असल में ना वोटिंग ज्यादा हुआ ना चुनाव हुए है सही तरीके से, केंद्र सरकार ने बेहद भद्दे तरीके से पूर्ण षडयंत्र करके और SIR को माध्यम बनाकर चुनाव जीतने का आपराधिक कार्य किया है इतनी हिम्मत तमिलनाडु या केरला में दिखाते तो वहां की जनता दौड़ा - दौड़ाकर दिमाग ठिकाने पर ला देती इन तीन-चार धूर्त और पूरी पार्टी को, शर्म आनी चाहिए कि एक राज्य में सारी मशीनरी, ज्ञानेश कुमार जैसा निकम्मा गिरगिट ब्यूरोक्रेट और प्रमोटी आयएएस अफसरों (जो वैसे भी जनता पर बोझ होते है, आरक्षण या चापलूसी से बने ये और कर ही क्या सकते है सिवाय Observer बनने के) के सहारे चुनाव जीतने का घिघौना खेल खेला है इसलिए अगर बंगाल, असम में भाजपा आ भी जाए तो यह सिर्फ खौफ है, सरकारी सुविधाएं छीन ना जाएं इसलिए 92-94% तक वेटिंग हुआ और केंद्र की सारी पुलिस से लेकर पैरा मिलिट्री लगाकर चुनाव और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर जो धब्बा लगाया है वह इतिहास में याद रखा जाएगा, सुप्रीम कोर्ट भी तमाम हस्तक्षेप के बावजूद मतदाता सूची से करीब बयानवें लाख लोगों को उनके मताधिकार को दिला नहीं सका और राष्ट्रपति तो अपने यहां रबर स्टाम्प है ही बहरहाल, यह चुनाव बहु...
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