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Khari Khari, Man Ko Chiththi and other posts from 30 May to 1 June 2026

हमारे देवास गांव (सॉरी जिला मुख्यालय) के बिजली विभाग वाले पिछले चार - पांच दिन से रोज सुबह छह बजे से कभी ग्यारह, कभी बारह और आज दस बजे तक यानी छह - सात घंटा रोज मेंटेनेंस के नाम पर बिजली काट रहे थे कि बरसात में हम सम्मानित उपभोक्ताओं को कोई कष्ट ना हो, और बेचारों की किस्मत देखो - आज दस बजे बिजली आई ही थी कि दो - चार बार फिर चाय पीने चली गई, और अभी तेज हवा चल रही तो आधे घंटे काफी हाउस में डोसा खाने गई है, लंच टैम से ज्यादा हो गया तो भूख लगी होगी बिजली रानी को भी - फिर बरसात का भरोसा नहीं, खाना तो होना कि नई
फोन तो उठाकर रख ही देते है बेचारे, हम लोग उन्हें परेशान कर देते है, साला हजार - दो हजार रुपया माह का बिल भरकर जैसे खरीद लिया हो उन्हें , इसलिए फोन उठाकर रखना मेरे कूँ तो एकदम वाजिब लगता हैगा
अब आप हो बोलो गलत बोला क्या मैं
कैसे जीबो रे
***
हमारे प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री डाक्टर मोहन यादव की भाषा से समझ गया कि उन्होंने राजनीति विज्ञान में सच में विक्रम विवि उज्जैन से पीएचडी की है और वे उच्च शिक्षा मंत्री थे उसके बाद इस समय प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री है
लिख रहा हूँ ताकि सनद रहें
जुबानों का क्या भाजपाईयों की फिसलती रहती है, अमित शाह संसद में साला से लेकर बाकी गालियाँ देते है, कैलाश जी अनुराग द्वारी को सहज भाषा में समझा देते है, मोहन जी जीतू पटवारी को दो कौड़ी का या टपोरीलाल भरे मंच से कह देते है, केबिनेट मंत्री विजय शाह भारतीय सेना की वरिष्ठ महिला अधिकारी को देशद्रोही बता देते है और सुप्रीम कोर्ट की भी इज्जत ना करते, गुना के विधायक पन्नालाल जी अपनी ही पार्टी के ऊर्जा मंत्री की आरती उतार कर सुसज्जित भाषा से नवाजते है, शिवराज निवाड़ी में एक कलेक्टर मित्र को भरी सभा में धमकाकर भोपाल ट्रांसफर का आदेश देते है, मोदी राहुल, नेहरू जी, इंदिरा जी , राजीव जी से लेकर तमाम विपक्षियों को प्यार से कुछ भी कह देते है, उमा भारती, उषा ठाकुर, स्मृति ईरानी, कंगना की भाषा भी कोई कम अलंकारिक नहीं - मैं तो कह रहा NCERT इन सबको साथ रखकर भाषा और नैतिक शिक्षा की किताबें लिखवाएं
यह देश अपने और भले लोगों से भरा पड़ा है और संघ के शिशु मंदिरों से संस्कृत निष्ठ संस्कार सीखकर और संस्कृति ज्ञान की परीक्षाएं देकर तमाम भैया और बहनें यह भाषा नहीं बोलेंगे तो अपने कुल गुरु आचार्यों और दीदियों का नाम कैसे रोशन करेंगे
अभी तो सिंहस्थ की मेजबानी करनी है मोहन जी को, नागा साधु से लेकर बड़े वाले संत आयेंगे, हो सकता है अपनी भाषा सुधार कर प्रैक्टिस कर रहे हो सभ्य और संविधानिक दायरों को समझने की
लगे रहिए, हम सब सनातनी, संघी और हिंदू आपके साथ है
प्रातः का प्रणिपांत प्रणाम मोहन जी
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एक होती है रीढ़ जो जंतु जगत के हर "मेमल्स" में होती है, इंसान के अलावा कोई और नहीं जो इसे लचीली बनाकर अपने निज स्वार्थ के लिए इस्तेमाल करता है और वो भी सापेक्षता के सिद्धांत के साथ
बस आपको इन गिरगिटों की सही पहचान होनी चाहिए ताकि जीवन सुखद रहें

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