सिर्फ स्वार्थ, सत्ता और धन से जुड़े है और इसके लिए कुछ भी कर सकते है जिस अंदाज में इस तरह की कार्यवाहियों का विरोध, और पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे है, विपक्ष से लेकर नामी वकील चुनाव आयोग से लेकर सुप्रीम कोर्ट के SIR वाली प्रक्रिया पर सुस्ती दिखाने या अगली बार वोट कर देना जैसे बयान पर लोग कमेंट कर रहे है वह चिंतनीय है आखिर में प बंगाल में चुनावों की आड़ में कब्जा करके जिस तरह से हिंसा और बाकी सब किया वह शर्मनाक है, जो थोड़ी बहुत आस्था थी वह भी खत्म हो गई है पिछले तेरह साल में शुभेंदु के चौथे पीए की हत्या मतलब बहुत बड़ा लोचा है, क्या जांच इस दिशा में भी होगी, इन चारों मृतक पीए के बारे में विस्तृत जानकारियां ली जाए कि आखिर इनमें क्या समानता थी और ये असमय क्यों मारे गए, शुभेंदु जब टीएमसी में थे तब दो और भाजपा में आने के बाद दो यानी क्या सवाल नहीं है, यह राजनैतिक ना होकर कुछ व्यक्त...