नब्बे पेपर लीक और नीट से लेकर लखनऊ में आज जल गए सोलह बच्चों को देखकर समझ आता है कि इस देश में भावी नागरिकों की क्या हालत कर दी है इन नालायकों ने, दिल्ली में कोचिंग में युवा बर्बाद हुए और मरे थे - उससे कोई सबक नहीं लिया
मोदी, शाह और योगी ने अपने बकवास और घटिया भाषणों में कभी शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की बात नहीं की, सिवाय हिंदू, मुस्लिम, रोहिंग्या, मंदिर - मस्जिद, बीफ़, सर, नोटबंदी के अलावा कुछ नहीं बोला और सिर्फ वोट उगाही का काम किया
दिल्ली कोचिंग, अहमदाबाद हवाई दुर्घटना में मेडिकल के छात्रों से लेकर आज लखनऊ तक सिर्फ युवा, किशोर ही मर रहे है जलकर, नीट से लेकर बाकी परीक्षाओं के पेपर लीक और मप्र में राज्य प्रायोजित व्यापमं में भी साठ से ज्यादा छात्र और लोग मारे गए है - पर इन बेशर्मों को फर्क नहीं पड़ रहा, मामा दिल्ली चला गया
कितने बेशर्म और निर्लज्ज है इस सरकार के लोग, चंदा चोर और अपंजीकृत कार्यकर्ताओं की अंधभक्त फौज और तो और देश भर के पढ़े - लिखे गंवार प्राध्यापक जो इनके दस्त चाट रहे और नौकरी बचा रहे अपनी, जैसे हमारे भोपाल के माखनलाल गौशाला पत्तल कारिता के चाटुकार घटिया अखबारों में लेख लिखकर चोरों से लेकर चंदे पर पलने वाले संघ की पैरवी कर रहे है और अपने - आपको लेखक, विचारक बता रहे है, छात्रों की दर्जनों पीढ़िया बर्बाद करके गोदी मीडिया के दलाल पैदा कर दिए - जिन्हें ना हिंदी आती है - ना अंग्रेजी और पत्रकारिता तो दूर - सामान्य ज्ञान नहीं , बस चौबीसों घंटे चरण सेवा और मीडिया में दलाली करना सीख रहे है
क्या गलत कहा था मणिशंकर ने - "नीच", कितना सुशासन योगी का है और कितना प्रबंधन अमित शाह का है - यह समझ आ गया है और मोदी का तो पूछो मत उसे विदेश घूमने और बुढ़ियाओ को चॉकलेट खिलाने या ट्रंप की गुलामी से फुर्सत मिलें तो कुछ समझ आए
उल्टी गिनती गिन रहे है और जनता को अभी भी समझ नहीं आ रहा कि इन नरभक्षियों का पेट अभी भी नहीं भर रहा, अपने आका अंबानी और अदाणी को देश ही नहीं - अपना ज़मीर भी सौंप दिया है, The Wednesday में नसीरुद्दीन शाह कहता है -"Bloody, the whole system has collapsed",और ये ही वे लोग है जिन्होंने पूरे तंत्र में भांग घोल दी है
बेहद शर्मनाक है , कोई समझदार राज्यपाल या राष्ट्रपति या सीजेआई होता तो इसे राज्य की गंभीर लापरवाही को ध्यान में रखकर सरकार को बर्खास्त करता और सबको जेल में डालकर गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दायर करता
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किसी दिन ज़िन्दगानी में करिश्मा क्यों नहीं होता
मैं हर दिन जाग तो जाता हूँ पर जिंदा क्यों नहीं होता
मेरी ज़िंदगी के कितने हिस्सेदार है लेकिन
किसी की ज़िंदगी में मेरा हिस्सा क्यों नहीं होता
डॉक्टर राजेश रेड्डी
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जीवन में हम सब आने वाले समय के सुख की कल्पना में अपने हाथ पर बैठे हुए अनमोल पल को भूलते जाते है और सब कुछ गंवा देते है, और जबकि आने वाला भविष्य कुछ नहीं - सिवाय कपोल कल्पना के, अतीत के राग-द्वेष और भविष्य के सुख के बीच अपने-अपने राग और ढपलियों से बचकर यदि अभी इसी पल को यादगार बनाने और जी भरकर जीने का स्वांग भर ही कर लें तो शायद हम जी सकें, बस सब कुछ एकदम निर्मोही होकर सोचना होगा - मोह माया और सबसे विरक्त होकर, उन्मुक्त होना होगा, सब छोड़कर सबसे दूर अपने लिए एक कोना ढूंढकर एक खुले आसमान में लंबी उड़ान भरनी होगी - बगैर भय और संकोच के तभी कही ठौर मिलेगा
जीवन हमेशा से एकल रहा है और एकांत में ही पुष्पित - पल्लवित होता है
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